प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक: फिरोजाबाद के एसएसपी कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल पाए गए

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 25 Aug 2022 05:48 PM
प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक: फिरोजाबाद के एसएसपी कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल पाए गए
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनवरी में पंजाब यात्रा के दौरान हुई सुरक्षा चूक के मामले की जांच करने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति ने पाया है कि फिरोजपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पर्याप्त बल उपलब्ध होने के बावजूद अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहे.

समिति ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि एक निगरानी समिति होना चाहिए जो प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे पुलिस अधिकारियों के लिए संवेदनशीलता एवं सुरक्षा पाठ्यक्रम तथा ‘ब्लू बुक’ की समय समय पर समीक्षा करे और उसे अद्यतन करे. ‘ब्लू बुक’ सुरक्षा से संबंधित दिशानिर्देशों का एक दस्तावेज होता है, जिसमें अति विशिष्ट लोगों (वीवीआईपी) की सुरक्षा को लेकर पालन किये जाने वाले नियमों का ब्यौरा होता है. ‘ब्लू बुक’ में राज्य के अधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के वास्ते अपनाई जाने वाली एक स्पष्ट और विस्तृत प्रक्रिया होती है.

पांच सदस्यीय समिति ने उच्चतम न्यायालय को यह भी बताया कि एसएसपी के पास पर्याप्त समय था, उसके बाद पंजाब के तत्कालीन अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजीपी) जी. नागेश्वर राव ने उन्हें सूचित किया कि प्रधानमंत्री आकस्मिक मार्ग से जायेंगे और वह उनके निर्देश पर कार्रवाई करने में विफल रहे. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट को उचित कार्रवाई के लिए सरकार के पास भेजेगा.

प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने समिति की रिपोर्ट को पढ़ते हुए कहा, ‘‘ फिरोजपुर के एसएसपी अवनीत हंस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहे. पर्याप्त बल उपलब्ध होने के बावजूद और प्रधानमंत्री के मार्ग पर प्रवेश की सूचना दो घंटे पहले देने के बावजूद वह ऐसा करने में विफल रहे.’’

पीठ ने रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा, ‘‘पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध होने के बावजूद वह ऐसा करने में विफल रहे जबकि उन्हें दो घंटे पहले सूचित किया गया था कि प्रधानमंत्री उस मार्ग से गुजरेंगे.’’ समिति ने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कुछ उपचारात्मक उपायों की भी पहचान की है. गौरतलब है कि पांच जनवरी को फिरोजपुर में प्रदर्शनकारियों की नाकेबंदी के कारण प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर फंस गया था जिसके बाद वह एक रैली समेत किसी भी कार्यक्रम में शिरकत किए बिना ही लौट आए थे.

उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा में हुई चूक की जांच के लिए 12 जनवरी को शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की थी और कहा था कि ‘‘सवालों को एकतरफा जांच पर नहीं छोड़ा जा सकता’’ और न्यायिक क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा इसे देखे जाने की आवश्यकता है.

इस मामले में केंद्र और पंजाब सरकार के आदेश पर अलग-अलग जांच को रोकते हुए पीठ ने कहा था कि सुरक्षा चूक पर ‘‘किसी पार्टी ने गंभीरता से सवाल नहीं उठाया है’’ और स्वतंत्र जांच जरूरी है क्योंकि दोनों सरकारों के बीच कहासुनी से कोई हल नहीं निकलेगा, बल्कि इस महत्वपूर्ण स्तर पर एक मजबूत प्रणाली की जरूरत है.

पीठ ने न्यायमूर्ति मल्होत्रा के अलावा राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के महानिदेशक या उनके प्रतिनिधि (जो पुलिस महानिरीक्षक से नीचे की रैंक के नहीं हों), चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक तथा पंजाब के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा) को समिति का सदस्य बनाया था. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भी इसमें सदस्य बनाया गया था.
समिति को भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक पदाधिकारियों की सुरक्षा पर ‘‘सुझाव या सिफारिश’’ देने का काम सौंपा गया था.

शीर्ष अदालत का यह आदेश एक संगठन ‘लॉयर्स वॉयस’ की याचिका पर आया, जिसमें पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक की जांच किये जाने का अनुरोध किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो.

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