भारत, चीन संबंधों को तीन पारस्परिक पहलुओं से निर्देशित होना चाहिए: जयशंकर

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 18 Aug 2025 08:54 PM
भारत, चीन संबंधों को तीन पारस्परिक पहलुओं से निर्देशित होना चाहिए: जयशंकर

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नयी दिल्ली/बीजिंग. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अपने चीनी समकक्ष वांग यी को बताया कि भारत-चीन संबंधों को आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित के सिद्धांत से निर्देशित होना चाहिए. चीनी विदेश मंत्री के दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद जयशंकर ने वांग के साथ बातचीत की. बैठक में अपनी शुरुआती टिप्पणी में विदेश मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए.

जयशंकर ने कहा, “यह अवसर हमें मिलने और अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने का मौका प्रदान करता है. यह वैश्विक स्थिति और आपसी हितों के कुछ मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का भी उपयुक्त समय है.” उन्होंने कहा, ” हमारे संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद, अब दोनों देश आगे बढ़ना चाहते हैं. इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से एक स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है.”

विदेश मंत्री ने कहा, ह्ल इस कोशिश में इस प्रयास में, हमें तीन परस्पर सिद्धांतों – परस्पर सम्मान, परस्पर संवेदनशीलता और परस्पर हित – से निर्देशित होना होगा. विभिन्नताएं विवाद का कारण नहीं बननी चाहिए, और प्रतिस्पर्धा टकराव में नहीं बदलनी चाहिए.ह्व चीनी विदेश मंत्री मुख्य रूप से सीमा मुद्दे को लेकर विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की अगली दौर की वार्ता के लिए भारत की यात्रा पर आए हैं. वांग और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सीमा वार्ता के लिए नामित विशेष प्रतिनिधि हैं.

विदेश मंत्री वांग की यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ मिलकर महत्वपूर्ण निर्णयों को लागू करना है : चीन
चीन ने सोमवार को कहा कि विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति और पिछले दौर की सीमा वार्ता के दौरान लिए गए निर्णयों को क्रियान्वित करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करना है. वांग राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के साथ सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की 24वें दौर की वार्ता में भाग लेने के लिए सोमवार से दो दिवसीय भारत यात्रा पर हैं.

डोभाल ने दिसंबर में चीन की यात्रा की थी और वांग के साथ 23वें दौर की वार्ता की थी. इससे कुछ सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अक्टूबर में रूसी शहर कज.ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर अपनी बैठक में दोनों पक्षों के बीच विभिन्न वार्ता तंत्र को बहाल करने का निर्णय लिया था.

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि वांग की यात्रा के माध्यम से चीन भारत के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद करता है, ताकि नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण आम सहमति को अमली जामा पहनाया जा सके. इसके तहत उच्च स्तरीय आदान-प्रदान को कायम रखना, राजनीतिक विश्वास को बढ़ाना, व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा, मतभेदों को उचित तरीके से निपटाया जाना और चीन-भारत संबंधों के स्थिर विकास को बढ़ावा दिया जाना है.

माओ ने सोमवार को यहां प्रेस वार्ता में वांग की यात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत-चीन सीमा मुद्दों पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता के लिए एक उच्च स्तरीय माध्यम है. उन्होंने कहा कि बीजिंग में 23वें दौर की वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने परिसीमन, वार्ता, सीमा प्रबंधन तंत्र, सीमा पार आदान-प्रदान और सहयोग पर कई आम सहमतियां हासिल कीं. उन्होंने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत से ही दोनों पक्षों ने राजनयिक माध्यमों से संवाद बनाए रखा है तथा उन परिणामों के कार्यान्वयन को सक्रियता से आगे बढ़ाया है.

उन्होंने कहा कि आगामी वार्ता के लिए चीन मौजूदा आम सहमति के आधार पर और सकारात्मक एवं रचनात्मक रुख के साथ संबंधित मुद्दों पर भारत के साथ गहन संवाद जारी रखने और सीमावर्ती क्षेत्रों में निरंतर शांति बनाए रखने के लिए तैयार है. सीमा वार्ता में हुई प्रगति और चीन द्वारा समझौते की संभावनाओं को किस प्रकार देखा जाता है, इस प्रश्न पर माओ ने कहा कि विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता सीमा मुद्दे पर दोनों पक्षों के लिए एक रचनात्मक और सकारात्मक तंत्र है. उन्होंने कहा कि 23वें दौर की वार्ता में कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनीं और दोनों पक्ष इन सहमतियों को लागू कर रहे हैं.

By Yogesh Kumar Sahu