
नयी दिल्ली/लखनऊ. निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव में उसके दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने और मतदाताओं को वोट डालने से रोकने के आरोप में बुधवार को कम से कम पांच पुलिसर्किमयों को निलंबित करने और कई अन्य को चुनाव ड्यूटी से हटाने का आदेश दिया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.
समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता पहचान पत्रों और आधार कार्ड की जांच करने वाले उन सभी पुलिस अधिकारियों को वीडियो साक्ष्य के आधार पर निलंबित करने का निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया था. उसके बाद आयोग ने यह कार्रवाई की. आयोग के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए जिला निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों ने शिकायतों की पुष्टि के बाद उक्त पुलिसर्किमयों को उनके आचरण के लिए निलंबित कर दिया.
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि मुजफ्फरनगर में मतदाताओं की जांच के दौरान आयोग के दिशा-निर्देशों का ”अनुपालन नहीं करने” के कारण दो उप-निरीक्षकों को निलंबित कर दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि मुरादाबाद में पुलिसर्किमयों द्वारा मतदाताओं के पहचान पत्रों की जांच के संबंध में प्राप्त शिकायतों के मद्देनजर गहन जांच की गई. उन्होंने बताया कि ये मामले भीकनपुर कुलवाड़ा और मिलक सिरी गांवों से संबंधित थे. उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक उपनिरीक्षक, दो हेड कांस्टेबल और दो महिला कांस्टेबल को चुनाव ड्यूटी से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया गया है. पुलिसकर्मी के मतदान केन्द्र में प्रवेश करने से संबंधित एक अन्य शिकायत की जांच में पाया गया कि वह मतदान प्रक्रिया के सुचारू संचालन के बारे में पूछताछ करने के लिए मतदान केन्द्र के भीतर गया था.
निर्वाचन आयोग ने कहा कि चूंकि यह उसके दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है, इसलिए दोषी पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय कार्यवाही शुरू की जाएगी. इसी तरह का निलंबन आदेश कानपुर जिले के सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में भी दिया गया है. उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए चुनाव ड्यूटी पर तैनात पांच पुलिसर्किमयों को निलंबित कर दिया गया है.
उन्होंने कहा, ”इसमें कानपुर और मुजफ्फरनगर में दो-दो तथा मुरादाबाद में एक पुलिस र्किमयों का निलंबन शामिल है. हम सभी शिकायतों पर संज्ञान लेते हैं और उनका तुरंत सत्यापन करते हैं, जिसके बाद कार्रवाई की जाती है.” रिणवा ने कहा कि यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि केवल चुनाव अधिकारी ही मतदाताओं के पहचान पत्रों की जांच करेंगे, मतदान केंद्र के बाहर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी नहीं.
कानपुर के पुलिस आयुक्त अखिल कुमार ने संवाददाताओं को बताया कि सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रक्रिया को बाधित करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए और अतिरिक्त अवरोधक लगाए गए. उन्होंने कहा, ”चुनाव मानदंडों और आचरण का अनुपालन नहीं करने पर दो उपनिरीक्षकों को निलंबित कर दिया गया है.”
मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अभिषेक सिंह ने बताया कि मीरापुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव ड्यूटी के दौरान निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर दो उपनिरीक्षकों – शाहपुर थाने के नीरज कुमार और भोपा थाने के ओमपाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है.
उन्होंने कहा, ”यह कदम प्राप्त शिकायतों के आधार पर उठाया गया है और इन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.” मुरादाबाद जिले में कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव ड्यूटी के दौरान निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर कुछ पुलिसर्किमयों को हटा दिया गया है. पुलिस ने हालांकि, किसी कर्मी को निलंबित करने से इनकार किया है.
बिलारी के क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार तिवारी ने कहा, ”हमें किसी पुलिसकर्मी के निलंबन या आयोग द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी नहीं है.” उन्होंने कहा, ”केवल उन पुलिसर्किमयों को हटाया गया है जो भारी वाहनों या मतदाताओं के वाहनों को गुजरने में अनावश्यक रूप से बाधा उत्पन्न कर रहे थे.” उपचुनाव के दौरान कुछ समुदायों को मतदान करने से रोके जाने के संबंध में सपा द्वारा सोशल मीडिया पर की गई शिकायतों का संज्ञान लेते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचन अधिकारियों को निष्पक्ष एवं सुचारू मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए.
अधिकारियों को कहा गया कि वे सभी शिकायतों का तत्काल संज्ञान लें और त्वरित कार्रवाई करें तथा शिकायतकर्ता को सोशल मीडिया के माध्यम से भी टैग करके सूचित करें. उन्हें कहा गया कि किसी भी पात्र मतदाता को मतदान करने से नहीं रोका जाना चाहिए तथा किसी भी प्रकार का पक्षपातपूर्ण रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अधिकारियों ने कहा कि निर्वाचन अधिकारियों को कहा गया है कि शिकायत मिलने के बाद अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीट पर उपचुनाव शाम पांच बजे संपन्न हो गया, हालांकि इस अवधि से पहले कतार में खड़े सभी मतदाताओं को मतदान करने की अनुमति दी गयी है.



