ईडी की शक्तियों को बरकरार रखने वाले फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करेगा न्यायालय

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Thu, 20 Aug 2026 03:16 PM
ईडी की शक्तियों को बरकरार रखने वाले फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करेगा न्यायालय
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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उन याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई, जिनमें धनशोधन मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को गिरफ्तार करने, संपत्ति कुर्क करने और तलाशी एवं जब्ती की शक्ति देने वाले 2022 के फैसले पर पुर्निवचार का अनुरोध किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर संज्ञान लिया। सिब्बल कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम की ओर से पेश हुए और उन्होंने कहा कि इन याचिकाओं पर अगस्त 2022 में ही नोटिस जारी हो चुके थे और अब इन पर सुनवाई की जरूरत है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ”मामले को पीठ के निर्धारण को लेकर पक्षकारों की सहमति दर्ज करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।” उन्होंने कहा कि यदि मामलों को उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना है जिसने पहले इन पर सुनवाई की थी, तो तीन मौजूदा पीठों का पुनर्गठन करना होगा, क्योंकि अन्य दो न्यायाधीश अब अलग-अलग पीठों में सुनवाई कर रहे हैं।

पीठ ने कहा कि मामले की तात्कालिकता को देखते हुए अब इसकी सुनवाई प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बागची तथा न्यायमूर्ति मोहना की पीठ करेगी। अगली सुनवाई की तारीख बाद में अधिसूचित की जाएगी। पिछले साल 31 जुलाई को पीठ ने कहा था कि वह पहले 2022 के फैसले के खिलाफ दायर पुर्निवचार याचिकाओं के सुनवाई योग्य होने के मुद्दे पर दलीलें सुनेगी।

वर्ष 2022 के फैसले में शीर्ष अदालत ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी की गिरफ्तार करने, धनशोधन से जुड़ी संपत्तियों को कुर्क करने और तलाशी एवं जब्ती करने की शक्तियों को बरकरार रखा था। पीठ ने कहा था कि ईडी ने तीन प्रारंभिक मुद्दे उठाए हैं, जो मुख्य रूप से पुर्निवचार याचिकाओं के सुनवाई-योग्य होने के सवाल से जुड़े हैं।

अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने उसके विचार के लिए 13 सवाल प्रस्तावित किए हैं। पीठ ने कहा था, ”चूंकि प्रस्तावित मुद्दे पुर्निवचार कार्यवाही से जुड़े हैं, इसलिए हम पहले पुर्निवचार याचिकाओं की स्वीकार्यता के मुद्दे पर पक्षकारों को सुनना चाहते हैं। इसके बाद पुर्निवचार याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए सवालों पर सुनवाई होगी।”

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