बर्लिन, जर्मनी. ग्लोबल वार्मिंग विषय पर यहां चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने पश्चिमी देशों को जमकर आईना दिखाया।
उन्होंने कहा कि “आखिर इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार कौन है? ओजोन परत को नुकसान कहाँ पहुँचा? वातावरण में इतना सारा कार्बन किसने भेजा?… मैं दुनिया की 17% आबादी का प्रतिनिधित्व करता हूँ, लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में मेरा योगदान 3% से भी कम है। आप (यूरोप) शायद दुनिया की 3% या 4% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, फिर भी कार्बन उत्सर्जन—यानी इस गड़बड़ी—में आपका योगदान बहुत बड़ा है… यह समस्या आपके कारण पैदा हुई है… आज भी, जब हम यहाँ बैठे हैं, तो प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में मेरा योगदान आपके योगदान का शायद 10% या 15% से भी कम है। आज भी, प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन—और पर्यावरण पर प्रति व्यक्ति प्रभाव—के मामले में यूरोप का स्तर भारत की तुलना में शायद सात या आठ गुना अधिक है… मैं दुनिया की 17% आबादी का प्रतिनिधित्व करता हूँ, और मैं कचरे (वेस्ट) तथा ‘सर्कुलर इकॉनमी’ (चक्रीय अर्थव्यवस्था) को लेकर कहीं अधिक जागरूक हूँ। मुझे 1.4 अरब लोगों की जरूरतें भी पूरी करनी हैं। मुझे उनकी ऊर्जा संबंधी जरूरतों और भोजन की जरूरतों को पूरा करना है, और यह सुनिश्चित करना है कि मेरा देश सुरक्षित रहे। इन सबके बावजूद, हमारे पास दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रमों में से एक है.”
यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल एक भागीदार ही नहीं है, बल्कि पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात मजबूती से रख रहा है।