
नयी दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर बृहस्पतिवार कहा कि “पापा ऊपर से अपनी खूबसूरत सोनिया को गर्व से देख रहे होंगे।” सोनिया गांधी की आत्मकथा इस साल नवंबर में बाजार में आने वाली है।
राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी मां की कहानी उन करोड़ों लोगों तक पहुंचेगी, जो उनसे प्यार करते हैं। उनका कहना है कि वह जानते हैं कि सोनिया जैसी बेहद निजी जीवन जीने वाली शख्सियत के लिए दुनिया के सामने अपनी खूबसूरत कहानी रखना कितना कठिन रहा होगा।
सोनिया गांधी नवंबर में अपनी आत्मकथा लेकर आएंगी, जिसमें वह भारत के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों में से एक में विवाह के बाद अपने जीवन, पति राजीव गांधी की हत्या के उस दुखद दौर और 2004 में प्रधानमंत्री पद अस्वीकार करने सहित कई निजी अनुभव साझा करेंगी।
अमेरिकी प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस की इकाई ‘अल्फ्रेड ए. नॉफ’ ने मंगलवार को घोषणा की कि सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉंिन्गग: ए जर्नी आॅफ लव’ 10 नवंबर को प्रकाशित होगी। हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने भारत में पुस्तक के विमोचन की तारीख की अभी पुष्टि नहीं की है।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मां, मैंने आपको और पापा को आखिरी बार 35 साल से अधिक समय पहले साथ देखा था। जिस दिन पापा हमें छोड़कर गए, उस दिन से मैंने आपको जीवन की हर चुनौती का सामना असीम साहस और गरिमा के साथ करते देखा है।” उन्होंने कहा, ”केवल प्रियंका और मैं ही वास्तव में जानते हैं कि आपने किन परिस्थितियों का सामना किया और पापा के जाने के बाद आपका जीवन कितना कठिन था।”
राहुल गांधी ने कहा, ”मुझे खुशी है और गर्व भी कि आपकी कहानी—’बिलॉंिन्गग: ए जर्नी आॅफ लव’—आखिरकार उन लाखों लोगों द्वारा पढ़ी जाएगी, जो आपसे प्यार करते हैं। मैं जानता हूं कि आप जैसी निजी जीवन को महत्व देने वाली शख्सियत के लिए दुनिया के सामने अपनी खूबसूरत कहानी रखना कितना कठिन था।” उन्होंने कहा कि आज, अपने पिता राजीव गांधी के जन्मदिन पर, वह कल्पना कर सकते हैं कि ”पापा ऊपर से मुस्कुराते हुए अपनी खूबसूरत सोनिया को गर्व से देख रहे होंगे।”
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वह 40 वर्ष की उम्र में 31 अक्टूबर 1984 को देश के प्रधानमंत्री बने और दो दिसंबर 1989 तक इस पद पर रहे। तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 21 मई 1991 को चुनावी सभा के दौरान आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी।
अल्फ्रेड ए. नॉफ की वेबसाइट के अनुसार, आत्मकथा की शुरूआत इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से होती है, जहां 1965 में 19 वर्षीय छात्रा सोनिया मायनो को ”पहली नजर में उस खूबसूरत युवक से मोहब्बत हो जाती है” जिससे आगे चलकर उनका विवाह होता है।
सोनिया गांधी ने सार्वजनिक मंचों पर अपने निजी जीवन के बारे में बहुत कम बात की है। आत्मकथा में वह इटली में अपने बचपन से लेकर भारत आने, प्रेम और विवाह तथा उन गहरे व्यक्तिगत दुखों तक की कहानी साझा करती हैं, जिन्होंने न केवल उनका जीवन बल्कि उनके अपनाए हुए देश का भविष्य भी बदल दिया।
पुस्तक में यह भी बताया गया है कि 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नीत गठबंधन की जीत के बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया और इसके बजाय मनमोहन ंिसह को सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुना। आत्मकथा में वह अपनी सास और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अपने परिचय का भी जिक्र करती हैं। उन्होंने ंिहदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय व्यंजनों का आनंद लेने के अनुभव भी साझा किये हैं।



