नयी दिल्ली/भुवनेश्वर/कोलकाता. दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ अपने सत्यापन अभियान के दूसरे दिन 20 से अधिक लोगों की पहचान की. पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ये लोग पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में रह रहे हैं. एक अधिकारी ने बताया कि विभिन्न पुलिस थानों की टीम झुग्गी-झोपड़ियों वाले इलाकों और दिल्ली के कालिंदी कुंज, शाहीन बाग एवं जामिया नगर में संदिग्ध बांग्लादेशी प्रवासियों के मतदाता पहचान-पत्र तथा आधार कार्ड की जांच कर रही है.
दिल्ली के उपराज्यपाल सचिवालय ने मंगलवार को दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय राजधानी में रह रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान करने तथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए दो महीने का विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया.
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”हमारे घर-घर सत्यापन के तहत कई टीम संदिग्ध लोगों के आधार कार्ड नंबर, मतदाता पहचान पत्र नंबर जैसे डेटा एकत्र कर रही हैं. डेटा एकत्र करने के बाद एक रिकार्ड तैयार किया जाएगा जिसे उचित सत्यापन के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को भेजा जाएगा.” अधिकारी ने कहा कि एफआरआरओ को डेटा भेजने के अलावा पुलिस व्यक्तिगत रूप से यह भी पता लगाएगी कि आधार कार्ड नकली है या असली और यह किस वर्ष में पंजीकृत है.
पुलिस ने कहा कि कुछ निवासियों की पहचान संदिग्ध के तौर पर हुई है और उन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद निरुद्ध केंद्र (डिटेंशन सेंटर) में भेजे जाने की संभावना है. एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब ये टीम व्यक्तिगत रूप से जाकर डेटा की जांच करने जाती हैं, तो वे उचित रिकॉर्ड रखने के लिए अपने मोबाइल फोन से पूरी बातचीत को रिकॉर्ड भी कर रही हैं.
अधिकारी ने कहा, ”उनकी पहचान की जांच करने के अलावा हम पुलिस रिकॉर्ड की जांच कर यह भी पता लगाते हैं कि वे कहीं किसी आपराधिक गतिविधियों में तो लिप्त नहीं हैं.” अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में 15 पुलिस जिले हैं और सभी जिला प्रमुखों को दो महीने तक अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं.
उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा कि यह कदम हजरत निजामुद्दीन के उलेमा और मुस्लिम नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा शनिवार को उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना से मुलाकात के बाद उठाया गया है. प्रतिनिधिमंडल ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के साथ हो रहे व्यवहार पर चिंता व्यक्त की और दिल्ली में घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आग्रह किया.
बांग्लादेश के 78 लोगों को वापस भेजा जाएगा: ओडिशा पुलिस
ओडिशा पुलिस ने भारतीय समुद्री सीमा में कथित रूप से प्रवेश करने पर तटरक्षक बल द्वारा पकड़े गये 78 बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजने का फैसला किया है. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. पारादीप के पुलिस उपाधीक्षक संतोष जेना ने बुधवार को बताया कि जब सत्यापन के दौरान यह पता चला कि ये बांग्लादेशी मछुआरे हैं, तब यह निर्णय लिया गया. इन बांग्लादेशी नागरिकों से भारतीय तटरक्षक बल, ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने पूछताछ की. भारतीय तटरक्षक बल इन मछुआरों को पारादीप लाया था और फिर उसने उन्हें स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया.
एक अधिकारी ने बताया कि निर्णय के अनुसार पुलिस बांग्लादेशी नागरिकों को तटरक्षक बल के अधिकारियों के हवाले करेगी और फिर उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) के पास बांग्लादेश तटरक्षक बल को सौंप दिया जाएगा. दो गिरफ्तार बांग्लादेशियों– राजीव चंद्र सिल और आर विश्वास ने कहा कि ओडिशा में पुलिसर्किमयों एवं अन्य सुरक्षार्किमयों ने उनके साथ ‘अच्छा बर्ताव’ किया तथा उन्हें भोजन भी दिया.
बांग्लादेश में कट्टरंपथियों के डराने-धमकाने पर एक नाबालिग लड़की भागकर भारत पहुंची, गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में कथित रूप से सीमापार कर अवैध तरीके से भारतीय क्षेत्र में दाखिल होने पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा पकड़ी गयी बांग्लादेश की एक किशोरी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. किशोरी (17) ने दावा किया कि बांग्लादेश में ‘इस्कॉन’ भक्त होने के कारण कट्टरपंथियों ने उसके परिवार के सदस्यों को डराया-धमकाया जिसके बाद वह वहां से भाग आयी.
चोपरा थाने के पुलिस अधिकारी ने कहा, ” जलपाइगुड़ी जिले में लड़की के कुछ रिश्तेदार हैं. हमने उनसे संपर्क किया है. हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह सीमा पार करके यहां कैसे आई और इस काम में किसने उसकी मदद की.” उन्होंने बताया कि बांग्लादेश के पंचगढ. जिले की यह लड़की पैदल ही सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में आ गई और उत्तर दिनाजपुर जिले के चोपड़ा प्रखंड में फतेहपुर सीमा चौकी के पास बीएसएफ के जवानों ने उसे देख लिया.
किशोरी के एक रिश्तेदार ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ” वे इस्कॉन के भक्त हैं. कट्टरपंथियों ने उसे अगवा कर लेने एवं पूरे परिवार की हत्या कर देने की धमकी दी. वे उसे यहां भेजने की योजना बना रहे थे. वह भारत आने वाली थी, लेकिन हमें तारीख के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिली थी.” रिश्तेदार ने कहा कि उसके (किशोरी के) पिता चिकित्सा प्रतिनिधि (एमआर) हैं और कुछ समय से बीमार हैं.
ढाका में 25 नवंबर को हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद से बांग्लादेश में राजनीतिक-सामाजिक उबाल है. देश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की कई घटनाएं हुईं. (किशोरी के भागकर भारत आ जाने की) इस घटना पर इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस संबंध में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया.
दास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ” बांग्लादेश की एक नाबालिग लड़की के बारे में जानकर बहुत दुख और पीड़ा हुई, जो हताश होकर अकेले ही भारत में घुसने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसे बीएसएफ ने गिरफ्तार कर लिया और किशोर हिरासत गृह में भेज दिया.” उन्होंने कहा कि बुरी तरह बीमार उसके माता-पिता ने बांग्लादेश की स्थिति और उसकी सुरक्षा के डर से उससे सीमापार कर भारत चले जाने की अपील की.
उन्होंने कहा कि उनके पास अपनी बेटी को भारत में अपने रिश्तेदारों के पास छोड़ देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. दास ने कहा, ”एक राष्ट्र के तौर पर हम मदद की ऐसी गुहार को कैसे नज.रअंदाज. कर सकते हैं? सुरक्षा और प्यार की तलाश कर रही एक कमज.ोर बच्ची को हम कैसे ठुकरा सकते हैं? मैं विनम्रतापूर्वक और तत्काल गृहमंत्री से अनुरोध करता हूं कि वह करुणा और मानवता के भाव के साथ हस्तक्षेप करें और इस निर्दोष लड़की को उसके रिश्तेदारों के साथ रहने की अनुमति दें.”