कोयला घोटाले में कांग्रेस नेताओं का आरोप: सरकारी एजेंसियों ने दिए जाली दस्तावेज

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 12 Oct 2025 10:50 PM
कोयला घोटाले में कांग्रेस नेताओं का आरोप: सरकारी एजेंसियों ने दिए जाली दस्तावेज
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रायपुर. छत्तीसग­ढ़ कांग्रेस ने रविवार को राज्य की आर्थिक अपराध शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ईओडब्ल्यू/एसीबी) पर कथित कोयला घोटाला मामले में सबूत ग­ढ़ने और न्यायिक प्रक्रियाओं में हेरफेर करने का आरोप लगाया. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और विधानसभा में विपक्ष के नेता चरण दास महंत ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि एक आरोपी सूर्यकांत तिवारी की जमानत के मामले में, ईओडब्ल्यू/एसीबी ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष सह-आरोपी निखिल चंद्राकर के सीआरपीसी की धारा 164 के तहत जाली बयान वाला एक दस्तावेज प्रस्तुत किया.

दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत किसी आरोपी या गवाह का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किया जाता है. अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत यह धारा 183 हो चुकी है. कांग्रेस नेताओं ने बताया कि इसे लिखित (या दर्ज) बयान भी कहा जाता है और इसे एक गोपनीय दस्तावेज माना जाता है.

बघेल ने आरोप लगाया, ह्लसीआरपीसी की धारा 164 के तहत चंद्राकर के बयान में प्रयुक्त फॉण्ट, अदालत में प्रयुक्त आधिकारिक फॉण्ट से भिन्न था. तो, यह फॉण्ट कहां से आया और इसे किसने शुरू किया? यह स्पष्ट है कि बयान पहले से टाइप करके राज्य के आर्थिक अपराध शाखा/एसीबी के अधिकारियों द्वारा पेन ड्राइव में अदालत में लाया गया था, न कि किसी मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया गया था, जबकि कानूनन यह जरूरी है.ह्व बघेल ने कहा कि फोरेंसिक विश्लेषण से पता चला कि इसमें दो अलग-अलग फॉण्ट का इस्तेमाल किया गया था, जिससे यह साबित होता है कि दस्तावेज अदालत में नहीं बनाया गया था.

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ह्लवरिष्ठ कांग्रेस नेता और अधिवक्ता गिरीश चंद्र देवांगन ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रायपुर के समक्ष एक शिकायत दायर कर ईओडब्ल्यू/एसीबी के तीन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है. शिकायत के अनुसार, इन अधिकारियों ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किए जाने वाले बयानों को ग­ढ़ा या पहले से तैयार किया और बाद में चल रही जांच में और न्यायालय के समक्ष उन्हें वास्तविक दस्तावेजों के रूप में इस्तेमाल किया.ह्व उन्होंने बताया कि 12 सितंबर को देवांगन ने इस संबंध में छत्तीसग­ढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (सतर्कता) के समक्ष भी शिकायत दर्ज कराई थी. बघेल ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो, राजस्व आसूचना निदेशालय और आयकर विभाग जैसी एजेंसियां अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम कर रही हैं और उनके निशाने पर मुख्य रूप से विपक्षी दलों के सदस्य हैं.

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