
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि मध्य प्रदेश की धीरौली कोयला खनन परियोजना एक पर्यावरणीय त्रासदी और स्थानीय आदिवासी जनजातियों के लिए एक सामाजिक तथा आर्थिक आपदा बन चुकी है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इस परियोजना के तहत पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई है तथा वहां बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई है.
रमेश ने बीते 12 सितंबर को आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अदाणी समूह की धीरौली कोयला खदान परियोजना में वन अधिकार अधिनियम, 2006 (एफआरए) और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) का उल्लंघन किया गया है. हालांकि, मध्यप्रदेश सरकार ने इस आरोप को खारिज कर दिया.
रमेश ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”हमने पहले भी इस मुद्दे को उठाया था कि मध्य प्रदेश के धीरौली में मोदानी एंड कंपनी द्वारा कोयला खदान के लिए जंगल कटाई में प्रक्रियागत नियमों को पूरी तरह दरकिनार किया गया है. अब रिपोर्ट सामने आई हैं कि भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गांव में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई है.”
उन्होंने दावा किया, ”स्थानीय ग्रामीणों को जंगल के इलाके के पास जाने से रोका जा रहा है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई है. मध्य प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष रामू टेकाम को इस मुद्दे को उठाने पर गिरफ्तार कर लिया गया है.” रमेश ने कहा कि यह एक पर्यावरणीय त्रासदी और स्थानीय आदिवासी जनजातियों के लिए एक सामाजिक और आर्थिक आपदा है, जो अपनी आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर हैं.
आंबेडकर और संविधान पर निरंतर हमले कर रहा है संघ: कांग्रेस
कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संविधान के निर्माण के समय भी बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर एवं संविधान पर हमला किया था और आज भी हमला जारी रखे हुए है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इस बात का उल्लेख भी किया कि ठीक 76 साल पहले बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर ने संविधान के मसौदे को अनुमोदन के लिए संविधान सभा के समक्ष रखा था.
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आज से ठीक 76 साल पहले, डॉ. आंबेडकर ने भारत के संविधान के मसौदे को औपचारिक रूप से अनुमोदन के लिए संविधान सभा में प्रस्ताव पेश किया था. उस अवसर पर उनका समापन भाषण निस्संदेह 20वीं शताब्दी में किसी भी व्यक्ति द्वारा दिए गए सबसे महान भाषणों में से एक है. ” उनके मुताबिक, अपने भाषण के आरंभिक भाग में आंबेडकर ने कहा था, ” मसौदा समिति का कार्य बहुत कठिन हो सकता था यदि यह संविधान सभा केवल एक बेतरतीब भीड़ होती -जैसे बिना सीमेंट का टुकड़ों वाला फर्श, जहाँ कहीं काला पत्थर और कहीं सफेद पत्थर रखा हो और हर सदस्य या समूह अपने आप में एक कानून हो जाता. तब यहां केवल अराजकता होती. लेकिन यह संभावित अराजकता कांग्रेस पार्टी की मौजूदगी के कारण समाप्त हो गई, जो संविधान सभा की कार्यवाही में व्यवस्था एवं अनुशासन की भावना लाई.”
रमेश ने आंबेडकर को उद्धृत करते हुए कहा, ” कांग्रेस पार्टी के अनुशासन के कारण ही मसौदा समिति संविधान सभा में ड्राफ्ट को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा सकी – यह जानते हुए कि प्रत्येक अनुच्छेद और प्रत्येक संशोधन का परिणाम क्या होगा. इसलिए, संविधान के सुचारु रूप से पारित होने का पूरा श्रेय कांग्रेस पार्टी को जाता है.” कांग्रेस महसचिव ने दावा किया कि उस समय आंबेडकर और संविधान पर आरएसएस द्वारा भयंकर हमला किया गया था तथा यह हमला तब से जारी है.



