लखनऊ. केंद्र सरकार ने सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ को सूचित किया कि उसने ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है कि क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पास ब्रिटेन की नागरिकता है. इसके बाद खंडपीठ ने केंद्र सरकार को राहुल के खिलाफ दायर उस याचिका पर पांच मई तक स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें कांग्रेस नेता के पास ब्रिटिश नागरिकता होने का दावा करते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में उनका निर्वाचन रद्द करने का अनुरोध किया गया है.
न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति राजीव सिंह की खंडपीठ ने कर्नाटक के एक वकील और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया. उच्च न्यायालय ने 25 नवंबर 2024 को मामले की पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से याचिकाकर्ता की अर्जी पर उसके फैसले के बारे में जानकारी मांगी थी.
उप सॉलिसिटर जनरल एसबी पांडे ने सोमवार को खंडपीठ को सूचित किया कि याचिकाकर्ता की अर्जी पर कार्रवाई करते हुए संबंधित मंत्रालय ने ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखकर राहुल की कथित ब्रिटिश नागरिकता के बारे में विवरण मांगा है और इसलिए सरकार को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर अंतिम निर्णय लेने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए. इसके बाद उच्च न्यायालय ने सरकार को याचिका पर अगले दिन में स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. केंद्र सरकार ने पहले भी इस संबंध में अंतिम निर्णय लेने के लिए और समय मांगा था.
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उसके पास ब्रिटिश सरकार के कुछ ई-मेल और कई ऐसे दस्तावेज हैं, जिनसे यह साबित होता है कि राहुल गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं और इस कारण वह चुनाव लड़ने और लोकसभा सदस्य का पद धारण करने के लिए अयोग्य हैं. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उसने राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता के सिलसिले में सक्षम प्राधिकारी को दो बार शिकायत भेजी, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.