रांची/दुमका. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने सोमवार को दावा किया कि दुमका में उस नाबालिग लड़की के मामले में भारत के बाहर से सक्रिय तत्वों का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता जिसकी कथित पीछा करने वाले व्यक्ति द्वारा आग लगा दिये जाने के बाद मौत हो गई थी।
एनसीपीसीआर प्रमुख कानूनगो ने कहा कि वह एक उच्च स्तरीय एजेंसी द्वारा घटना की जांच की सिफारिश करेंगे, क्योंकि उन्हें लगता है कि स्थानीय पुलिस घटना की जांच नहीं कर पाएगी। दुमका में दो किशोरियों की अस्वभाविक मौतों की जांच के लिए एनसीपीसीआर टीम के साथ आए कानूनगो ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दूसरी नाबालिग के मामले में “जांच में बाधा डालने की कोशिश” कर रही है, जिसके साथ कथित तौर पर शादी का झांसा देकर बलात्कार किया गया था और बाद में एक पेड़ से लटका दिया गया था।
दोनों मामलों में कुल मिलाकर तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
कानूनगो ने कहा कि बच्ची की मौत के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट को देखते हुए ‘‘दुमका मामले में देश के बाहर से सक्रिय तत्वों के हाथ होने से इंकार नहीं किया जा सकता।’’ कानूनगो उस किशोरी के परिवार से मुलाकात करने के बाद बोल रहे थे जिसकी झुलसने की वजह से मृत्यु हो गई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि स्थानीय पुलिस इस (सोशल मीडिया पोस्ट) की जांच करने में सक्षम नहीं है और एक उच्च स्तरीय एजेंसी द्वारा जांच की सिफारिश करेंगे।’’ कानूनगो ने कहा कि एनसीपीसीआर की टीम को पीड़ित परिवार से पता चला कि पुलिस ने न तो परिवार के सभी सदस्यों के बयान दर्ज किए और न ही मृतक के सोशल मीडिया अकाउंट के बारे में जानकारी जुटायी।
उन्होंने कहा, ‘‘जांच में खामियां हैं। पुलिस को आरोपी की पृष्ठभूमि के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हमने पुलिस से इस बारे में पूछा है।’’ मुख्य आरोपी की पहचान शाहरुख के रूप में हुई है। उसने 23 अगस्त को कथित तौर पर लड़की के कमरे की खिड़की के बाहर से उस पर पेट्रोल डाल दिया था जब वह सो रही थी और उसे आग लगा दी थी। किशोरी ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया था। किशोरी ने झुलसने की वजह से 28 अगस्त को दम तोड़ दिया था। शाहरुख और उसे पेट्रोल की आपूर्ति करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद निशिकांत दुबे ने पहले इस बात पर जोर दिया था कि यह ंिहदू/मुस्लिम मुद्दा नहीं है, बल्कि देश को धार्मिक आधार पर बांटने की कट्टरपंथी ताकतों की कोशिश है। कानूनगो ने कहा कि एनसीपीसीआर की टीम दूसरे पीड़ित के परिवार के सदस्यों से मिलने में विफल रही क्योंकि वे उस गांव में नहीं थे जहां उन्हें जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार होना चाहिए था।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रशासन ने हमें बताया था कि परिवार कुछ कर्मकांड करने के लिए गांव में होगा। इसलिए, हमने गांव का दौरा किया लेकिन वे वहां नहीं थे…यह दुर्भाग्यपूर्ण है।’’ कानूनगो ने आरोप लगाया कि उन्होंने सरकार को दौरे की जानकारी दी थी, लेकिन जरूरी इंतजाम नहीं किए गए।
कानूनगो ने पहले एक ट्वीट करके कहा था कि पड़ोसियों ने एनसीपीसीआर टीम को बताया कि कोई उन्हें कार में बैठाकर ले गया। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार बहुत असहयोगी है… वह जांच में बाधा डाल रही है।” चौदह वर्षीय एक आदिवासी लड़की का एक व्यक्ति द्वारा शादी का झांसा देकर कथित तौर पर यौन शोषण किया गया। लड़की दो सितंबर को दुमका में एक पेड़ से लटकी मिली थी और उसकी मां ने दावा किया था कि उसके साथ बलात्कार किया गया था और उसे मार डाला गया था। आरोपी को पकड़ लिया गया है।
कानूनगो के बयान पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की प्रवक्ता सुप्रिया भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘एनसीपीसीआर एक वैधानिक निकाय है। इसे अपनी टिप्पणी करने दें।’’ इस बीच, घटनाओं के विरोध में आदिवासी संगठनों द्वारा आहूत बंद से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। कई दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे जबकि सरकारी कार्यालय खुले रहे। वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई क्योंकि मारंग बुरु अखाड़ा, आदिवासी अधिकार मंच और आदिवासी क्रांति सेना जैसे आदिवासी निकायों के सदस्य सड़क पर उतर आए और विभिन्न ंिबदुओं पर सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दोषियों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी जाए।