पुलिस अमोनियम नाइट्रेट की खरीद-फरोख्त करने वालों का रिकॉर्ड रखें: उपराज्यपाल सक्सेना

नयी दिल्ली. लाल किला के पास 10 नवंबर को हुए विस्फोट में 15 लोगों की मौत के कुछ दिन बाद दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने निर्धारित सीमा से अधिक अमोनियम नाइट्रेट की खरीद-फरोख्त करने वाली इकाइयों का ‘डिजिटल रिकॉर्ड’ रखने के निर्देश दिए हैं. उपराज्यपाल ने व्यस्त बाजारों और विभिन्न आईएसबीटी में कड़ाई से सुरक्षा ऑडिट करने के भी निर्देश दिए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि ये निर्देश 19 नवंबर को पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा और मुख्य सचिव राजीव वर्मा को लिखित रूप में भेजे गए थे. ये निर्देश उपराज्यापाल के आदेश पर उठाए गए कई ‘एहतियाती और रोकथाम’ संबंधी उपायों का हिस्सा हैं. अमोनियम नाइट्रेट 10 नवंबर के विस्फोट में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों में से एक था. यह विस्फोट मुख्य रूप से हरियाणा के फरीदाबाद से अमोनियम नाइट्रेट सहित लगभग 3,000 किलोग्राम विस्फोटक की बरामदगी के साथ एक अंतरराज्यीय “सफेदपोश” आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश होने के तुरंत बाद हुआ.

सक्सेना ने पुलिस से निर्धारित सीमा से अधिक अमोनियम नाइट्रेट खरीदने या बेचने वाली इकाइयों का ‘डिजिटल रिकॉर्ड’ तैयार करने का निर्देश दिया है. इसमें खरीदार और विक्रेता की तस्वीरों के अलावा अन्य प्रासंगिक विवरण भी शामिल होने चाहिए. उन्होंने कहा, “पुलिस आयुक्त दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978, विस्फोटक अधिनियम, 1884 और अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अमोनियम नाइट्रेट की बिक्री, भंडारण और परिवहन के लाइसेंस के लिए 2022 के आदेश पर फिर से विचार कर सकते हैं.”

उपराज्यपाल कार्यालय से पुलिस प्रमुख को भेजे गए आधिकारिक संचार में कहा गया है, “विशेष रूप से, उपराज्यपाल का मानना है कि पुलिस को एक निश्चित सीमा से अधिक अमोनियम नाइट्रेट खरीदने और बेचने वाली संस्थाओं का डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखना चाहिए, जिसमें खरीदारों और विक्रेताओं की तस्वीरों के अलावा अन्य प्रासंगिक विवरण भी शामिल हों.” वर्ष 2022 में जारी स्थायी आदेश में अमोनियम नाइट्रेट का लाइसेंस देने और रसायन की बिक्री या उपयोग के लिए निर्माण, रूपांतरण, आयात, निर्यात, परिवहन, कब्जे को विनियमित और नियंत्रित करने से संबंधित नियम और प्रक्रियाएं निर्धारित की गयी थी.

पुलिस को ‘मेटा’ और ‘एक्स’ जैसे सोशल मीडिया मंचों के प्रमुखों के साथ परामर्श करके चरमपंथी और नागरिकों को प्रभावित करने वाली सामग्री की वैज्ञानिक निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए हैं. राज निवास के एक अधिकारी ने कहा, ”पुलिस आयुक्त को चरमपंथ की ओर प्रवृत्त संवेदनशील क्षेत्रों में मानव और तकनीकी खुफिया नेटवर्क को मजबूत करने, साथ ही समुदाय और नागरिक जुड़ाव बढ़ाने के लिए कदम उठाने का भी निर्देश दिया गया है.” सक्सेना ने व्यस्त बाजारों और अंतरराज्यीय बस र्टिमनल (आईएसबीटी) में सीसीटीवी कवरेज और सुरक्षा र्किमयों की तैनाती की समीक्षा के लिए कड़ाई से सुरक्षा ऑडिट करने का भी निर्देश दिया है.

आधिकारिक संदेश में कहा गया, “सभी डीसीपी व्यस्त बाजारों और अधिक भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों-जैसे आईएसबीटी, रेलवे स्टेशन, सिनेमाघर, पार्क और मेट्रो स्टेशन आदि-की कड़ी सुरक्षा ऑडिट कराएं. ऑडिट में सुरक्षा र्किमयों की तैनाती योजना, बीट रोस्टर और मौजूदा सीसीटीवी नेटवर्क पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए.” इसमें कहा गया कि सीसीटीवी कवरेज न होने वाले स्थान यानी ‘डार्क स्पॉट्स’ की पहचान कर एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जाए और मुख्य सचिव को भेजी जाए.

प्रशासन से कहा गया है कि अस्पतालों, विशेषकर निजी संस्थानों में नियुक्त चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों का ‘केंद्रीय डेटा रिपोसिटरी’ बनाया जाए, जिसमें उनकी मेडिकल डिग्री और अनुभव का विवरण शामिल हो. विदेश से डिग्री प्राप्त करने वाले पेशेवरों की जानकारी भी पुलिस को पृष्ठभूमि जांच के लिए साझा की जानी चाहिए.

इसके अलावा वाहन बिक्री और खरीदी के डिजिटल मंचों और वित्तीय संस्थाओं के साथ परामर्श करने का निर्देश दिया गया है.
अधिकारी ने कहा, ”स्पष्ट निर्देश दिए जाने चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में ऐसे वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिनके वास्तविक मालिक और पंजीकृत मालिक अलग-अलग हों. यह समस्या विशेषकर ऑटो रिक्शा के मामलों में सामने आती है.”

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