कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर शर्मिष्ठा पनोली को अंतरिम जमानत दी

Author: navabharat digital
UPDATED: Thu, 05 Jun 2025 07:18 PM
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर शर्मिष्ठा पनोली को अंतरिम जमानत दी
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कोलकाता. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सांप्रदायिक टिप्पणियों वाला वीडियो अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर शर्मिष्ठा पनोली को बृहस्पतिवार को अंतरिम जमानत दे दी. अदालत ने कहा कि उसके खिलाफ शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा नहीं हुआ है. कानून की छात्रा पनोली (22) को पिछले सप्ताह हरियाणा के गुरुग्राम से कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ कोलकाता के गार्डन रीच थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी की पीठ ने आदेश दिया कि उसे 10,000 रुपये की जमानत राशि और मुचलके पर रिहा किया जाए तथा मामले की जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया. अदालत ने उन्हें बिना अनुमति के देश नहीं छोड़ने का भी निर्देश दिया. उच्च न्यायालय ने पुलिस को पनोली को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया, क्योंकि उसने शिकायत की थी कि उसके सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उसे धमकियां मिल रही हैं.

यह प्राथमिकी एक वायरल वीडियो के मद्देनजर दर्ज की गई थी, जिसमें उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बॉलीवुड अभिनेताओं की आलोचना करते हुए विवादास्पद टिप्पणी की थी. पुलिस के अनुसार वीडियो अब हटा दिया गया है और शिकायतकर्ता ने कहा था कि पनोली का वीडियो “भारत के नागरिकों के एक वर्ग की धार्मिक आस्था का अपमान करता है और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य और घृणा को बढ़ावा देता है”.

पनोली 30 मई को गुरुग्राम के एक होटल से गिरफ्तारी के बाद ‘ट्रांजिट रिमांड’ पर कोलकाता लाए जाने के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं. पनोली ने अंतरिम जमानत और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया था. सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि क्योंकि पनोली को उनके कथित विवादास्पद बयान के लिए गिरफ्तार किया गया था, इसलिए उन्हें कथित तौर पर धमकी देने वालों को भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए था.

उनके वकील डी पी सिंह ने अदालत को बताया कि वह 15 मई से 19 मई के बीच कोलकाता के एक पुलिस थाने में उन्हें दी गई धमकियों और उनके आवास के सामने प्रदर्शन कर रही भीड़ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने गई थीं. सिंह ने बताया कि ऑनलाइन धमकियों के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए वह कोलकाता पुलिस के साइबर अपराध अनुभाग में भी गयी थीं. अभियोजन पक्ष ने तीन जून के निर्देशानुसार मामले की जांच की ‘केस डायरी’ अदालत के समक्ष पेश की. पंद्रह मई की प्राथमिकी के आधार पर 22 मई को मजिस्ट्रेट अदालत ने गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था.

राज्य की ओर से पेश महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत के समक्ष बताया कि आरोपी फरार थी और उसे पश्चिम बंगाल के बाहर से पकड़ा गया था. पनोली के वकील ने कहा कि वह कोलकाता से भागी नहीं थीं, बल्कि सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्हें दी जा रही कथित धमकियों के कारण गंभीर आशंकाओं के चलते उन्होंने यह कदम उठाया. सिंह ने कहा कि प्राथमिकी में किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा नहीं किया गया है, तथा पनोली को उनकी गिरफ्तारी के आधार के बारे में जानकारी नहीं दी गई, जो कि कानून के तहत अनिवार्य है.

अदालत ने कहा कि शिकायत में इस बारे में कुछ नहीं कहा गया कि कथित सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा या दिखाया गया था.
सिंह ने बताया कि पनोली ने सात मई को पोस्ट अपलोड करने के बाद आठ मई को उसे हटा दिया था. अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “आज न्याय हुआ है.” अधिकारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”यह पुलिस अत्याचार का मामला है क्योंकि एक निर्दोष युवती को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग करने के लिए कोलकाता पुलिस द्वारा अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया है और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. यह पुलिस के अति उत्साह और अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने की व्यग्रता का एक और उदाहरण है.”

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