
सिंगापुर. भारतीय चैलेंजर डी गुकेश और मौजूदा चैंपियन चीन के डिंग लिरेन के बीच रविवार को यहां खेली गयी विश्व शतरंज चैंपियनशिप की छठी बाजी ड्रॉ रही. दोनों खिलाड़ियों के बीच लगातार तीसरा मुकाबला बराबरी पर छूटने के बाद स्कोर 3-3 से बराबर है. उन्हें चैम्पियनशिप जीतने के लिए और 4.5 अंक चाहिये. गुकेश ने 46 चालों के बाद लिरेन को ड्रॉ के लिए मजबूर किया. इस मैच का यह चौथ ड्रॉ मुकाबला था. 32 साल के लिरेन ने पहली बाजी अपने नाम की थी जबकि 18 वर्षीय गुकेश तीसरी बाजी को जीतने में सफल रहे थे. इससे पहले दूसरा, चौथा और पांचवां मुकाबला भी ड्रॉ पर छूटा था.
चौदह चरण के मैच में अभी भी आठ गेम बचे हुए है और सोमवार को दूसरे विश्राम दिवस के बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला फिर शुरू होगा. दुनिया के ज्यादातर खिलाड़ियों ने इस मैच के लिए लिरेन को कमतर आंका था लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वह प्रत्येक बाजी के साथ आत्मविश्वास हासिल कर रहे हैं. गुकेश ने मुकाबले के बाद में कहा कि उन्हें छठी बाजी के दौरान कोई वास्तविक खतरा महसूस नहीं हुआ.
गुकेश ने कहा, ”मैं आरबी8 (ब्लैक की 16वीं चाल) तक इस स्थिति को जानता था और भले ही मुझे (अगली) नहीं पता था, मुझे लगा कि शायद मैंने थोड़ा खराब खेला लेकिन इसे सफेद मोहरों के साथ जीत में बदलना वास्तव में कठिन होना चाहिए क्योंकि आप रानी की तरफ के मोहरों को आसानी से नहीं धकेल सकते हैं और मेरे पास हमेशा उनके राजा को निशाना बनाने का मौका होता है.” भारतीय खिलाड़ी ने कहा, ”मैं वास्तव में किसी भी समय इतना चिंतित नहीं था.”
शुरुआत में दोहराव से बचने के अपने फैसले के पीछे के तर्क के बारे में पूछे जाने पर, गुकेश ने कहा, ”शायद मैं थोड़ा खराब खेला, हालांकि मुझे इसके बारे में भी यकीन नहीं था लेकिन मुझे लगा कि मुझे पलटवार करना चाहिए.” उन्होंने कहा, ”मैंने सोचा कि चूंकि वह दोहराव के लिए जा रहा है इसलिए मैं बस कुछ और चालों के लिए खेलूंगा और देखूंगा, जाहिर है कि वह जीत के लिए नहीं खेल रहा था.” लिरेन ने सफेद मोहरों के साथ एक बार फिर शानदार शुरुआत करते हुए शुरुआती सात मिनट के अंदर 20 चाल चल कर भारतीय खिलाड़ी पर दबाव बना दिया. इस प्रक्रिया में हालांकि दोनों खिलाड़ियों को घोड़े (नाइट) और वजीर (बिशप) जैसे अहम मोहरों को गंवाना पड़ा.
दोनों खिलाड़ियों को इसके बाद रानी (क्वीन) और हाथी (रूक) के साथ प्यादे (पॉन) पर निर्भर रहना पड़ा. लिरेन ने शुरुआती चाल चुनने के पीछे का कारण बताया. उन्होंने कहा, ”पिछले विश्व चैम्पियनशिप मैच (रूस के इयान नेपोमनियाची के खिलाफ) में, मैंने वही शुरुआती की थी और एक अच्छी बाजी जीती थी, मैं उसी शुरुआत को दोहराना चाहता था.” गुकेश ने मुकाबले के शुरुआती भाग में 50 मिनट से थोड़ा ज्यादा समय बिताया, जिससे लिरेन को मैच में पहली बार 45 मिनट की बढ़त मिली. गुकेश की 20वीं चाल ने लिरेन को लंबा समय लेने पर मजबूर किया. लिरेन ने इस दौरान अपना सारा अतिरिक्त समय खर्च किया. दोनों खिलाड़ी इसके बाद चालों को दोहराने लगे और मुकाबला बराबरी पर छूटा. मुकाबला जब ड्रॉ हुआ उस समय कंप्यूटर पर लिरेन बेहतर स्थिति में थे.
इस मुकाबले के दौरान आधिकारिक कमेंट्री कर रहे इंग्लैंड के ग्रैंड मास्टर डेविड हॉवेल ने कहा, ”डिंग ने बड़ा मौका गंवा दिया. ” विश्व चैम्पियनशिप की अन्य मजबूत प्रतियोगिताओं से तुलना करने के लिए पूछे जाने पर गुकेश ने कहा, ”यह शायद शतरंज में सबसे मुश्किल प्रतियोगिता है. जाहिर है कि इसमें बहुत कुछ दांव पर लगा है लेकिन इसके अलावा यह एक बहुत ही दिलचस्प और लंबा मैच है जो एक बहुत मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ है और दिन के अंत में हम अब भी शतरंज खेल रहे हैं.”
उन्होंने कहा, ”यह अब तक अच्छा रहा है. मैं अब भी अपने खेल में सुधार कर सकता हूं. अभी और भी बहुत सी बाजी हैं, यह देखते हुए कि मैं पहली बाजी के बाद पीछे चल रहा था. मैं यहां आकर खुश हूं, अभी बहुत जल्दी है.” जब उनसे पूछा गया कि पिछले विश्व चैम्पियनों में से कौन उनके प्रेरणास्रोत हैं तो लिरेन ने (वेसेलिन) टोपालोव और (मैग्नस) कार्लसन जबकि गुकेश ने विश्वनाथन आनंद, (बॉबी) फिशर और कार्लसन का नाम लिया.



