
नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम. कांग्रेस नेता शशि थरूर ने वाम दलों पर तिरुवनंतपुरम में भाजपा विरोधी वोटों को विभाजित करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वाम दल विपक्षी एकता के बारे में बहुत चिंतित होने का दावा करते हैं, लेकिन उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि वे निर्वाचन क्षेत्र में अपनी अधिकांश ऊर्जा “भाजपा के कुशासन” पर केंद्रित करने के बजाय उन्हें (थरूर) कमजोर करने में क्यों लगा रहे हैं.
केरल के तिरुवनंतपुरम में त्रिकोणीय मुकाबला है जहां थरूर के अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पी. रवींद्रन चुनाव मैदान में हैं. थरूर ने कहा कि यह विडंबना है कि वाम दल संसदीय सीट पर भाजपा विरोधी वोटों को विभाजित करना चाहते हैं और वायनाड में गठबंधन धर्म का उपदेश देते हैं, जहां से राहुल गांधी चुनाव लड़ रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री थरूर ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि वाम दलों ने उनके खिलाफ हर बार उम्मीदवार खड़ा किया है और वह इसके लिए उनकी आलोचना नहीं कर सकते, क्योंकि उन्होंने 2009 में पहली बार उनसे यह सीट छीनी थी.
थरूर ने कहा, ”हालांकि पूरे प्रचार अभियान को मुझ पर हमला करने के लिए सर्मिपत करना एक ऐसी रणनीति है जिससे केवल भाजपा को मदद मिल सकती है. वाम दल विपक्षी एकता के बारे में बहुत चिंतित होने का दावा करते हैं, लेकिन भाजपा के कुशासन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, जिसका उन्हें विरोध करना चाहिए, वे अपनी अधिकांश ऊर्जा मुझे कमजोर करने में लगा रहे हैं.”
थरूर ने कहा, ”जानबूझकर या किसी अन्य कारण से, उनका प्रचार अभियान लगभग पूरी तरह से मेरे खिलाफ रहा है, उदाहरण के लिए, मुझ पर फलस्तीन विरोधी और मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाया गया है, जो पूरी तरह से बकवास है. विडंबना यह है कि वे यहां भाजपा विरोधी वोटों को विभाजित करना चाहते हैं और वायनाड में गठबंधन धर्म का उपदेश देते हैं.” थरूर का इशारा परोक्ष तौर पर वायनाड से गांधी की उम्मीदवारी पर भाकपा की आपत्ति की ओर था.
थरूर ने यह भी कहा कि वह निर्वाचन क्षेत्र में अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ एक बहस चाह रहे थे, लेकिन ऐसा लगता है कि वे इसमें शामिल होने को लेकर “अनिच्छुक” हैं और उन्होंने बहस के लिए विभिन्न संगठनों के कई निमंत्रणों को ठुकरा दिया है. कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य थरूर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”मुझे नहीं पता कि उन्हें झिझक क्यों है. मैं केवल अपने लिए बोल सकता हूं: किसी भी बहस में अपनी बात रखने का मेरा आत्मविश्वास मेरे द्वारा अपने मतदाताओं के लिए किए गए कार्यों और राष्ट्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर मेरे द्वारा अपनाए गए रुख के प्रति मेरे दृढ. विश्वास से उपजा है.”
उन्होंने कहा, “आइए हम राजनीति और विकास पर बहस करें. आइए हम मूल्य वृद्धि, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और भाजपा के 10 वर्षों की नफरत की राजनीति पर बहस करें. आइए हम तिरुवनंतपुरम के विकास और पिछले 15 वर्षों में हमने जो दृश्यमान प्रगति की है, उस पर भी चर्चा करें.” उन्होंने चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वियों को इन मुद्दों पर बहस करने की चुनौती दी.
उन्होंने कहा, “मेरी प्राथमिक चिंता मेरे मतदाताओं का कल्याण है और मुझे विश्वास है कि तिरुवनंतपुरम के लोग फिर से मुझ पर अपना विश्वास जताएंगे.” उन्होंने कहा, “जिन्होंने मुझे 15 साल तक काम करते हुए देखा है, उनके पास निर्वाचन क्षेत्र के लिए मेरी सेवाओं और संसद एवं विश्व मंच पर राष्ट्रीय मुद्दों पर मेरे द्वारा अपनाये गए रुख की सराहना करने के कई कारण हैं.” थरूर ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में निर्वाचन क्षेत्र के लिए उनकी उपलब्धियों के लिए, उन्होंने 68 पृष्ठ की एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें इसके बारे में विस्तार से बताया गया है.
कांग्रेस और भाकपा ‘इंडियन नेशनल डेवलप्मेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) के घटक हैं और दोनों दल राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन में शामिल हैं, लेकिन केरल में वे प्रतिद्वंद्वी समूहों – संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के हिस्से के रूप में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.
थरूर वर्ष 2009 में इस सीट से निर्वाचित हुए थे और वे कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग)-1 और संप्रग-2 सरकारों में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री और विदेश राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. थरूर ने 2019 के आम चुनाव में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 99,989 मतों के अंतर से हराकर ‘हैट्रिक’ (लगातार तीसरी जीत) बनाई थी. केरल में 26 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होगा और देशभर में मतों की गिनती 4 जून को होगी.



