मप्र हवाला राशि लूट: एसआईटी ने हेड कांस्टेबल को पकड़ा, अब तक 11 गिरफ्तार

सिवनी. मध्यप्रदेश के जबलपुर में पुलिस अधिकारियों द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने हवाला राशि लूट मामले में एक और हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार किया है और इसके साथ ही इस मामले में यह 11वीं गिरफ्तारी है. एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.

अधिकारी ने बताया कि हेड कांस्टेबल राजेश जंघेला को बुधवार देर रात गिरफ्तार किया गया. उसे पुलिस रिमांड के लिए अदालत में पेश किया जाएगा. अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (एसडीओपी) पूजा पांडे समेत दस आरोपियों को मंगलवार रात गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 17 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है.

आठ और नौ अक्टूबर की रात को सिवनी में राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर-44 के सिलादेही बाईपास पर गश्त और जांच ड्यूटी पर तैनात पांडे और 10 अन्य लोगों पर आरोप है कि उन्होंने कटनी से पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के नागपुर जा रही एक कार को रोका, जिसमें 2.96 करोड़ रुपये की हवाला राशि थी.

पुलिस के मुताबिक, मामला दर्ज करने के बजाय 11 लोगों ने कार वालों को आगे ब­ढ़ने दिया और धन राशि आपस में बांटने का फैसला किया. साथ ही कथित हवाला ऑपरेटर को भी मामला दर्ज करने से रोका गया. एसडीओपी और 10 अन्य लोगों के खिलाफ लखनवाड़ा पुलिस ने 14 अक्टूबर को लूट और अपहरण समेत कई आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया.

अधिकारी ने कहा, ”अब तक एसआईटी ने 2.70 करोड़ रुपये जब्त किए हैं, जिसमें एसडीओपी पूजा पांडे और उप निरीक्षक अर्पित भैरम से 1.45 करोड़ रुपये शामिल हैं. नागपुर के आकाश जैन और अमन गुरनानी से 1.25 करोड़ रुपये जब्त किए गए.” एसआईटी प्रमुख जितेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि आठ और नौ अक्टूबर की रात को हवाला ऑपरेटर की गिरफ्तारी में इस्तेमाल की गई दो गाड़ियां और एसडीओपी के रीडर रविंद्र उइके की वैगनआर कार जब्त कर ली गई हैं.

उन्होंने बताया कि अपराध में शामिल सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है. इस मामले में एसडीओपी पूजा पांडे, उप निरीक्षक अर्पित भैरम, एसडीओपी कार्यालय का चालक रितेश वर्मा, रीडर हेड कांस्टेबल रविंद्र उइके, हेड कांस्टेबल माखन इनवाती, कांस्टेबल योगेंद्र चौरसिया, जगदीश यादव, गनमैन केदार बघेल, सुभाष सदाफल और बंडोल थाने के कांस्टेबल नीरज राजपूत को निलंबित कर दिया गया है. जबलपुर पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा ने शुरुआती जांच पुलिस अधीक्षक आयुष गुप्ता को सौंपी थी. इसके बाद एक एसआईटी बनाई गई.

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