टेलीकॉम टावरों पर जंग और नुकसान की जांच के लिए अब कर्मचारियों को ऊंचाई पर चढ़कर जोखिम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) की टीम बिटक्वेस्ट ने ड्रोन, पांचवीं पीढ़ी की मोबाइल तकनीक (5जी) और आभासी वास्तविकता (वीआर) पर आधारित एक तकनीक विकसित की है। इससे दूर से ही टावरों की जांच करने में मदद मिलेगी। इस नवाचार के लिए टीम को दूरसंचार विभाग के 5जी इनोवेशन हैकाथॉन 2026 में पहला स्थान मिला है। टीम को ढाई लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया।
टीम को पुरस्कार किसने दिया?
डीटीयू की टीम को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 के दौरान केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी टीम को बधाई दी। टीम में हर्ष भाटिया बतौर टीम लीडर शामिल हैं। इनके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अर्पित मदान और कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग की विनीता कुमारी मीना ने भी इस नवाचार में योगदान दिया।
किन प्रोफेसरों को मिली जगह?
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के दो प्रोफेसरों को विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की वर्ष 2026 की सूची में शामिल किया गया है। इनमें प्रो. सत्यव्रत महापात्र और प्रो. गगनदीप शर्मा शामिल हैं। यह सूची अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एलसेवियर की ओर से जारी की गई है। दोनों प्रोफेसरों की
उपलब्धि पर विश्वविद्यालय ने गर्व जताया है।
किस क्षेत्र में मिला सम्मान? सत्यव्रत महापात्र को अनुप्रयुक्त भौतिकी के क्षेत्र में लगातार सातवें वर्ष इस सूची में जगह मिली है। वहीं, प्रो. गगनदीप शर्मा को प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार दूसरी बार शामिल किया गया है। यह उपलब्धि उनके शोध और अकादमिक योगदान को दर्शाती है।