करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि, पूरे दिन बिना पानी और भोजन के रहने के कारण कुछ महिलाओं को चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, सिरदर्द, घबराहट या थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
ऐसे में यह जानना जरूरी है कि करवा चौथ के व्रत के दौरान तबीयत बिगड़ने पर क्या करना चाहिए और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस लेख में जानें कि व्रत के दौरान चक्कर या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत कौन-से कदम उठाने चाहिए?
चक्कर आने पर तुरंत बैठ जाएं या लेट जाएं
अगर करवा चौथ का व्रत रखते समय अचानक चक्कर आने लगे, आंखों के सामने अंधेरा छाने लगे या शरीर में कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत बैठ जाएं या सुरक्षित जगह पर लेट जाएं। अचानक खड़े होने या चलने से बचें, क्योंकि इससे गिरने और चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है। संभव हो तो किसी परिजन की मदद लें और पूरी तरह ठीक महसूस होने तक आराम करें।
कमजोरी और घबराहट होने पर परिजनों को बताएं
व्रत के दौरान कमजोरी, बेचैनी या घबराहट महसूस होने पर इसे छिपाने की कोशिश न करें। अपने पति या परिवार के किसी सदस्य को तुरंत अपनी स्थिति बताएं। लंबे समय तक खाली पेट रहने और पानी न पीने से शरीर पर असर पड़ सकता है। ऐसे में अकेले रहने या घरेलू काम जारी रखने के बजाय आराम करें। यदि लक्षण बढ़ते हैं या बार-बार महसूस होते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
शरीर में पानी की कमी के लक्षण पहचानें
निर्जला व्रत के दौरान पानी न पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी हो सकती है। इसके कारण मुंह सूखना, बहुत प्यास लगना, पेशाब कम आना, गहरे पीले रंग का पेशाब, सिरदर्द और चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- अत्यधिक कमजोरी या खड़े होने पर चक्कर आने को नजरअंदाज न करें।
- यदि तबीयत बिगड़ रही है, तो केवल व्रत पूरा करने के लिए पानी पीने में देरी न करें।
- व्रत तोड़ने की जरूरत पड़े, तो होश में होने और सुरक्षित रूप से निगल पाने की स्थिति में धीरे-धीरे पानी पिएं।