चिदंबरम ने ऑपरेशन सिंदूर सफल रहने के बाद संघर्षविराम के लिए सहमति को लेकर सरकार पर साधा निशाना

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 29 Jul 2025 11:00 PM
चिदंबरम ने ऑपरेशन सिंदूर सफल रहने के बाद संघर्षविराम के लिए सहमति को लेकर सरकार पर साधा निशाना
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नयी दिल्ली. कांग्रेस नेता एवं पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने मंगलवार को सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि ऑपरेशन सिंदूर सफल रहने के बाद संघर्षविराम पर सहमति क्यों दी गयी? राज्यसभा में ”पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में भारत के मजबूत, सफल एवं निर्णायक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा” में भाग लेते हुए चिदंबरम ने यह प्रश्न उठाया. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा किंतु समय ही बतायेगा कि यह निर्णायक था या नहीं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सशस्त्र बलों के दृढ. और मिसाल योग्य नेतृत्व की सराहना की. उन्होंने कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर के परिणाम, यदि आप मुझसे पूछेंगे कि क्या ऑपरेशन सिंदूर मजबूत था, मैं कहूंगा कि हां. क्या ऑपरेशन सिंदूर सफल था, मैं कहूंगा कि हां. यदि आप मुझसे पूछेंगे कि क्या यह निर्णायक था तो मैं यही कह सकता हूं कि समय बताएगा.” पूर्व गृह मंत्री ने प्रश्न किया कि जब पाकिस्तान के विरूद्ध ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा तो भारत ने संघर्षविराम पर सहमति क्यों जतायी. उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि भारत अब एक या दो मोर्चों पर नहीं लड़ रहा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एवं चीन अब दो भिन्न मोर्चे नहीं हैं बल्कि आपस में मिले हुए मोर्चे हैं.

चिदंबरम ने सरकार से प्रश्न किया कि क्या उसके पास पाकिस्तान एवं चीन तथा कुछ अन्य के साथ मिलकर बनाये गये मोर्चे का सामना करने के लिए कोई योजना है? उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बाद विभिन्न देशों में भेजे गये प्रतिनिधिमंडल की ओर ध्यान दिलाते हुए सरकार से प्रश्न किया कि ऐसे प्रतिनिधिमंडल नेपाल, श्रीलंका, म्यामां और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों में क्यों नहीं भेजे गए? उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को भेजता है किंतु देश में ऐसे कई आतंकवादी हमले हुए हैं जिनमें स्थानीय आतंकवादी शामिल थे. कांग्रेस नेता ने कहा कि अधिकतर मामलों में पाकिस्तान से भेजे गए आतंकवादी स्थानीय आतंकवादियों के साथ मिलकर आतंकी हमलों को अंजाम देते हैं. चिदंरबम ने कहा, ”पहलगाम हमले के बाद सभी ने आतंकवाद की निंदा की और भारत में आतंकवाद पीड़ितों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की, लेकिन किसी भी देश ने पाकिस्तान का नाम लेकर उसकी निंदा नहीं की.” उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक निर्णायक युद्ध था और 16 दिसंबर, 1971 को ऐतिहासिक जीत हुई.

उन्होंने कहा, “इसके विपरीत, ऑपरेशन सिंदूर संघर्षविराम के साथ समाप्त हुआ. बांग्लादेश को लेकर भारत-पाकिस्तान युद्ध भारत के पक्ष में और पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ.” उन्होंने कहा कि भारत के लोग आत्मसमर्पण और संघर्षविराम के बीच का अंतर जानते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का दावा है कि भारत ने पाकिस्तान में नौ जगहों पर आतंकवादी ढांचे को नष्ट कर दिया है.

चिदंबरम ने कहा, ”मुझे यह कहना होगा कि भारत का सैन्य नेतृत्व अनुकरणीय था. न केवल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, बल्कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी, सैन्य नेतृत्व स्पष्ट और बेबाक रहा है.” उन्होंने प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) के बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने सामरिक गलतियों को स्वीकार किया था. चिदंबरम ने कहा कि उसके बाद सेना ने फिर से रणनीति बनाई.
चिदंबरम ने कहा, ”उन्होंने नुकसान स्वीकार किया, यही वजह है कि, मैं सीडीएस और अन्य सैन्य अधिकारियों को अनुकरणीय नेतृत्वकर्ता कहता हूं. मैं उन्हें स्पष्ट, बेबाक और पारदर्शी कहता हूं क्योंकि उन्होंने सामरिक गलतियों को स्वीकार किया, फिर से रणनीति बनाई.” उन्होंने कहा, ”लेकिन सरकार ने अभी तक सुरक्षा और खुफिया नाकामी को स्वीकार नहीं किया है.” उन्होंने संसद और विपक्ष को विश्वास में नहीं लेने के लिए भी सरकार पर हमला किया.

चिदंबरम ने कहा कि 2006 का मुंबई हमला स्थानीय आतंकवादियों द्वारा किया गया था, जबकि 2008 का मुंबई हमला पाकिस्तान से घुसपैठ कर आए आतंकवादियों द्वारा किया गया था. उन्होंने कहा, ”2011 का आतंकवादी हमला भी स्थानीय आतंकवादियों द्वारा किया गया था….” भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने के अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति के दावे का जिक्र करते हुए चिदंबरम ने कहा, ”भारतीय प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से ट्रंप का खंडन करना चाहिए था. विरोध का एक भी बयान, विरोध का एक भी लिखित नोट नहीं है.”

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