वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी थेल्स के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पैट्रिस कैन ने कहा है कि कृत्रिम मेधा (एआई) के इस्तेमाल को रोकना समाधान नहीं है, बल्कि तकनीकी सुरक्षा उपायों के जरिये इसे मानवीय नियंत्रण में रखना और इसके इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम बनाना जरूरी है।

एआई के संभावित जोखिमों को लेकर जारी चर्चा के बीच कैन ने कहा कि प्रौद्योगिकी कंपनियों को एआई में सुरक्षा उपाय शामिल करने चाहिए, जबकि सरकारों को इसके इस्तेमाल की स्पष्ट सीमाएं तय करने वाला उचित ढांचा तैयार करना चाहिए।
एआई के कारण मानवता के सामने संभावित अस्तित्वगत संकट के बारे में पूछे जाने पर कैन ने कहा, ”अभी नहीं। लेकिन संभावित खतरों को लेकर चेतावनियों को गंभीरता से लेना जरूरी है। इन चेतावनियों से जागरूकता बढ़ती है और एआई से जुड़े जोखिमों से बचाव के उपाय शुरू करने का समय आ गया है।” उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा कि ऐसे जोखिमों का पहले से अनुमान लगाना जरूरी है और इन चेतावनियों को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
कैन ने कहा, ”सवाल एआई का इस्तेमाल रोकने का नहीं है। सवाल यह है कि प्रौद्योगिकी कंपनियां किस तरह यह सुनिश्चित करें कि एआई और अन्य प्रौद्योगिकियां नियंत्रण में रहें और महत्वपूर्ण फैसलों में इंसान का नियंत्रण बना रहे।” उन्होंने एआई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा समझ या नियामकीय ढांचे की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि उद्योग का स्व-नियमन एक ‘अच्छी शुरूआत’ है, लेकिन तेजी से अधिक स्वायत्त होती एआई प्रणालियों से पैदा होने वाली नई सुरक्षा ंिचताओं को देखते हुए यह लंबे समय में पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों में नियमों और व्यवस्थाओं को लेकर अंतर हो सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह साझा समझ होनी चाहिए कि एआई के इस्तेमाल में क्या स्वीकार्य है और क्या पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए।
कैन ने कहा कि एआई का भविष्य आखिरकार इस पर निर्भर करेगा कि मनुष्य इसका विकास और इस्तेमाल किस तरह करते हैं। उन्होंने कहा कि एआई आधारित साइबर हमलों की गति और क्षमता बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि थेल्स की साइबर सुरक्षा प्रणालियां पहले प्रतिदिन करीब 20 लाख बॉट हमलों को रोकती थीं, जबकि अब यह संख्या बढकर करीब 2.5 करोड़ प्रतिदिन हो गई है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल ऐसे हमलों से बचाव के लिए भी किया जा रहा है। एआई की मदद से साइबर हमलों का तेजी से पता लगाने, उनका जवाब देने तथा हमलों को रोकने के उपाय किए जा रहे हैं। रक्षा, वैमानिकी और साइबर एवं डिजिटल क्षेत्र में सक्रिय थेल्स उन्नत प्रौद्योगिकी सेवाएं मुहैया कराती है।