भारत, ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा संबंधों को विस्तार देने के लिए तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किये

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 09 Oct 2025 10:20 PM
भारत, ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा संबंधों को विस्तार देने के लिए तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किये
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नयी दिल्ली. भारत और ऑस्ट्रेलिया ने बृहस्पतिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उनके समकक्ष रिचर्ड मार्लेस के बीच कैनबरा में ”सकारात्मक” वार्ता के बाद अपने द्विपक्षीय रक्षा और सैन्य संबंधों को और विस्तार देने के लिए सूचना साझा करने समेत तीन प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किये. सिंह वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया की दो दिवसीय यात्रा पर हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विदेश मंत्री पेनी वोंग से भी मुलाकात की, तथा संबंधों को और अधिक गतिशीलता प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया.

दोनों रक्षा मंत्रियों ने स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने में मदद के लिए क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग ब­ढ़ाने के महत्व की पुष्टि की, तथा क्षेत्र में नौवहन और उड़ान की स्वतंत्रता तथा निर्बाध व्यापार के लिए अपने मजबूत समर्थन को रेखांकित किया. यह संकल्प रणनीतिक जल क्षेत्र में चीन की ब­ढ़ती सैन्य आक्रामकता की पृष्ठभूमि में लिया गया है.

सूचना साझा करने पर समझौते के अलावा, दोनों पक्षों ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जो पनडुब्बी खोज पर सहयोग प्रदान करेगा और संयुक्त वार्ता के लिए एक ढांचा बनाने के संबंध में भी हस्ताक्षर किए जाएंगे. सिंह-मार्लेस बैठक भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के पांच वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित की गई, जिसमें दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में संयुक्त अनुसंधान समेत व्यापक क्षेत्र में रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की. अपने संबोधन में सिंह ने आतंकवाद के खतरे के संबंध में भारत के रुख को दोहराया.

उन्होंने पाकिस्तान के प्रति भारत की नीति का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते तथा पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते. रक्षा मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का भी आग्रह किया.

गत 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक उपायों की घोषणा की, जिसमें सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था. भारत ने कहा था कि ”खून और पानी” एक साथ नहीं बह सकते. नयी दिल्ली का कहना है कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता. सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के महत्व की भी पुष्टि की.

उन्होंने कहा, ”मैंने भारत के रक्षा उद्योग के तीव्र विकास और वैश्विक स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाली रक्षा तकनीक के एक भरोसेमंद स्रोत के रूप में भारत की ब­ढ़ती प्रतिष्ठा पर प्रकाश डाला.” रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने ”रक्षा उद्योग में गहरी साझेदारी” की संभावनाओं पर चर्चा की.

उन्होंने कहा, ”मैं सीमा पार आतंकवाद और साझा क्षेत्रीय स्थिरता पर ऑस्ट्रेलिया के दृ­ढ़ समर्थन के लिए उसका आभार व्यक्त करता हूं. हम साथ मिलकर एक स्वतंत्र, खुले और लचीलेपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए सहयोग को और मजबूत करेंगे.” इससे पहले दिन में, ऑस्ट्रेलिया के सहायक रक्षा मंत्री पीटर खलील ने सिंह की अगवानी की.

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उनके कार्यक्रमों के एक भाग के रूप में, केसी-30ए ‘मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एंड टैंकर एयरक्राफ्ट’ (एमआरटीटी) पर हवा से हवा में ईंधन भरने का प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें कैनबरा के रास्ते में एक एफ-35 विमान में ईंधन भरा गया.
एक संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि सिंह और मार्लेस इस बात से प्रसन्न हैं कि भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी अब ”सभी क्षेत्रों” में है.

इसमें कहा गया कि दोनों मंत्रियों ने स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने में मदद के लिए क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग ब­ढ़ाने के महत्व की भी पुष्टि की. संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि सिंह और मार्लेस ने नौवहन और उड़ान की स्वतंत्रता, क्षेत्र में निर्बाध व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से 1982 की संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अनुरूप समुद्र के अन्य वैध उपयोगों के लिए अपने मजबूत समर्थन को रेखांकित किया.

इसमें कहा गया है, ”उन्होंने परिचालन संबंधी जानकारी ब­ढ़ाने के लिए एक-दूसरे के क्षेत्रों से विमानों की तैनाती जारी रखने पर भी सहमति जताई. मंत्रियों ने साझा चुनौतियों से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया-भारत-इंडोनेशिया त्रिपक्षीय प्रारूप के तहत जारी सहयोग का स्वागत किया.”

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