जब केएल शर्मा ही स्मृति ईरानी को हरा सकते हैं तो राहुल गांधी को उतारने की क्या जरूरत: गहलोत

अमेठी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कहा है कि उनकी पार्टी ने अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत किशोरी लाल शर्मा को अमेठी से चुनावी मैदान में उतारा है और जब वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्मृति ईरानी को हरा सकते हैं, तो राहुल गांधी जैसे बड़े राष्ट्रीय नेता को उम्मीदवार बनाने की क्या जरूरत है.

अमेठी संसदीय क्षेत्र के लिए पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक के रूप में यहां आए गहलोत ने यह उम्मीद भी जताई कि कांग्रेस अमेठी और रायबरेली दोनों लोकसभा सीट पर बड़े अंतर से जीत हासिल करेगी. पिछले 25 वर्षों में पहली बार गांधी परिवार के किसी भी सदस्य के अमेठी से चुनाव नहीं लड़ने पर, गहलोत ने कहा कि स्थिति ऐसी है कि इस संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं और यदि कोई इनमें से प्रत्येक क्षेत्र में किसी से भी पूछे, तो उसे पता चल जाएगा कि कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा चुनाव है.

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ”कांग्रेस यहां से चुनाव लड़ रही है, हमारा उम्मीदवार लड़ रहा है, लेकिन लोगों ने यह चुनाव लड़ने का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया है.” ईरानी के बारे में पूछे जाने पर गहलोत ने कहा, ह्लहम पहले ही जवाब दे चुके हैं – जब केएल शर्मा जी स्मृति ईरानी का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त हैं तो लोग राहुल गांधी के बारे में क्यों बात कर रहे हैं.ह्व उनका कहना था, ”यह कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है और उन्हें (शर्मा को) बहुत सोच-विचार के बाद टिकट दिया गया है. इसलिए वे लोग जो चाहें, कह सकते हैं. जब हम जानते हैं कि केएल शर्मा जी हमें यहां चुनाव जिता सकते हैं तब राहुल गांधी को मैदान में उतारने की कोई जरूरत नहीं थी.” गहलोत ने इस बात का उल्लेख किया कि शर्मा 40 वर्षों तक कांग्रेस के कार्यकर्ता रहे हैं. उनके मुताबिक, कांग्रेस ने उन्हें चुनाव लड़ने का मौका देकर पूरे देश को एक संदेश दिया है.

भाजपा के रायबरेली उम्मीदवार दिनेश सिंह के शर्मा को ह्लप्रियंका गांधी का क्लर्कह्व और ह्लगांधी परिवार का चपरासीह्व कहने पर गहलोत ने कहा कि ऐसे बयान अमेठी के लोगों को पसंद नहीं आए हैं और इस पर प्रतिक्रिया हो रही है. उन्होंने कहा, ”इन सभी टिप्पणियों से जीत का अंतर बढ़ेगा.” गहलोत ने विश्वास जताया कि कांग्रेस दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल करेगी.

उन्होंने दावा किया, ”इसका एक कारण है. 2014 में हारने के बाद स्मृति ईरानी ने पांच साल तक लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया. राहुल गांधी लोगों के हित में काम करते रहे और बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे उठाते रहे. वे (भाजपा) लोगों को गुमराह करते रहे और 2019 के चुनाव में बालाकोट के बाद एक माहौल बनाया गया…भाजपा ने हर जगह जीत हासिल की, राजस्थान में 25-0 थी, मध्य प्रदेश में भी उन्होंने बड़ी जीत हासिल की और गुजरात में सभी सीटें जीतीं. वह माहौल अलग था.” गहलोत ने कहा कि सांसद के रूप में अपने पांच साल के कार्यकाल के बाद, ईरानी न तो कोई निवेश ला सकीं और न ही ऐसी संस्थाएं ला सकीं जिनसे लोगों को फायदा हो.

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