वाईएसआरसीपी ने पत्रकार को जमानत मिलने के बाद तेदेपा सरकार पर निशाना साधा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 13 Jun 2025 07:30 PM
वाईएसआरसीपी ने पत्रकार को जमानत मिलने के बाद तेदेपा सरकार पर निशाना साधा
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अमरावती. उच्चतम न्यायालय द्वारा पत्रकार कोमिनेनी श्रीनिवास राव को जमानत दिए जाने के बाद युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर निशाना साधा और कहा कि अदालत का यह फैसला राजनीतिक प्रतिशोध को खारिज करता है.

राव को आंध्र प्रदेश पुलिस ने हैदराबाद मेंएक ऐसे कार्यक्रम की मेजबानी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था जिसमें ग्रीनफील्ड  राजधानी अमरावती के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी की गयी थी. रेड्डी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”उच्चतम न्यायालय का ये आदेश याद दिलाता है कि मौलिक अधिकारों को एक सत्तावादी शासन द्वारा कुचला नहीं जा सकता. यह गिरफ्तारी लोकतंत्र का अपमान है.” पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फैसले ने न सिर्फ सत्तारूढ. राजग सरकार की कथित असंवैधानिक कार्रवाई को उजागर किया है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिक स्वतंत्रता के रक्षक के रूप में न्यायपालिका में जनता का विश्वास भी बहाल किया है.

रेड्डी ने राज्य सरकार से कथित राजनीतिक रूप से प्रेरित गिरफ्तारियों और पुलिस बल के दुरुपयोग को रोकने की मांग की. उन्होंने यह भी आग्रह किया कि शासन को संवैधानिक मूल्यों का पालन करना चाहिए न कि पार्टी हितों का. इसी तरह वाईएसआरसीपी नेता और पूर्व मंत्री एस. अप्पलाराजू ने कहा कि फैसले से कानूनी प्रक्रिया का पालन करने में सरकार की विफलता उजागर हुई है और यह साबित हुआ है कि गिरफ्तारी मनमानी और अनुचित थी. पूर्व मंत्री ने राज्य सरकार से कथित राजनीतिक रूप से प्रेरित गिरफ्तारियां बंद करने और संवैधानिक नियमों के तहत प्रशासन संचालित करने का आग्रह किया.

वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता और तेदेपा के पूर्व अध्यक्ष बी. करुणाकर रेड्डी ने आरोप लगाया कि राजग गठबंधन सरकार ने जगन मोहन रेड्डी को कमजोर करने के लिए एक स्थानीय समाचार चैनल को निशाना बनाया और ‘पत्रकारों समेत परिचर्चा की मेजबानों पर राजनीतिक रूप से प्रेरित हमले शुरू किए.’ प्रेस विज्ञप्ति में करुणाकर रेड्डी ने कहा, ”उच्चतम न्यायालय का फैसला प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म करने और आवाजों को दबाने पर तुली सरकार के लिए एक कड़ा तमाचा है.” तेदेपा के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने सही फैसला दिया है. परिचर्चा करने वालों को गिरफ्तार करना अवैध है और यह निर्णय जनता का विश्वास बहाल करता है तथा लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कायम रखता है.

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