सामाजिक-आर्थिक विकास की पहल को ‘मुफ्त उपहार’ नहीं कहा जा सकता : द्रमुक

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 21 Aug 2022 06:51 PM
सामाजिक-आर्थिक विकास की पहल को ‘मुफ्त उपहार’ नहीं कहा जा सकता : द्रमुक
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चेन्नई. द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने रविवार को कहा कि पिछड़े, अति पिछड़े और समाज के हाशिए वाले सभी वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों को ‘मुफ्त उपहार’ कहना अस्वीकार्य है. इस मामले में उच्चतम न्यायालय का रुख करने वाली तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा कि ‘मुफ्त उपहार’ (फ्रीबीज) शब्द का प्रयोग गलत, अनुचित और अस्वीकार्य है.

याचिकाकर्ता द्रमुक के संगठन सचिव आर. एस. भारती ने कहा कि द्रविड़ आंदोलन की विचारधारा का मूल समाज के पिछड़े, अति पिछड़े और अन्य सभी उत्पीड़ित वर्गों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान है. लगभग एक सदी पहले ‘जस्टिस पार्टी’ के दिनों से द्रविड़ आंदोलन की उत्पत्ति और उदय का का जिक्र करते हुए भारती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि हाशिए पर पहुंच गए और पिछड़े लोगों के लिए शिक्षा के द्वार खोलना जस्टिस पार्टी (जेपी) के दिग्गज त्यागरयार (1852-1925) द्वारा इस दिशा में उठाया गया पहला कदम था. जेपी नेता ने स्कूली छात्रों को शिक्षा, किताबें और दोपहर का भोजन नि:शुल्क उपलब्ध कराया.

उन्होंने कहा, ‘‘इसने छात्रों को स्कूलों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया. आप इस तरह की पहल को एक ‘मुफ्त उपहार’ कैसे बता सकते हैं? इस तरह की पहल समय के साथ विकसित हुई है. मध्याह्न भोजन की योजना अंतत: एक पौष्टिक भोजन कार्यक्रम के रूप में विकसित हुई. अब, हमारे मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने स्कूली छात्रों के लिए जलपान योजना शुरू की है.’’ उन्होंने कहा कि केवल ऐसी योजनाओं ने सामाजिक बाधाओं को तोड़ा है और पिछड़े वर्गों और अन्य लोगों तक शिक्षा के मार्ग खोले हैं, जो कभी लोगों के एक छोटे से वर्ग के लिए उपलब्ध थे.

भारती ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज के समय में एसएसएलसी स्तर तक शिक्षा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती थी. उन्होंने कहा कि जब द्रमुक के संस्थापक सी. एन. अन्नादुरई ने पदभार ग्रहण किया, तो उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि यह महाविद्यालय पूर्व के स्तर तक बिना किसी शुल्क के छात्रों के लिए उपलब्ध रहे.

उन्होंने कहा, ‘‘जब कलैग्नार (दिवंगत मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि) मुख्यमंत्री बने तो इसे स्रातक स्तर तक बढ़ा दिया गया. इससे यह सुनिश्चित हुआ कि समाज के पिछड़े वर्गों और उत्पीड़ित वर्गों के छात्र शिक्षा प्राप्त करें.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे मुख्यमंत्री स्टालिन द्वारा छात्राओं के लिए घोषित 1,000 रुपये की सहायता योजना को ही लें, यह महिला सशक्तीकरण है, यह सामाजिक न्याय के प्रतीक पेरियार ईवी रामासामी का सपना था और द्रविड़ विचारधारा का आधार है.’’

भारती ने सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और कम उम्र में महिलाओं के उच्च शिक्षा से दूर रहकर शादी करने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह सहायता योजना निस्संदेह परिवारों को लड़कियों को कॉलेज भेजने के लिए प्रेरित करेगी. उन्होंने कहा कि स्रातक होने से लड़कियों को रोजगार तलाशने और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने में मदद मिलेगी.

राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि राज्य के स्कूलों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को उनकी स्रातक डिग्री, डिप्लोमा और आईटीआई पाठ्यक्रमों के निर्बाध रूप से पूरा होने तक सीधे उनके बैंक खाते में 1,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा. राज्य सरकार ने कहा था कि छात्राएं अन्य छात्रवृत्ति के अलावा भी इस योजना के लिए पात्र होंगी. इस कार्यक्रम के माध्यम से, लगभग छह लाख छात्राओं को हर साल लाभ मिल सकता है. इस नयी योजना के लिए राज्य के बजट (2022-23) में 698 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.

इस साल, मूवलुर रामामिरथम अम्मैयार मेमोरियल मैरिज असिस्टेंस स्कीम को मूवलुर रामामिरथम अम्मैयार हायर एजुकेशन एश्योरेंस स्कीम के रूप में बदल दिया गया. भारती ने करुणानिधि की पिछली द्रमुक सरकार (2006-11) के दौरान लाभार्थियों को रंगीन टेलीविजन मुहैया कराने का एक और उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, ‘‘इस योजना के लागू होने से, कोई व्यक्ति झोपड़ी में रहते हुए भी टेलीविजन ले सकता है. कभी जो अपने पसंदीदा कार्यक्रम को देखने के लिए दूसरों के घरों के सामने खड़े होते थे अब वे इसका लाभ उठा सकते हैं. इसलिए, यह उन्हें मुफ्त में दिया गया था. यह बिल्कुल मुफ्त की सौगता नहीं थी.’’

भारती ने कहा कि उनकी पार्टी सामाजिक समानता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा, हालांकि, लोगों को चार वर्गों में विभाजित करने वाले ‘मनु धर्म’ का हवाला देने वाले समानता को नहीं समझ सकते हैं. उन्होंने कहा कि इसलिए पिछड़े वर्गों, अति पिछड़े, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के उद्देश्य से की गई पहल को ‘मुफ्त’ करार देना सामाजिक न्याय के उच्च सिद्धांतों के खिलाफ है.

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