हथकड़ी पहनकर विपक्षी नेताओं ने किया प्रदर्शन, भारतीय प्रवासियों से अनुचित व्यवहार का किया दावा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 06 Feb 2025 08:55 PM
हथकड़ी पहनकर विपक्षी नेताओं ने किया प्रदर्शन, भारतीय प्रवासियों से अनुचित व्यवहार का किया दावा
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नयी दिल्ली/होशियारपुर/कुरुक्षेत्र/अहमदाबाद. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने अमेरिका से 100 से अधिक अवैध प्रवासी भारतीयों को वापस भेजे जाने और उनके साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किए जाने के खिलाफ बृहस्पतिवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया.

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव और विरोध प्रदर्शन में शामिल कई अन्य विपक्षी सांसदों ने अपने हाथों में हथकड़ी पहन रखी थी. उन्होंने ‘देश का अपमान नहीं सहेंगे’ और ‘मोदी सरकार हाय हाय’ के नारे लगाए. विपक्षी सांसदों ने अपने हाथों में तख्तियां भी ले रखी थीं. इनमें से कुछ तख्तियों पर ‘हर हिंदुस्तानी का स्वाभिमान यही, न्याय दो जंजीर नहीं’ लिखा हुआ था.

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी नेता प्रदर्शन में शामिल हुए. राहुल गांधी ने अमेरिका से वापस भेजे एक प्रवासी हरविंदर के बयान का एक वीडियो ‘एक्स’ पर साझा किया जिसमें वह यह कहते सुने जा सकते हैं कि 40 घंटों तक उनके हाथों में हथकड़ी लगाई गई थी और पैरों को भी जंजीर से बांधा गया था.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ”प्रधानमंत्री जी इस व्यक्ति के दर्द को सुनिए. भारतीय गरिमा और मानवता के हकदार हैं, हथकड़ी के नहीं.” खरगे ने विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन का एक वीडियो ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा, ”हम, ‘इंडिया’ गठबंधन के दल भारतीय नागरिकों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे. मोदी सरकार को इस निर्वासन पर एक विस्तृत बयान देना चाहिए और यह भी बताना चाहिए कि हमने अपनी धरती पर एक सैन्य विमान उतारने के बजाय भारतीयों को गरिमा और सम्मान के साथ वापस लाने के लिए अपने विमान क्यों नहीं भेजे?” कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि अमेरिका से वापस भेजे गए भारतीय प्रवासियों के साथ हुए व्यवहार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जवाब देना चाहिए.

उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ”बहुत बात की गई थी कि मोदी जी और डोनाल्ड ट्रंप जी बहुत अच्छे मित्र हैं, फिर मोदी जी ने ऐसा क्यों होने दिया? क्या इंसानों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है कि उन्हें हथकड़ियां और बेड़ियां पहनाकर भेजा जाए? यह कोई तरीका है….” वाम दल के सांसदों ने भी भारतीय प्रवासियों के साथ हुए व्यवहार के खिलाफ प्रदर्शन किया.

उनका कहना था कि भारतीय प्रवासियों के साथ ”अमानवीय” व्यवहार किया गया. उल्लेखनीय है कि अमेरिका से 104 ”अवैध” भारतीय प्रवासियों को लेकर एक अमेरिकी सैन्य विमान बुधवार को अमृतसर में उतरा. अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के तहत डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा वापस भेजा गया यह भारतीयों का पहला जत्था है. तस्वीरों में भारत वापस भेजे गए लोगों के हाथों में हथकड़ी देखी गई.

अमेरिका से निर्वासित भारतीयों को हथकड़ी लगाना देश के लिए बड़े शर्म की बात: मान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिकी सैन्य विमान में भारत वापस भेजे गए निर्वासितों को हथकड़ी लगाना ”देश के लिए बहुत शर्म की बात है.” मान ने हरियाणा सरकार की भी आलोचना की, क्योंकि वह राज्य के निर्वासितों को अमृतसर हवाई अड्डे से ”पुलिस कैदी वैन” में उनके संबंधित गृहनगर ले जा रही थी.

विभिन्न राज्यों से 104 अवैध प्रवासियों को लेकर एक अमेरिकी सैन्य विमान बुधवार को अमृतसर में उतरा, जो अवैध प्रवासियों के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा की गयी कार्रवाई के तहत निर्वासित भारतीयों का पहला जत्था था.
मान ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”अमेरिका ने जो किया, उसके लिए हमें बेहद अफसोस है… हमारे देश के नागरिकों को हथकड़ी लगाकर और जंजीरों से जकड़कर वापस भेजना देश के लिए बहुत शर्म की बात है.”

उम्मीद और जीवन भर की बचत छिन जाने से अमेरिका से निर्वासित लोग हताश

बेहतर जिंदगी का सपना लेकर अपने घर बार छोड़ अमेरिका जाने वाले भारतीय प्रवासी अपने सपनों के टूटने, भारी कर्ज और ट्रैवल एजेंटों द्वारा ठगे जाने की कहानियों के साथ हथकड़ी में बंधे बुधवार को वहां से वापस लौटे . अमेरिकी सैन्य विमान से बुधवार को भारत लौटने के बाद ये निर्वासित अपना भविष्य अंधेरे में देख रहे हैं. अमेरिका से अवैध प्रवासी के तौर पर जिन 104 लोगों को निर्वासित कर भारत भेजा गया है उनमें पंजाब के 30 लोग शामिल हैं.

होशियारपुर के दरापुर गांव के सुखपाल सिंह ने एक साल तक इटली में शेफ के रूप में काम करने के बाद अमेरिका जाने का फैसला किया था. सुखपाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बृहस्पतिवार को बताया कि इटली में उन्हें और उनके दो दोस्तों को एक ट्रैवल एजेंट ने अमेरिका पहुंचाने का वादा किया और इसके लिए 30 लाख रुपये मांगे. सुखपाल ने अपनी जमा पूंजी और दोस्तों से उधार लेकर एजेंट को पैसे दिये.

उसने बताया, ”अमेरिका ले जाने के बजाय हमारे समूह को निकारागुआ ले जाया गया. वहां पहुंचते ही एजेंट के लोगों ने सभी के पासपोर्ट जब्त कर लिए और फिर हमारी खतरनाक यात्रा होंडुरास, ग्वाटेमाला और मैक्सिको होते हुए शुरू हुई.” उन्होंने बताया, “इस सफर में हमें 12 घंटे तक एक छोटी नौका में समुद्र पार कर मैक्सिको से अमेरिका की सीमा तक पहुंचाया गया. इस खतरनाक यात्रा के दौरान मेरे एक साथी की डूबने से मौत हो गयी.” सुखपाल ने कहा कि उन्होंने अपने परिवार को इस यात्रा के बारे में कुछ नहीं बताया था, और अमेरिका पहुंचकर उन्हें सरप्राइज देना चाहते थे.

उन्होंने कहा, “जैसे ही हम अमेरिका की सीमा पर पहुंचे, हमें अमेरिकी अधिकारियों ने पकड़ लिया और 12 दिनों तक एक हिरासत केंद्र में रखा.” उन्होंने कहा, “हिरासत केंद्र में हमें बुरा व्यवहार सहना पड़ा. हमें न तो कानूनी सहायता दी गई और न ही इमिग्रेशन अधिकारियों से मिलने का मौका मिला.” उन्होंने बताया, “खाने के नाम पर सिर्फ स्नैक्स और बीफ दिया जाता था. चूंकि मैं बीफ नहीं खाता, इसलिए सिर्फ स्नैक्स खाकर जिंदा रहा.” इसके बाद कैदियों को हथकड़ी और बेड़ियों में बांधकर विमान में बिठाया गया और अमृतसर लाया गया.

उन्होंने बताया, “फ्लाइट में हमें अपनी सीट से हिलने तक की इजाजत नहीं थी. वॉशरूम जाने पर भी सख्त पाबंदी थी. इसलिए मैंने मुश्किल से कुछ खाया या पिया.” उन्होंने बताया,”अमृतसर में फ्लाइट उतरने के बाद हमारी बेड़ियां खोली गईं और तब जाकर मुझे खाना मिला.” गुरदासपुर के जसपाल सिंह को भी ट्रैवल एजेंट ने धोखा दिया.

उन्होंने कहा, “मैंने अमेरिका जाकर अपने परिवार को अच्छी जिंदगी देने के लिए एजेंट को 40 लाख रुपये दिए थे, लेकिन मेरा सपना सीमा पर गिरफ्तारी के साथ ही खत्म हो गया.” जसपाल ने कहा, “मैंने एजेंट से वीजा सही प्रक्रिया से भेजने के लिये कहा था, लेकिन उसने मुझे धोखा दिया.” उन्होंने कहा, “मैं पिछले साल जुलाई में हवाई मार्ग से ब्राजील पहुंचा था और एजेंट ने भरोसा दिलाया था कि आगे की यात्रा भी फ्लाइट से होगी, लेकिन बाद में उसने मुझे गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करने को मजबूर किया.” अमृतसर के लालरू गांव के 22 वर्षीय प्रदीप सिंह को छह महीने तक कई देशों की यात्रा करने के बाद अमेरिका पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया गया.
प्रदीप के माता-पिता ने उसे अमेरिका भेजने के लिए 41 लाख रुपये का कर्ज लिया था, लेकिन अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वह इसे कैसे चुकाएंगे.

