पीड़िता की आशंका निराधार, सरकार उसे न्याय दिलाना चाहती है: केरल सरकार

कोच्चि. केरल सरकार ने 2017 में एक अभिनेत्री पर हुये हमले की जांच और सुनवाई को लेकर पीड़िता की आशंका को निराधार बताया और कहा कि इस मामले में राज्य सरकार का रूख शुरू से यह सुनिश्चित करना रहा है कि पीड़िता को न्याय मिले. केरल सरकार ने उच्च न्यायालय में बुधवार को यह बात कही.

प्रदेश की एलडीएफ सरकार पर राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता की याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायमूर्ति जियाद रहमान ए. ए. के समक्ष यह बात कही. पीड़िता ने आरोप लगाया था कि इस मामले में जांच को पटरी से उतारने की कोशिश की गई जिसमें अभिनेता दिलीप भी एक आरोपी हैं . सुनवाई के दौरान पीड़िता के अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि मामले में जांच नहीं हो रही है . इस पर अदालत ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख पर यह फैसला किया जाएगा कि जांच के संबंध में निचली अदालत से रिपोर्ट मांगना आवश्यक है अथवा नहीं .

उच्च न्यायालय ने हालांकि अभियोजन पक्ष के उस मौखिक अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, जिसमें 30 मई तक जांच पूरी करने के लिए दी गई समय सीमा को बढ़ाये जाने का आग्रह किया गया था . अदालत ने यह कहते हुए समय सीमा बढाने से अस्वीकार कर दिया कि यह निर्देश अन्य न्यायाधीश द्वारा दिया गया है और जांच एजेंसी को और समय चाहिये तो उसे उसी पीठ से संपर्क करना चाहिए .
इसने यह भी कहा कि अभिनेता दिलीप को इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है और कहा कि इस कार्यवाही के परिणाम से उनके अधिकार भी प्रभावित होंगे.

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को पीड़िता के आरोपों पर बयान दाखिल करने का निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया कि पीड़िता की आशंकाएं निराधार हैं क्योंकि अब तक पूरे मामले को पीड़िता को भरोसे में लेकर आगे बढ़ाया गया है और सरकार का रुख हमेशा पीड़िता को न्याय सुनिश्चित करने का रहा है. राज्य ने यह भी कहा कि पीड़िता के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए मामले में विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) को भी नियुक्त किया गया था.

इसके बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि वह मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को करेगा. इस बीच केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तथा सांसद के सुधारकरन ने बयान जारी कर कहा कि मामले में पिछले एसपीपी के इस्तीफा देने के बाद आज तक राज्य सरकार ने किसी और एसपीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की .

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अगर सरकार पीड़िता के साथ होती तो नए एसपीपी की नियुक्ति बहुत पहले हो जानी चाहिए थी. .
सुधारकन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस आनन-फानन में आधी-अधूरी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया में थे, और इसी से पता चलता है कि वह मामले को कितनी गंभीरता से ले रही है. उच्च न्यायालय ने 19 अप्रैल को मामले की जांच पूरी करने के लिए समय सीमा 30 मई तक बढ़ा दी थी. याचिका में, पीड़िता ने निचली अदालत के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पीठासीन अधिकारी का ‘‘अपराधियों को बचाने में कुछ निहित स्वार्थ है.’’

केरल में अभिनेत्री, दोस्तों से अशिष्ट व्यवहार पर पुलिसकर्मी के खिलाफ आंतरिक जांच

प्रसिद्ध मलयालम अभिनेत्री और टीवी प्रस्तोता अर्चना कवि के साथ कथित तौर पर अशिष्ट व्यवहार करने के लिए केरल के एक पुलिसकर्मी को आंतरिक जांच का सामना करना पड़ रहा है. अभिनेत्री हाल ही में शहर में रात को एक आॅटो में अपने दोस्त और परिवार के साथ यात्रा कर रही थीं, तभी यह वाकया हुआ. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच पहले ही शुरू की जा चुकी है और अभिनेत्री और आरोपी पुलिसकर्मी दोनों के बयान लिये गए हैं.

उन्होंने कहा कि यह घटना तब हुई जब पुलिसकर्मी रात्रि गश्त कर रहा था और वह अभिनेत्री की पहचान नहीं कर सका, क्योंकि उन्होंने फेस मास्क लगा रखा था. कोच्चि के पुलिस उपायुक्त वी. यू. कुरियाकोस ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि चाहे वह किसी प्रमुख हस्ती के साथ हो या आम महिला के साथ, कानून लागू करने वालों की तरफ से ऐसा अशिष्ट व्यवहार स्वीकार्य नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने महिला और पुलिसकर्मी से बात की और दोनों के पक्ष सुने. अभिनेत्री आमतौर पर पुलिस बल के बारे में बहुत अच्छी राय रखती हैं. लेकिन, वर्तमान घटना ने उन्हें पीड़ा पहुंचायी.’’ अधिकारी ने कहा कि पुलिसकर्मी का इरादा, हालांकि, उन्हें आहत करने का नहीं था और वह अपनी गश्त के हिस्से के तौर पर सूचना एकत्र करने की कोशिश कर रहा था.

पुलिस उपायुक्त ने यह भी कहा कि पुलिसकर्मी को फिर से तलब किया जाएगा और अगर जरूरत महसूस हुई तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी. यह घटना तब सामने आई जब अर्चना कवि ने हाल ही में अपनी महिला मित्रों के साथ रात में यात्रा करते समय पुलिस के साथ अपने बुरे अनुभव को सोशल मीडिया मंच पर साझा किया. उन्होंने कहा था कि पुलिसकर्मी ‘‘बेहद असभ्य’’ था और वह ‘‘सुरक्षित महसूस नहीं कर रही थीं.’’

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