नयी दिल्ली. दिल्ली की वायु गुणवत्ता सोमवार को बहुत अधिक खराब हो गई और द्वारका, मुंडका तथा नजफगढ़ जैसे क्षेत्रों में दोपहर के समय अधिकतम वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 दर्ज किया गया. राष्ट्रीय राजधानी में धुंध की घनी चादर छाने से लोगों ने खुजली और आंखों से पानी आने की शिकायत की. सोमवार को सुबह आठ बजे यहां का एक्यूआई 484 दर्ज किया गया. एक्यूआई इस मौसम में अब तक के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गया है.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दोपहर दो बजे तक एक्यूआई 491 दर्ज किया गया. समीर एप के अनुसार, द्वारका सेक्टर-8, नजफगढ़, नेहरू नगर और मुंडका चार स्टेशन ने वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर अधिकतम 500 बताया है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एक्यूआई 450 के पार पहुंच जाने के बाद दिल्ली व एनसीआर में चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) के चौथे चरण के तहत प्रतिबंधों को लागू करने का आदेश दिया. दिल्ली की वायु गुणवत्ता को देखते हुए चिकित्सकों ने सभी के लिए स्वास्थ्य जोखिम की चेतावनी दी है.
यूसीएमएस और जीटीबी अस्पताल में सामुदायिक चिकित्सा के रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. रजत शर्मा ने कहा, ”प्रदूषण के इस स्तर पर, एन-95 मास्क पहनना एक विकल्प नहीं बल्कि एक आवश्यकता है. इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने जीआरएपी-4 के तहत सख्त प्रदूषण रोधी उपायों के कार्यान्वयन में देरी को लेकर दिल्ली सरकार से सवाल किया और कहा कि वह उसकी पूर्व अनुमति के बिना निवारक उपायों में कमी नहीं आने दे. इसने राज्य सरकार से कहा कि अदालत जानना चाहती है कि उसने प्रदूषण के स्तर में खतरनाक वृद्धि को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं.
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज की पीठ ने कहा, ”अगर एक्यूआई 450 से नीचे चला जाता है, तब भी हम चरण-4 के तहत निवारक उपायों में कमी की अनुमति नहीं देंगे. न्यायालय की अनुमति मिलने तक चरण 4 जारी रहेगा.” दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार प्रदूषण के मुद्दे पर राजनीति कर रही है, लेकिन उसने हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है. ये सभी राज्य भाजपा पार्टी द्वारा शासित हैं.
वायु गुणवत्ता के ”अत्यधिक गंभीर” श्रेणी में पहुंचने के कारण, सोमवार को सुबह से प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े उपाय लागू कर दिए गए, जिनमें ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध तथा सार्वजनिक परियोजनाओं में निर्माण गतिविधियों को स्थगित करना शामिल है.
रविवार को जारी किए गए आदेश के अनुसार, आवश्यक वस्तुओं को लाने जाने वाले या स्वच्छ ईंधन (एलएनजी/सीएनजी/बीएस-6 डीजल/इले्ट्रिरक) का उपयोग करने वाले ट्रकों को छोड़कर किसी भी अन्य ट्रक को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी.
ईवी और सीएनजी तथा बीएस-6 डीजल वाहनों को छोड़कर, दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-आवश्यक हल्के वाणिज्यिक वाहनों पर भी प्रतिबंध रहेगा. आदेश में कहा गया है कि आवश्यक सेवाओं को छोड़कर, दिल्ली में पंजीकृत बीएस-4 या उससे पुराने डीजल मध्यम माल वाहनों और भारी माल वाहनों पर प्रतिबंध रहेगा. राजमार्ग, सड़क, फ्लाईओवर, बिजली लाइनें, पाइपलाइनें और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं सहित सभी निर्माण गतिविधियां निलंबित कर दी गई हैं.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीएक्यूएम) ने एनसीआर में 50 प्रतिशत क्षमता पर ही कार्यालय संचालित करने और शेष लोगों से घर से काम करने की अनुमति देने की सिफारिश की है. दिल्ली सरकार ने सभी स्कूलों में 10वी और 12वीं कक्षा को छोड़कर अन्य सभी कक्षाओं को प्रत्यक्ष रूप से बंद करने के निर्देश दिए हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दिल्ली में न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से 3.9 डिग्री अधिक है. अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है.
दिल्ली-एनसीआर राज्यों में लागू हो ग्रैप-4, एक्यूआई 450 से नीचे जाने पर भी प्रतिबंध रहेंगे: न्यायालय
प्रदूषण में चिंताजनक वृद्धि रोकने के लिए कड़े कदम उठाने में विलंब पर नाराजगी जाहिर करते हुए उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) राज्यों को ग्रैप-4 के तहत प्रतिबंध लागू करने के लिए तुरंत टीम गठित करने का सोमवार को निर्देश दिया और कहा कि एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 450 से नीचे होने पर भी ये प्रतिबंध लागू रहेंगे.
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करना सभी राज्यों का संवैधानिक कर्तव्य है कि हर नागरिक प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहे. पीठ ने कहा, ”हम एक्यूआई का स्तर 450 से नीचे जाने की स्थिति में भी ग्रैप के चौथे चरण के तहत प्रतिबंधों को जारी रखने का निर्देश देते हैं.” उसने सभी दिल्ली-एनसीआर राज्यों से 12वीं तक की कक्षाएं आयोजित करने के संबंध में तुरंत निर्णय लेने को कहा और एक ऐसा तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया, जिसके जरिए चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रैप) के चौथे चरण के तहत प्रतिबंधों के उल्लंघन के संबंध में शिकायतें की जा सकें.
मामले की सुनवाई की शुरुआत में पीठ ने ग्रैप चरणों के तहत प्रदूषण निवारक उपायों को लागू करने में देरी पर दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) से सवाल किया. दिल्ली सरकार के वकील ने पीठ से कहा कि ग्रैप का चौथा चरण सोमवार से लागू कर दिया गया और भारी वाहनों के राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
पीठ ने कहा, ”जैसे ही एक्यूआई खतरनाक स्तर को छूता है, वैसे ही ग्रैप चरणों को लागू किया जाना चाहिए. यह तत्काल होना चाहिए.” पीठ ने वकील से कहा, ”एक्यूआई 300 से 400 के बीच पहुंचते ही चौथा चरण लागू करना होता है. आप ग्रैप के चौथे चरण को लागू करने में देरी करके इन मामलों में जोखिम कैसे उठा सकते हैं.” उसने कहा कि सीएक्यूएम ने प्रदूषण बढ़ते ही ग्रैप के विभिन्न चरणों को लागू करने के बजाय मौसम की स्थिति में सुधार का इंतजार किया.