धर्म, न्याय और राष्ट्र धर्म का सजीव रूप हैं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर : आदित्यनाथ

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 14 May 2025 09:37 PM
धर्म, न्याय और राष्ट्र धर्म का सजीव रूप हैं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर : आदित्यनाथ
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लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18वीं शताब्दी में इंदौर की रानी रहीं अहिल्याबाई होल्कर को धर्म, न्याय और राष्ट्र धर्म का सजीव स्वरूप बताते हुए बुधवार को कहा कि वह भारतीय सनातन संस्कृति की पुनस्र्थापना की अग्रदूत थीं. मुख्यमंत्री ने कहा कि होल्कर ने विदेशी आक्रांताओं के कालखंड में जिस साहस, भक्ति और समर्पण से काशी से लेकर रामेश्वरम तक तीर्थस्थलों का पुनरुद्धार करवाया, वह भारतीय इतिहास का अद्वितीय अध्याय है. अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर के छौंड़ी गांव में हुआ था और उनका निधन 13 अगस्त 1795 में हुआ था.

एक बयान के मुताबिक, आदित्यनाथ ने अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म शताब्दी के अवसर पर राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में कहा कि अहिल्याबाई ने ह्लधर्म रक्षति रक्षित?ह्व के वैदिक उद्घोष को न केवल जिया, बल्कि उसे मूर्त रूप भी दिया.

उन्होंने कहा कि जब देश विदेशी आक्रांताओं से त्रस्त था, मंदिर विध्वंस किए जा रहे थे, तब अहिल्याबाई ने बिना भय के, बिना किसी राजनीतिक समर्थन के, उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक सनातन धर्म की पुनस्र्थापना का विराट कार्य अपने हाथों में लिया था.
आदित्यनाथ ने कहा,” लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने स्वयं घोषणा की थी – “मेरा पथ धर्म का पथ है, धर्म का पथ ही न्याय का पथ है और न्याय का पथ ही हमें सर्वशक्तिमान और समर्थ बनाने में सहायक हो सकता है.” मुख्यमंत्री ने कहा, ह्लहमें आज जो भव्य काशी विश्वनाथ मंदिर दिखता है, वह उसी मंदिर का स्वरूप है जिसे अहिल्याबाई होल्कर ने 1777 से 1780 के बीच अपने निजी संसाधनों से बनवाया था.ह्व

मुख्यमंत्री ने कहा, ” लोकमाता अहिल्याबाई केवल काशी तक सीमित नहीं रहीं. उन्होंने केदारनाथ धाम, रामेश्वरम, सोमनाथ, हरिद्वार, महिष्मति और देश के अनेक तीर्थस्थलों के जीर्णोद्धार का कार्य किया. उन्होंने नदियों के घाटों, कुओं और बावड़ियों का निर्माण करवाया ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा मिले और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता बनी रहे.ह्व आदित्यनाथ ने अहिल्याबाई को भारतीय नारी शक्ति की प्रतीक बताते हुए कहा कि उन्होंने न केवल राजनीतिक प्रशासन को धर्म-संगत और प्रजा-हितकारी बनाया, बल्कि सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किए. उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई ने विधवा पुर्निववाह को प्रोत्साहित और बाल विवाह पर रोक लगा कर नारी सशक्तिकरण की दिशा में अनुकरणीय कार्य किया.

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