ठाकरे गुट ने न्यायालय में कहा, शिंदे गुट के विधायक अन्य पार्टी में विलय कर अयोग्यता से बच सकते हैं

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 03 Aug 2022 10:32 PM
ठाकरे गुट ने न्यायालय में कहा, शिंदे गुट के विधायक अन्य पार्टी में विलय कर अयोग्यता से बच सकते हैं

ऑडियो सुनें

नयी दिल्ली. शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के विधायक संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत केवल किसी दल में विलय करने के बाद ही अयोग्यता से बच सकते हैं. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर बागी विधायकों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे से कहा कि वह पार्टी के विभाजन, विलय, बगावत और अयोग्यता को लेकर उठाए गए संवैधानिक सवालों पर पुन: जवाब तैयार करें.

ठाकरे गुट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ से कहा कि 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कोई संवैधानिक सुरक्षा नहीं है. उन्होंने कहा कि या तो आप विलय करें या नयी पार्टी बनाएं. सिब्बल के इस तर्क का जवाब देते हुए साल्वे ने कहा कि दल-बदल कानून उन नेताओं के लिए हथियार नहीं है जो पार्टी के सदस्यों को एकजुट रखने के लिए उनका विश्वास प्राप्त करने में सफल नहीं हुए हैं. साल्वे ने कहा कि यह मामला विधायकों द्वारा स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़े जाने का नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘‘दलबदल कानून का मूल अधिकार क्षेत्र तब शुरू होता है जब आप पार्टी छोड़ते हैं. किसी को कोई अयोग्यता नहीं मिली है. मान्यवर सिब्बल ने एक रक्षा को व्यापक रूप से ध्वस्त कर दिया है, जिसे किसी ने स्थापित नहीं किया है. अगर आज, पार्टी में विभाजन होता है और आपको पार्टी की बैठक के लिए बुलाया जाता है, तो आप सदन में व्हिप की अवहेलना नहीं कर रहे होते.’’ साल्वे ने कहा, ‘‘यह दलबदल नहीं है. यह पार्टी की आंतरिक बगावत का मामला है और किसी ने भी स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता नहीं छोड़ी है.’’ इस पर शीर्ष अदालत ने साल्वे से कहा कि वह प्रतिवादी उद्धव ठाकरे गुट द्वारा राज्य में उत्पन्न हुए राजनीतिक संकट से उठे संवैधानिक मुद्दों को लेकर दायर याचिकाओं पर फिर से जवाब दाखिल करें.

शुरू में सिब्बल और वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने कहा कि शिंदे गुट ने पार्टी की बैठक में शामिल होने के मुख्य सचेतक के निर्देश का अनुपालन नहीं किया जिसके कारण संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत वह अयोग्य होता है. सिब्बल ने कहा, ‘‘दो तिहाई एक ओर चले जाएं और बाकी एक तिहाई पूर्व की स्थिति में ही रहें. ऐसे में दो तिहाई यह नहीं कह सकते कि वे ही असली राजनीतिक पार्टी हैं. शिंदे गुट ने निर्वाचन आयोग के समक्ष स्वीकार किया था कि वे अलग हुए हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक बार निर्वाचित होने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी के साथ आपका हित सध गया है और आपका राजनीतिक पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है.’’ सिब्बल का समर्थन करते हुए सिंघवी ने कहा कि इसी के साथ दल-बदल कानून लागू हो जाता है. सिंघवी ने कहा, ‘‘दल-बदल का संवैधानिक पाप इतना गंभीर है कि उन्हें (बागी विधायक) सरकार के तौर पर मान्यता नहीं दी जानी चाहिए. उनके कृत्य से स्वयं बहुमत बदल जाता है, जिसको रोकने के उद्देश्य से 10वीं अनुसूची बनी.’’

साल्वे ने इसका विरोध करते हुए कहा, ‘‘भारत में हम राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को लेकर भ्रमित हैं. मैं शिवसेना से हूं और मेरे मुख्यमंत्री ने मुझसे मिलने से इनकार कर दिया. मैं तथ्य नहीं दे रहा, सैद्धांतिक बात कर रहा हूं. मैं मुख्यमंत्री को बदलना चाहता हूं. यह पार्टी विरोधी नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर का मामला है.’’ दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को करेगी और निर्णय देने के मुद्दे को तय करेगी. न्यायालय ने साल्वे से कानूनी सवालों का पुन: जवाब तैयार करने को कहा. पीठ बृहस्पतिवार को सबसे पहले इस मामले पर सुनवाई करेगी.

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu