शेयर घोटाला : ईडी का दो कंपनियों के 29 ठिकानों पर छापा, फर्जी कंपनी बनाई, फिर व्हाट्सअप में लोगों को जोड़ा, फिर 200 करोड़ के ट्रेडिंग खाते फ्रीज कर दिए!

Author: Navabharat News Group
UPDATED: Tue, 20 Oct 2026 10:18 AM
शेयर घोटाला : ईडी का दो कंपनियों के 29 ठिकानों पर छापा, फर्जी कंपनी बनाई, फिर व्हाट्सअप में लोगों को जोड़ा, फिर 200 करोड़ के ट्रेडिंग खाते फ्रीज कर दिए!
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल कार्यालय-I ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 16 अक्टूबर 2026 को मुंबई, नासिक, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर में कुल 29 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई दो सूचीबद्ध कंपनियों—आर. एम. ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड और आरएंडबी डेनिम्स लिमिटेड—के शेयरों में कथित हेरफेर से संबंधित है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने व्हाट्सऐप के जरिए कथित तौर पर चलाए जा रहे ‘पंप-एंड-डंप’ शेयर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र और गुजरात के छह शहरों में 29 स्थानों पर छापेमारी की है. ये कार्रवाई ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय-1 ने शुक्रवार को मुंबई और नासिक (महाराष्ट्र) तथा अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर (गुजरात) में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की. जांच का संबंध लिस्टेड कंपनियों आर एम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड (आरएमडीएसएसएल) और आर एंड बी डेनिम्स लिमिटेड के शेयरों में कथित हेरफेर से है.

ED ने जिन जगहों पर तलाशी ली, उनमें दोनों कंपनियों के दफ्तर, उनके प्रमोटरों के घर, कम कीमत पर शेयर पाने वाले लोगों के ठिकाने, स्टॉक ब्रोकिंग और फाइनेंस कंपनियों के कार्यालय तथा व्हाट्सऐप प्रचार समूह चलाने के संदेह वाले लोगों से जुड़े परिसर शामिल हैं. ED के अनुसार, जांच में पता चला है कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच इन दोनों कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और परिवर्तनीय वारंट जारी किए थे. एजेंसी का दावा है कि इन शेयरों की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई बड़ी रकम कुछ आपस में जुड़े व्यक्तियों, कंपनियों और उधारदाताओं के एक छोटे समूह से आई थी.

ED का आरोप है कि बाद में शेयरों की कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया, जबकि बड़ी संख्या में शेयर पहले से ही उन्हीं लोगों के पास बने रहे. जांच के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंत से फरवरी 2026 के बीच ‘मल्टीबैगर स्टॉक्स’ जैसे नामों वाले व्हाट्सऐप ग्रुप्स में इन शेयरों को खरीदने की सलाह रोजाना खुदरा निवेशकों को दी जाती थी.

ईडी ने कहा कि ये व्हाट्सऐप समूह हरियाणा और मुंबई के अन्य लोगों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड का उपयोग कर चलाए जा रहे थे, जबकि इनके संचालन का केंद्र कथित तौर पर भावनगर था. एजेंसी का कहना है कि इस प्रचार अभियान के कारण खरीदारों की संख्या, ट्रेडिंग वॉल्यूम और शेयरों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई. इसके बाद प्राथमिक आवंटन पाने वाले लोगों ने बढ़ती मांग का फायदा उठाकर अपने शेयर बड़ी संख्या में निवेशकों को बेच दिए.

कौन-कौन कंसल्टेंसी हैं शामिल?
तलाशी के दौरान ईडी ने कई आपस में जुड़े पारिवारिक लाभार्थियों की पहचान की, जिनमें एफ्लुएंस जेम्स, कावा एचयूएफ और कोमाले कंसल्टेंसी से जुड़ी संस्थाएं शामिल हैं. एजेंसी के अनुसार, इन लाभार्थियों ने कम कीमत पर प्राथमिक वारंट के जरिए शेयर हासिल किए थे. बाद में इन शेयरों का प्रचार व्हाट्सऐप, एक्स (पूर्व में ट्विटर), एसएमएस और अन्य माध्यमों से किया गया ताकि निवेशकों की रुचि बढ़ाई जा सके.

ED ने बताया कि जांच के दायरे में आए व्यक्तियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के लगभग 200 करोड़ रुपए मूल्य के ट्रेडिंग खातों को फ्रीज कर दिया गया है. छापेमारी के दौरान एजेंसी ने दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, शेयर लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और संपत्तियों से संबंधित कागजात भी जब्त किए हैं। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है.

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