नवभारत न्यूज
किसी व्यक्ति की उम्र 40 साल है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसके शरीर पर भी उम्र का उतना ही असर पड़ा हो। शरीर के भीतर होने वाले बदलावों से कोई व्यक्ति जैविक रूप से अपनी वास्तविक उम्र से अधिक या कम उम्र का हो सकता है।
इसी अंतर को समझने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने एक मॉडल तैयार किया है। यह खून के संकेतकों, शरीर में चर्बी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों के आधार पर जैविक उम्र का अनुमान लगा सकता है। इससे डायबिटीज, मोटापा और मोटापे से बढ़ी जैविक उम्र 4240 लोगों पर किए गए अध्ययन में अधिक वजन या मोटापे वाले लोगों में जैविक उम्र वास्तविक उम्र से अधिक होने की प्रवृत्ति पाई गई। मोटापे के साथ हाई ब्लड प्रेशर और बढ़े हुए ब्लड शुगर वाले लोगों में यह अंतर अधिक था। पेट के अंदर जमा चर्बी और शरीर में कुल चर्बी की मात्रा भी अहम संकेतक रहे। इससे पता चलता है कि जैविक उम्र समझने के लिए शरीर की बनावट, प्रतिरक्षा प्रणाली और चयापचय से जुड़े कई संकेतकों का एक साथ आकलन जरूरी है।
फैटी लिवर जैसी बीमारियों के जोखिम को समझने में मदद मिल सकती है।
44 संकेतकों से आकलन शोधकर्ताओं ने मॉडल में 44 तरह के साइटोकाइन, हीमोग्लोबिन, लिंग और शरीर की बनावट से जुड़ी जानकारियों का इस्तेमाल किया। साइटोकाइन ऐसे प्रोटीन हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं।