पुरी के राजा ने श्री जगन्नाथ मंदिर में सुधारों का किया समर्थन

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 10 Jul 2025 09:31 PM
पुरी के राजा ने श्री जगन्नाथ मंदिर में सुधारों का किया समर्थन
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भुवनेश्वर. पुरी के राजा गजपति महाराजा दिव्यसिंह देब ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह 800 साल पुराने श्री जगन्नाथ मंदिर में सुधारों का समर्थन करते हैं ताकि बदलते समय के साथ इसकी विरासत को संरक्षित किया जा सके, लेकिन 12वीं सदी के इस मंदिर में गैर-हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति देने के बारे में उनका रुख तय नहीं है.

पांच दशक से अधिक समय तक भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक के रूप में सेवा करने वाले देब ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ”सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि मंदिर का निर्माण 800 साल से भी पहले हुआ था. अनुष्ठान, त्योहार और विभिन्न व्यवस्थाएं सदियों में विकसित हुई हैं.” देब ने कहा कि पिछले 800 वर्षों में दुनिया और समाज में बहुत कुछ बदल गया है. उन्होंने कहा, ”लेकिन श्री जगन्नाथ मंदिर की व्यवस्था में काफी हद तक कोई बदलाव नहीं आया है. विरासत जारी रहनी चाहिए, लेकिन बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए इसमें कुछ बदलाव किए जा सकते हैं.” गजपति ने पुरी आने वाले तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा, ”उदाहरण के लिए, महाप्रसाद सेवा सुविधा अपर्याप्त साबित हो रही है.

इतने सारे भक्तों के लिए एक सहज ‘दर्शन’ अनुभव सुनिश्चित करना निश्चित रूप से एक चुनौती है. सामान्य दिनों में भी, अब भीड़ पहले के त्योहारों जैसी ही रहती है.” उन्होंने राज्य सरकार और मंदिर प्रशासन से इन मुद्दों का समाधान करने का आग्रह किया.
सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाले संगठन ‘सामाजिक न्याय अभियान’ द्वारा रथ यात्रा के दौरान गजपति की पालकी को अपने कंधों पर उठाने की परंपरा के बारे में उठाए गए मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए देब ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है.

उन्होंने कहा, ”धार्मिक परंपरा में कोई भी बदलाव निर्दष्टि प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए. यह निजी पसंद का मामला नहीं है, बल्कि धार्मिक बाध्यता है.” पुरी मंदिर के सिंहद्वार पर लगे ‘केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति है’ वाले चिह्न पर गजपति ने कहा कि यह प्रथा 500 वर्ष से अधिक पुरानी है. उन्होंने कहा, ”यदि कोई परिवर्तन होना है, तो उसे उचित प्रक्रियाओं से गुजरना होगा. यह एक धार्मिक परंपरा है. कोई भी संशोधन केवल धार्मिक प्राधिकारियों – जैसे शंकराचार्य, मुक्ति मंडप सभा के विद्वान और अन्य हितधारकों – के परामर्श और अंतिम निर्णय के माध्यम से ही किया जा सकता है.” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस मुद्दे का एक धर्मनिरपेक्ष पहलू भी है, जिस पर सरकार को विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा, ”श्री जगन्नाथ मंदिर पर दशकों से आतंकवादी खतरा रहा है.

वैश्विक स्थिति और विशिष्ट भू-राजनीतिक तनावों, विशेष रूप से पाकिस्तान के साथ ऐसी स्थिति को देखते हुए सरकार को गंभीरता से मूल्यांकन करना चाहिए कि यदि गैर-हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति दी जाए तो क्या वह मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है.” देब ने कहा कि अंतत? निर्णय लेना सरकार पर निर्भर है. उन्होंने कहा, ”सभी धर्मों के लोगों को इसमें भाग लेने का मौका देने के लिए हर साल रथ यात्रा आयोजित की जाती है.” विदेश में शिक्षा प्राप्त विधि स्नातक देब ने कहा कि उन्हें राजनीति में कोई रुचि नहीं है. उन्होंने कहा, ”मैंने पहले से ही राजनीति में आने से इनकार कर दिया था, जबकि मेरे पिता और चाचा ओडिशा की राजनीति में सक्रिय थे. दशकों से राजनीतिक दलों ने मुझसे संपर्क करना बंद कर दिया है और मेरा मानना ??है कि मेरा फैसला सही था.” पुरी रथ यात्रा के दौरान हाल में हुई भगदड़ की घटना पर गजपति ने कहा कि मामले की जांच जारी है.

भगदड़ की घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गये थे. उन्होंने कहा, ”ओडिशा और पूरे भारत से आए श्रद्धालुओं की संख्या उम्मीद से कहीं अधिक थी. मुझे विश्वास है कि सरकार श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में सुधार के उपायों पर विचार करेगी. वह इस घटना के कारणों का पता लगायेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम सुझाएगी.”

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