भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए कृषि क्षेत्र का पांच प्रतिशत की दर से बढ़ना जरूरी : चौहान

नयी दिल्ली. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में पांच प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर जरूरी है. चौहान ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 93 प्रतिशत कृषि भूमि पर खाद्यान्न उगाया जाता है, लेकिन वृद्धि सिर्फ 1.5 प्रतिशत है.

उन्होंने कहा, ”हम फसलों में उपज के अंतर को पाटने और राष्ट्रीय औसत उपज हासिल करने की दिशा में काम कर रहे हैं… अगर हमें वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को सालाना पांच प्रतिशत की दर से बढ़ना होगा.” वह कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और आईसीएआर संस्थानों के निदेशकों के वार्षिक सम्मेलन के मौके पर एक संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे. मंत्री ने भरोसा जताया कि पांच प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर हासिल की जा सकती है. उन्होंने इस प्रयास में विभिन्न कृषि संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया.

उन्होंने कहा, ”कृषि उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में अनुसंधान की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है. हमारा लक्ष्य कृषि की वार्षिक वृद्धि दर को पांच प्रतिशत बनाए रखना है. हमारा प्रयास है कि सभी अनुसंधान संस्थान लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एक दिशा में काम करें.” चौहान ने कहा कि भारत को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्र को 1,000 अरब डॉलर हासिल करना होगा.

उन्होंने कृषि निर्यात को मौजूदा छह प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया. अनुसंधान और विकास के बारे में मंत्री ने कहा कि वर्तमान में कृषि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.4 प्रतिशत नवोन्मेषण और शोध में निवेश किया जाता है.
उन्होंने कहा, ”हमने इस बात पर भी चर्चा की कि निवेश को एक प्रतिशत कैसे बढ़ाया जाए.” उन्होंने कृषि के लिए प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया क्योंकि भूमि जोत 1.18 हेक्टेयर के मौजूदा स्तर से वर्ष 2047 तक घटकर 0.6 हेक्टेयर रह जाने के आसार हैं.

चौहान ने जर्म प्लाज्म के बेहतर उपयोग का भी आह्वान किया. मंत्री ने कहा, ”हमारे पास अभी 4.5 लाख जर्म प्लाज्म है, जिसमें से पांच प्रतिशत का उपयोग हो चुका है. हमें इसे बढ़ाने की जरूरत है.” उन्होंने बताया कि कृषि संस्थानों के साथ विचार-विमर्श के बाद लघु, मध्यम और दीर्घकालिक योजनाएं बनाई जाएंगी.

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