सपनों का अंत: निर्वासित भारतीयों के परिजनों ने ‘डंकी’ मार्गों की भयावह दास्तां सुनाई

उज्ज्वल भविष्य और बेहतर जीवन का सपना संजोए हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के युवा अमेरिका से निकाले जाने के बाद चेहरे पर मायूसी और टूटे सपनों के साथ अपने-अपने घर लौट आए हैं. ये वही युवा हैं जिनके पिताओं ने अपने बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए अपनी जमीनें बेच दी थीं तो मांओं ने अपने गहनों की बलि दी थी.

अमेरिका में दाखिल होना इतना आसान न था. उन्होंने उफनती नदियों और भयानक जंगलों को पार किया और इस दौरान उनसे कहीं कनपटी पर बंदूक रखकर जबरन वसूली की गई तो कहीं लात घूंसे भी खाने पड़े. लेकिन अमेरिका में बसने का उनका सपना उस समय दु?स्वप्न में बदल गया, जब अमेरिकी अधिकारियों ने उनके हाथों में हथकड़ी लगा देश से निकाल दिया.

रॉबिन हांडा (27) के पिता मंजीत सिंह अपने बेटे की इस दर्द भरी दास्तां को बयां करते हुए कहते हैं कि उनका बेटा गुयाना, ब्राजील, पेरू, कोलंबिया, इक्वाडोर और ग्वाटेमाला से गुजरता हुआ, समुद्र पार करता हुआ और जंगलों से होते हुए कई दिनों तक भूखा रहकर मैक्सिको-अमेरिका सीमा तक पहुंचा था.

रॉबिन ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी. वह पिछले वर्ष 18 जुलाई को कुरुक्षेत्र जिले के अपने पैतृक गांव इस्माइलाबाद से निकला था और जब वह अमेरिकी सीमा पर पहुंचा तब तक वह विभिन्न लोगों को 45 लाख रुपये का भुगतान कर चुका था. रॉबिन के पिता ने दावा किया कि उनके बेटे का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया था.

सिंह ने कहा, ह्लउसे (रॉबिन) मैक्सिको में ‘आव्रजन माफिया’ को सौंप दिया गया और उन्होंने पैसे के लिए उसे प्रताड़ित किया. यहां उसने उन्हें 20 लाख रुपये दिए.ह्व दो बच्चों के परेशान पिता ने बताया कि उनका बड़ा बेटा पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया गया था और छोटा बेटा अमेरिका जाने पर अड़ा था.

बेटों के विदेश में जाकर कमाने से आर्थिक स्थिति बेहतर होने का सपना टूट चुका है. सिंह अब ट्रैवल एजेंट पर उनके बेटे को अमेरिका में बसाने का झूठा वादा करके उन्हें धोखा देने का आरोप लगाते हैं. रॉबिन उन 104 भारतीयों के पहले समूह में शामिल था, जिन्हें अमेरिका ने निर्वासित किया है.

अमेरिकी सेना का एक सी-17 ग्लोबमास्टर विमान इन अवैध प्रवासियों को लेकर बुधवार को अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा था.
इन अवैध प्रवासियों में से हरियाणा व गुजरात से 33-33, पंजाब से 30, महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश से तीन-तीन और चंडीगढ़ से दो लोग थे. कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक वरुण सिंगला ने बताया कि निर्वासित लोगों में से 33 हरियाणा से हैं, जिनमें से 14 लोग कुरुक्षेत्र जिले के हैं. जिले के चम्मूकलां गांव के रहने वाले खुशप्रीत सिंह (18) ने अमेरिका पहुंचने के लिए 40 लाख रुपये खर्च किए. उनके पिता जसवंत सिंह ने अपनी खेती की जमीन गिरवी रखकर पैसे का इंतजाम किया था.

उन्होंने बताया, ह्लकरीब 15 दिन पहले हमें खुशप्रीत का फोन आया कि वह अमेरिका की सीमा पर पहुंच गया है और जल्द ही उसे पार कर जाएगा. इसके बाद हमारा उससे संपर्क टूट गया.ह्व परिवार को उसके निर्वासन के बारे में तब पता चला जब वह अमेरिकी सैन्य विमान से अमृतसर पहुंचा. हालांकि खुशप्रीत के सुरक्षित घर पहुंचने से परिवार को राहत मिली लेकिन परिवार कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है और उसका भविष्य अंधकारमय है.

