‘ऑपरेशन सिंदूर’ में एयर मार्शल भारती की भूमिका को लेकर बिहार के झुन्नी कलां गांव में जश्न का माहौल

'ऑपरेशन सिंदूर' से भारत का संदेश दुनिया उसे कमतर न आंके : सारस्वत

पूर्णिया/तिरुवनंतपुरम. वायु संचालन महानिदेशक (डीजीएओ) एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती के माता-पिता ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनके बेटे द्वारा निभाई गई वीरतापूर्ण भूमिका पर गर्व महसूस कर रहे हैं. एयर मार्शल के पिता जीवछलाल यादव ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”यह मेरे, गांव वालों और देश के लिए गर्व की बात है कि हमारी सेना ने आतंकवादियों को करारा जवाब दिया. मेरे बेटे ने इसमें अहम भूमिका निभाई. पूरे गांव को गर्व है.” राज्य सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी यादव ने कहा, ”वह बचपन से ही अनुशासित रहा है. मैं हमेशा चाहता था कि वह नौसेना में शामिल हो, लेकिन वह भारतीय वायु सेना में शामिल होने के लिए दृढ़ था – ठीक वैसे ही जैसे उसके दादा चाहते थे.”

उन्होंने कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और मेरे बेटे ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. गांव के लोग बहुत खुश हैं – हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो रहा है. वह बचपन से ही अनुशासित इंसान रहा है.” यादव ने कहा कि उनके बेटे ने हाल में हुई बातचीत में अभियान के बारे में कुछ नहीं बताया था.

उन्होंने कहा, ”मुझे उनकी भूमिका के बारे में श्रीनगर हाता, पूर्णिया शहर के पड़ोसियों और ग्रामीणों से पता चला. लोग हमें बधाई देने के लिए फोन कर रहे हैं और आ रहे हैं.” एयर मार्शल भारती का पैतृक गांव झुन्नी कलां गौरव का केन्द्र बन गया है, क्योंकि इस सम्मानित अधिकारी ने भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े आतंकवाद-रोधी अभियानों में से एक को अंजाम देने में मदद की. भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाकर शुरू किया गया था. पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से भारत का संदेश दुनिया उसे कमतर न आंके : सारस्वत
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व महानिदेशक डॉ.वीके सारस्वत के मुताबिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को कभी कम नहीं आंका जाना चाहिए और देश अब एक अग्रणी शक्ति है. डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख ने ‘पीटीआई वीडियो’ को बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों पर की गई जवाबी कार्रवाई से यह भी पता चलता है कि भारत ने रक्षा प्रौद्योगिकी में कितनी आत्मनिर्भरता हासिल की है. पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे.

भारत की मिसाइल और वायु रक्षा प्रणालियों के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले सारस्वत ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिये भारत ने दिखा दिया है कि वह आत्मनिर्भर है और किसी भी दिशा से आने वाले किसी भी खतरे का मुकाबला करने की क्षमता रखता है.
सारस्वत ने कहा, ”जिस सटीकता के साथ हम दुश्मन के इलाके में लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम हुए, वह हमारे हथियारों की गुणवत्ता को दर्शाता है. आज सबसे बड़ी बात यह है कि रूस से लिए गए एस400 के अलावा, मुझे लगता है कि सभी मिसाइलें एलआरएसएएम, एमआरएसएएम, आकाश और सभी ड्रोन, सभी लड़ाकू विमान, सब कुछ, देश में ही निर्मित हैं – डिजाइन, विकसित और निर्मित.”

आकाश, एमआरएसएएम (मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल) और एलआरएसएएम (लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल) भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली के प्रमुख घटक हैं. नीति आयोग के सदस्य सारस्वत ने याद किया कि कैसे मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) के तहत अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा भारत पर लगाए गए प्रतिबंध, देश के लिए अपने हथियार प्रणालियों के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और घटकों को विकसित करने का अवसर बन गए.

सारस्वत ने कहा, ”हमने अपनी सभी मिसाइल प्रणालियों का विकास किया है, चाहे वे वायु रक्षा प्रणालियां हों, या सामरिक मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियां या अग्नि, पृथ्वी जैसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हों. इन सभी को एमटीसीआर के तहत विकसित किया गया है. इसलिए हर कदम पर हमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन नहीं मिलने की चुनौतियों का सामना करना पड़ा.” उन्होंने कहा कि भारत को अपनी मिसाइल प्रणालियों के विकास के लिए आवश्यक सामग्री, घटकों और प्रौद्योगिकियों से वंचित रखा गया.

डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख ने कहा, ”हम एमटीसीआर का हिस्सा नहीं थे, इसलिए हमारे अपने बहुत अच्छे मित्र भी हमें तकनीक नहीं दे रहे थे.” सारस्वत ने याद किया कि किस प्रकार पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत डॉ. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में डीआरडीओ ने इस चुनौती को स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास के अवसर में बदल दिया. डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख ने कहा कि इससे भारत को आज देश की हथियार प्रणालियों में 70-80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशीकरण हासिल करने में मदद मिली.

उन्होंने कहा, ”हम आज भी विदेश (आपूर्ति) पर निर्भर हैं, लेकिन इसलिए नहीं कि हम इसे यहां नहीं कर सकते, बल्कि इसलिए कि यह लागत प्रभावी नहीं है. कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनकी बहुत कम संख्या में आवश्यकता होती है, लेकिन इतनी कम संख्या के लिए सुविधा स्थापित करने की लागत बहुत अधिक होती है, इसलिए हम आयात करते हैं.” सारस्वत ने कहा, ”अत:, कुल मिलाकर, मैं यह कहना चाहूंगा कि भारत ऊंची उड़ान भर रहा है और जहां तक ??रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों का सवाल है, आत्मनिर्भरता का मिशन पूरा हो रहा है.” उन्होंने कहा कि भारत की मारक क्षमता का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान के पास कोई मौका नहीं है.

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