नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने पाकिस्तान के लिए कथित तौर पर जासूसी करने को लेकर गिरफ्तार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल(सीआरएपीएफ) के बर्खास्त जवान की एनआईए हिरासत बृहस्पतिवार को और 10 दिन के लिए बढ़ा दी. मामले में आरोपी मोती राम जाट को 15 दिन की हिरासत समाप्त होने के बाद विशेष न्यायाधीश चंद्रजीत सिंह के समक्ष पेश किया गया. न्यायाधीश ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के अनुरोध पर उसे और 10 दिन के लिए जांच एजेंसी की हिरासत में भेजने का आदेश दिया.
न्यायाधीश ने यह आदेश एनआईए द्वारा दायर अर्जी पर पारित किया. एजेंसी ने अर्जी में दावा किया था कि जांच के दौरान बरामद इलेक्ट्रॉनिक आंकड़ों के आधार पर आरोपी से हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता है. एनआईए ने न्यायाधीश को बताया कि आरोपी वर्ष 2023 से राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों (पीआईओ) के साथ साझा कर रहा था.
एजेंसी ने दावा किया कि सीआरपीएफ में सहायक उप निरीक्षक जाट विभिन्न माध्यमों से पीआईओ से धन प्राप्त कर रहा था. एनआईए ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया था. सीआरपीएफ ने मामला सामने आने के बाद कहा है कि जाट को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है.
सीआरपीएफ द्वारा जारी बयान में कहा गया कि केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय में बल ने सोशल मीडिया पर उसकी गतिविधियों की करीबी निगरानी की और इस दौरान पाया गया कि उसने ”स्थापित मानदंडों और प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है.” बल ने कहा कि उसे पूछताछ के लिए एनआईए की हिरासत में दिया गया है. सीआरपीएफ ने बयान में कहा, ”सीआरपीएफ नियमों के साथ भारत के संविधान के संबद्ध प्रावधानों के तहत, उसे 21 मई 2025 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है.”
जम्मू-कश्मीर : आतंकवादी साजिश की जांच के लिए एनआईए ने 32 ठिकानों पर छापे मारे
पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों की ओर से रची गई साजिश की जांच के सिलसिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर में 32 ठिकानों पर बृहस्पतिवार को छापे मारे. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि जिन ठिकानों पर छापेमारी की गई, उनमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट जम्मू और कश्मीर (यूएलएफजेएंडके), मुजाहिदीन गजवत-उल-हिंद (एमजीएच), जम्मू-कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स (जेकेएफएफ), कश्मीर टाइगर्स, पीपुल्स एंटी-फासीस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोगों तथा उनके सहयोगियों के आवासीय परिसर शामिल हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, ये सभी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और अल-बद्र जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़े हुए हैं. उन्होंने बताया कि पुलवामा, कुलगाम, शोपियां, बारामूला और कुपवाड़ा जिलों में छापे मारे गए. एनआईए की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह छापेमारी जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान सर्मिथत प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और उनके सहयोगियों की ओर से रची गई साजिश के खिलाफ जारी जांच का हिस्सा थी.
बयान में कहा गया है, ह्लआज की कार्रवाई के तहत केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में 32 ठिकानों पर तलाशी ली गई.ह्व इसमें कहा गया है कि जिन लोगों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई, वे आतंकवादी गतिविधियों में सहयोग देने, आतंकवादियों की मदद करने, धन जुटाने और चुंबकीय बम, आईईडी (परिष्कृत विस्फोटक उपकरण), मादक पदार्थों और हथियारों एवं गोला-बारूद के भंडारण तथा वितरण में संलिप्तता को लेकर एनआईए की जांच के दायरे में हैं.
एनआईए की जांच के मुताबिक, ये संगठन पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के समर्थन से जम्मू-कश्मीर में शांति एवं सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए स्थानीय युवाओं को बरगलाकर और आतंकवादी सहयोगियों को एकजुट करके आतंकवाद तथा हिंसा की वारदातों को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं. एनआईए ने कहा कि जांच से पता चला है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया मंच और ऑनलाइन ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं.
जांच एजेंसी ने कहा, ह्लवे (पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन) कश्मीर घाटी में अपने कारिंदों तक हथियार/गोला-बारूद, विस्फोटक, नशीले पदार्थ आदि पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं.ह्व उसने बताया कि तलाशी के दौरान दो कारतूस, एक खोखा और एक खंजर जब्त किया गया. एनआईए के अनुसार, छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण भी मिले हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर आपत्तिजनक डेटा और दस्तावेज हैं. एजेंसी ने कहा कि आतंकवादी साजिश का भंडोफोड़ करने के लिए वह इन दस्तावेजों और डेटा की गहन जांच करेगी.