बुधवार रात को अपने गांव लौटे अंबाला के 28 वर्षीय निर्वासित व्यक्ति ने अमेरिका की यात्रा के दौरान हुई अपनी परेशानियों को साझा किया. नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने उनकी अमेरिका की यात्रा के लिए 40 लाख रुपये खर्च किए थे.
उन्होंने बताया कि पैसे का इंतजाम खेती की जमीन का एक हिस्सा बेचकर किया गया था. लेकिन यह सफर आसान नहीं था. एजेंट ने उन्हें ‘डंकी रूट’ से होते हुए कई नदियों और जंगलों को पार करके अमेरिकी सीमा तक पहुंचाया. हालांकि, 15 दिन पहले वह अमेरिकी सीमा पर पकड़ा गया. उन्होंने युवाओं को सख्त सलाह दी कि वे विदेश जाने के लिए कोई भी अवैध तरीका न अपनाएं.

अमेरिका से निर्वासित की गई गुजरात की युवती के पिता ने कहा, ‘वह सुरक्षित है, इससे बेहद खुश हूं’

गुजरात के वडोदरा जिले के रहने वाले जयंतीभाई पटेल अमेरिका से निर्वासित की गई अपनी बेटी को सुरक्षित घर पहुंचते देख अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए और कहा कि वह बेहद खुश हैं. वडोदरा जिले की पादरा तालुका के लूना गांव की रहने वाली खुशबू पटेल (29) उन 104 भारतीयों में शामिल थीं, जिन्हें अवैध रूप से रहने के चलते अमेरिका से निर्वासित किया गया है.

खुशबू के भाई ने बताया कि बुधवार को अमृतसर में उतरे अमेरिकी सैन्य विमान में यात्रा के दौरान उन्हें भी हथकड़ी लगाई गई थी.
उन्होंने बताया कि खुशबू के अलावा अन्य 32 निर्वासितों को अमृतसर से गुजरात ले जाने वाला विमान बृहस्पतिवार सुबह अहमदाबाद हवाई अड्डे पर पहुंचा. निर्वासित भारतीयों के अहमदाबाद में उतरने के बाद उन्हें पुलिस वाहनों में गुजरात में उनके मूल स्थानों पर ले जाया गया.

एक अधिकारी ने बताया कि खुशबू को पहले प्राथमिक पूछताछ के लिए पादरा थाने ले जाया गया और फिर पुलिस उसे लूना स्थित उसके घर ले गई. खुशबू ने अन्य निर्वासितों की तरह मीडिया से बात नहीं की. उसके भाई वरुण ने संवाददाताओं से कहा, ”खुशबू को (अमेरिका से) अमृतसर तक पहुंचने के दौरान हथकड़ी लगाई गई थी. वह पर्यटक वीजा पर अमेरिका गई थी.” उन्होंने कहा, ”कुछ दस्तावेज न होने के कारण उसे (खुशबू) निर्वासित कर दिया गया. हमें नहीं पता कि वह अमेरिका पहुंचने के लिए कौन-सा रास्ता अपनाकर गई थी. 36 घंटे की यात्रा के कारण वह अभी बोलने की स्थिति में नहीं है.” अपनी बेटी को घर वापस देखकर पिता जयंतीभाई पटेल रो पड़े लेकिन उन्हें भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह अमेरिका कैसे पहुंची.

जयंतीभाई पटेल ने कहा, ”मैं बहुत तनाव में था. अब मैं बेहद खुश हूं कि वह सुरक्षित वापस आ गई है. हमारी सरकार ने हर तरह से हमारी मदद की है. मुझे नहीं पता कि वह अमेरिका कैसे पहुंची और वहां उसके साथ वास्तव में क्या हुआ.” अन्य सभी निर्वासितों और उनके परिवार के सदस्यों ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया.

सूत्रों ने बताया कि गुजरात से आए 33 निर्वासितों में से अधिकतर मेहसाणा, गांधीनगर, पाटन, वडोदरा और खेड़ा जिलों के हैं.
निर्वासितों में पाटन जिले के मनुंद गांव का चार लोगों का परिवार भी शामिल था. पाटन जिला पुलिस उन्हें उनके गांव ले गई लेकिन गांव में उनका घर बंद रहा. उनके पड़ोस में रहने वाले दीक्षित पटेल ने कहा, ”स्थानीय पुलिस उन्हें सुबह यहां लेकर आई थी, लेकिन वे अपने घर जाने के बजाय कहीं और चले गए. शायद वे घबराए हुए हैं और इस समय मीडिया का सामना नहीं करना चाहते.”

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