नयी दिल्ली. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि महंगाई एवं बेरोजगारी जैसे जनता से जुड़े विषयों पर सवाल पूछने के कारण ‘राजा’ ने कई सांसदों को गिरफ्तार और निलंबित करवा दिया.
राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘मानसून सत्र में हम प्रधानमंत्री जी से जनता के मुद्दों पर चर्चा करना चाहते थे. जनता के कई सवाल थे जिनके जवाब प्रधानमंत्री और उनकी सरकार को देने थे. लेकिन उनकी तानाशाही देखिए, सवाल पूछने पर प्रधानमंत्री इतने नाराज़ हो गए कि 57 सांसदों को गिरŸफ्तार करवा दिया और 23 को निलंबित.’’
कांग्रेस नेता ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सोनिया गांधी से पूछताछ का विरोध कर रहे पार्टी सांसदों को हिरासत में लिए जाने तथा संसद के दोनों सदनों में महंगाई एवं जीएसटी पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा करने वाले 20 से अधिक सांसदों के निलंबन का हवाला दिया.
उन्होंने कहा, ‘‘खैर, जो सवाल पूछने नहीं दिए जा रहे, वो यहां ‘राजा’ से पूछ रहा हूं. 45 वर्षों में आज सबसे ज़्यादा बेरोज़गारी क्यों है? हर साल 2 करोड़ रोज़गार देने के वादे का क्या हुआ? जनता के रोज़मर्रा के खाने-पीने की चीज़ों जैसे दही-अनाज पर जीएसटी लगा कर, उनसे दो वक्त की रोटी क्यों छीन रहे हैं? खाने का तेल, पेट्रोल-डीज़ल और सिलेंडर के दाम आसमान छू रहे हैं, जनता को राहत कब मिलेगी?’’ उन्होंने यह सवाल भी किया, ‘‘डॉलर के मुकाबले रूपये की कीमत 80 पार क्यों हो गई? सेना में 2 सालों से एक भी भर्ती नहीं करके, सरकार अब ‘अग्निपथ’ योजना लायी है, युवाओं को 4 साल के ठेके पर ‘अग्निवीर’ बनने पर मजबूर क्यों किया जा रहा है?
लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन की सेना, हमारी सीमा में घुस चुकी है, आप चुप क्यों हैं और आप क्या कर रहे हैं?’’ राहुल गांधी ने पूछा, ‘‘फसल बीमा से बीमा कंपनियों को 40,000 रुपये करोड़ का फायदा करवा दिया, मगर 2022 तक किसानों की ‘आय दोगुनी’ करने के अपने वादे पर चुप, क्यों? किसान को सही एमएसपी के वादे का क्या हुआ? और किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों को मुआवज़ा मिलने का क्या हुआ?’’
उन्होंने सवाल किया, ‘‘वरिष्ठ नागरिकों के रेल टिकट में मिलने वाली 50 प्रतिशत छूट को बंद क्यों किया? जब अपने प्रचार पर इतना पैसा खर्च कर सकते हैं तो, बुज़ुर्गों को छूट देने के लिए पैसे क्यों नहीं हैं? केंद्र सरकार पर 2014 में 56 लाख करोड़ रुपये कर्ज़ था, वो अब बढ़ कर 139 लाख करोड़ रुपये हो गया है, और मार्च 2023 तक 156 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा, आप देश को कर्ज़ में क्यों डुबो रहे हैं?’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सवालों की सूची बहुत लंबी है, लेकिन पहले प्रधानमंत्री जी मेरे इन 10 सवालों का जवाब दे दें. कांग्रेस पार्टी को डराने-धमकाने से आपकी जवाबदेही Ÿखत्म नहीं हो जाएगी, हम जनता की आवाज़ हैं और उनके मुद्दे उठाते रहेंगे.’’
पीएमएलए पर न्यायालय के फैसले का लोकतंत्र पर दूरगामी प्रभाव होगा : कांग्रेस
कांग्रेस ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मिले अधिकारों को लेकर आए उच्चतम न्यायालय के फैसले पर बुधवार को कहा कि इस फैसले का ऐसे समय में देश के लोकतंत्र पर दूरगामी असर होगा जब सरकारें राजनीतिक प्रतिशोध में लगी हुई हैं.
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों को लेकर दिए गए फैसले का हमारे लोकतंत्र पर दूरगामी प्रभाव होगा और खासकर उस समय जब सरकारें राजनीतिक प्रतिशोध ले रही हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘बहरहाल, इस फैसले के एक विशेष पहलू पर मैं तत्काल बात करना चाहूंगा. मैंने मोदी सरकार द्वारा धन विधेयक के सरेआम दुरुपयोग किए जाने को लेकर उच्चतम न्यायालय का रुख किया था. उच्चतम न्यायालय ने मेरी याचिका पर दो जुलाई, 2019 को नोटिस जारी किया था. आज के फैसले से यह सवाल अनसुझला ही रह गया.’’ रमेश का कहना था कि उच्चतम न्यायालय ने कुछ मामलों को व्यापक पीठ द्वारा सुनवाई के लिए छोड़ दिया है और यह कुछ संतोष का विषय है.
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मिले अधिकारों का समर्थन करते हुए बुधवार को कहा कि धारा-19 के तहत गिरफ्तारी का अधिकार, मनमानी नहीं है. न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सी. टी. रवि कुमार की पीठ ने पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि धारा-5 के तहत धनशोधन में संलिप्त लोगों की संपति कुर्क करना संवैधानिक रूप से वैध है.