CRPF की छग-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुट्टा पहाड़ियों पर प्रशिक्षण स्कूल शुरू करने की योजना

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 27 Nov 2025 12:52 PM
CRPF की छग-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुट्टा पहाड़ियों पर प्रशिक्षण स्कूल शुरू करने की योजना
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नयी दिल्ली/बीजापुर. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) छत्तीसग­ढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित बीहड़ कर्रेगुट्टा पहाड़ियों पर जवानों के लिए एक कमांडो प्रशिक्षण स्कूल स्थापित करने की योजना बना रहा है. अब तक के सबसे बड़े नक्सल रोधी अभियानों में से एक का यहां पर संचालन किया गया था जिसमें इस साल अप्रैल और मई के बीच 31 माओवादी मारे गए थे.

आधिकारिक सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि लगभग 60 किलोमीटर लंबे, 5-20 किलोमीटर चौड़े इस भूभाग पर उपयुक्त स्थान खोजने के लिए एक सर्वेक्षण किया जा रहा है, जहां गुफाएं और बंकरों के अलावा मधुमक्खियां, चमगादड़, भालू और विभिन्न प्रकार के कीड़े-मकोड़े भी पाए जाते हैं.

सीआरपीएफ, इसकी जंगल युद्ध कमांडो इकाई कोबरा और छत्तीसग­ढ़ पुलिस ने कोरगोटालू पहाड़ी (केजीएच) में तीन सप्ताह तक ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ चलाया, जिसे कर्रेगुट्टा पहाड़ी के नाम से भी जाना जाता है. इसमें अप्रैल और मई के बीच 31 माओवादियों को मार गिराया गया और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया गया. इस अभियान को माओवादियों के खिलाफ ”अब तक का सबसे बड़ा अभियान” बताया गया और यह मार्च 2026 तक देश से वाम उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को समाप्त करने की केंद्र सरकार की घोषणा का हिस्सा था.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”केजीएच अभियान के समापन के बाद, पहाड़ी पर लगाये गए आईईडी और बमों को नि्क्रिरय करने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया.” अधिकारी ने कहा, ”यह कार्य लगभग पूरा हो चुका है और अब यहां सीआरपीएफ द्वारा संचालित एक प्रशिक्षण स्कूल स्थापित करने की योजना बनायी जा रही है.” उन्होंने कहा, ”उग्रवाद का इतिहास बताता है कि एक बार जब आप जीत की घोषणा कर देते हैं, तो आपको सुरक्षा बलों के माध्यम से क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना होता है, अन्यथा उग्रवादी या अलग हुए कैडर केजीएच की तरह फिर से संगठित हो सकते हैं.” एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि अर्धसैनिक बल और छत्तीसग­ढ़ पुलिस के अधिकारियों की एक टीम रसद और बुनियादी ढांचे के पहलुओं को देख रही है ताकि कमांडो के प्रशिक्षण के लिए केजीएच में एक स्थायी बेस बनाया जा सके.

दोनों अधिकारियों ने बताया कि र्गिमयों में पहाड़ी का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहता है और पानी और बिजली से जुड़ी समस्याएं हैं. अधिकारियों ने कहा कि इन बुनियादी समस्याओं के समाधान के बाद अंतिम योजना को लागू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन ब्लैक फ.ॉरेस्ट’ के दौरान, जवानों ने पहाड़ियों के पार जाने के लिए रास्ते बनाए थे और इसलिए अब यह दुर्गम नहीं है. हालांकि, उन्होंने कहा कि इलाका अभी भी बहुत कठिन और चुनौतीपूर्ण है. उन्होंने कहा कि केजीएच के कुछ हिस्सों को पर्यटकों के लिए खोलने की भी योजना है और एक सुरक्षा अड्डा होने से इस योजना को आगे ब­ढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

सीआरपीएफ और छत्तीसग­ढ़ पुलिस की संयुक्त टीम ने 1,200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले केजीएच में अभियान के दौरान 450 आईईडी, 35 उच्च-गुणवत्ता वाले हथियार, 2 टन विस्फोटक बरामद किए थे और 250 गुफाओं और 214 बंकरों को ध्वस्त किया.
सुरक्षा बलों ने कहा कि सुरक्षा बलों के अभियान से पहले 2.5 साल तक 350 से अधिक नक्सली पहाड़ियों पर मौजूद थे. उन्होंने बताया कि इनमें सबसे हिंसक माओवादी इकाई – पीएलजीए बटालियन नंबर 1, तेलंगाना राज्य कमेटी (टीएससी) और कुछ अन्य शाखाओं के शीर्ष स्वयंभू कमांडर शामिल थे. केजीएच में नक्सलियों की हथियार निर्माण इकाई का मुख्यालय भी था और यह माओवादियों के शस्त्रागार के रूप में कार्य करता था.

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