डीयू के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा की मौत आंशिक रूप से यूएपीए का नतीजा: असदुद्दीन ओवैसी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 13 Oct 2024 09:11 PM
डीयू के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा की मौत आंशिक रूप से यूएपीए का नतीजा: असदुद्दीन ओवैसी
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हैदराबाद/चेन्नई. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के पूर्व प्रोफेसर जी.एन. साईबाबा की मौत आंशिक रूप से उस गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) का भी परिणाम है, जो अभियुक्तों को लंबी अवधि तक जेल में रखने की अनुमति देता है.

ओवैसी ने साईबाबा के निधन और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शनिवार रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “एक ही दिन में मौत की दो खबर वास्तव में खौफनाक है.” साईबाबा का शनिवार रात यहां एक सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद की स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण निधन हो गया. उन्हें माओवादियों से कथित संबंध मामले में सात महीने पहले बरी कर दिया गया था.

हैदराबाद के सांसद ने कहा, “प्रोफेसर साईबाबा की मौत भी बेहद चिंताजनक है. उनकी मौत आंशिक रूप से यूएपीए का नतीजा है, जो पुलिस को बिना किसी सबूत के आपको लंबे समय तक जेल में रखने की अनुमति देता है.” अधिकारियों ने बताया कि शनिवार रात मुंबई के बांद्रा इलाके में तीन लोगों ने सिद्दीकी को गोली मार दी, जिसके बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई. ओवैसी ने बाबा सिद्दीकी की हत्या को “अत्यधिक निंदनीय” बताते हुए कहा, “यह महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को दर्शाता है. अल्लाह उन्हें मगफिरत अता करें. उनके परिवार, दोस्तों और सहर्किमयों के प्रति मेरी संवेदनाएं.”

साईबाबा का निधन मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ने वालों के लिए बड़ी क्षति है: स्टालिन

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने रविवार को कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के पूर्व प्रोफेसर जी. एन. साईबाबा का निधन उन लोगों के लिए एक बड़ी क्षति है जो मानवाधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. माओवादियों से कथित संबंधों के एक मामले में महज सात महीने पहले बरी किए गए साईबाबा का ऑपरेशन के बाद की समस्याओं के कारण शनिवार को हैदराबाद के एक सरकारी अस्पताल में निधन हो गया था. वह 58 वर्ष के थे.

स्टालिन ने कहा, ”उन्होंने निडरता से अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तब भी जब उनकी अपनी स्वतंत्रता खतरा में थी और स्वास्थ्य खराब था.” उन्होंने एक बयान में कहा, ”कई चुनौतियों के बावजूद नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करने में उनके साहस को ईमानदारी के एक स्थायी उदाहरण के रूप में याद किया जाएगा. इस मुश्किल समय में उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी संवेदनाए.” साईबाबा पित्ताशय के संक्रमण से पीड़ित थे और दो सप्ताह पहले उनका ऑपरेशन हुआ था जिसके बाद जटिलताएं पैदा हो गईं.

डीयू के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा का परिवार उनका पार्थिव शरीर सरकारी मेडिकल कॉलेज को दान करेगा

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जी.एन. साईबाबा के परिवार के सदस्यों ने रविवार को कहा कि साईबाबा की इच्छा के अनुसार उनका पार्थिव शरीर यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया जाएगा. परिजनों ने बताया कि पार्थिव शरीर 14 अक्टूबर को गांधी मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया जाएगा.  परिवार ने बताया कि निम्स के शवगृह में रखे गए साईबाबा के पार्थिव शरीर को 14 अक्टूबर को गन पार्क ले जाया जाएगा और वहां से उनके भाई के आवास पर ले जाया जाएगा तथा सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि देने के लिए रखा जाएगा. इसके बाद एक शोक सभा का आयोजन किया जाएगा.

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