दरों में कटौती की गुंजाइश, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण यथास्थिति जरूरी: RBI गवर्नर

मुंबई. मुद्रास्फीति में कमी ने दरों में कटौती की गुंजाइश बनाई है, लेकिन ब­ढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और पिछले मौद्रिक उपायों का पूरा लाभ न मिलने के कारण केंद्रीय बैंक ने दरों को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को यह बात कही. मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद पारंपरिक संवाददाता सम्मेलन में मल्होत्रा ने कहा कि मुद्रास्फीति में एक प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय गिरावट और इसके पूर्वानुमान ने दरों में कटौती की गुंजाइश बनाई है.

उन्होंने विस्तार से बताया कि जून में उन्होंने कटौती के लिए ‘सीमित गुंजाइश’ शब्द का इस्तेमाल किया था, जबकि बुधवार के बयान में ‘सीमित’ शब्द हटाकर यह कहा गया कि कटौती की गुंजाइश मौजूद है. आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती न करने के सवाल का जवाब देते हुए, मल्होत्रा ने कहा कि पिछली एक प्रतिशत से ज्यादा की कटौती का पूरा लाभ न मिलने, वैश्विक मोर्चे पर अनिश्चितताओं और जीएसटी को तर्कसंगत बनाने के ब­ढ़ते प्रभाव के कारण दर निर्धारण समिति ने यथास्थिति बनाए रखने का विकल्प चुना है.

मल्होत्रा ??ने कहा, ”अभी भी काफी अनिश्चितता है. हम हर हफ्ते, हर दिन घटनाक्रम देखते हैं और प्रतिक्रियाएं भी देखते हैं, इसलिए एमपीसी को लगा कि हमें रुक जाना चाहिए.” उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक में रुख को ‘तटस्थ’ से ‘उदार’ में बदलने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें छह में से दो सदस्यों ने बदलाव का समर्थन किया. गवर्नर ने कहा कि वृद्धि के मोर्चे पर पहली तिमाही के आंकड़े सकारात्मक रूप से आश्चर्यचकित करने वाले रहे हैं, लेकिन वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कुछ चुनौतियां हैं.

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि तीसरी और चौथी तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान में मामूली गिरावट आई है.
गवर्नर ने कहा कि वृद्धि के मोर्चे पर चुनौतियां मुख्य रूप से अमेरिकी शुल्क के कारण आएंगी. उन्होंने हालांकि कहा कि भारत एक घरेलू मांग आधारित अर्थव्यवस्था है और शुल्क का समग्र प्रभाव सीमित रहेगा.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button