मुंबई. कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के वरिष्ठ नेताओं विजय वडेट्टीवार और अशोक चव्हाण ने पार्टी नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता सोमवार को बहाल किए जाने को लोकतंत्र की जीत बताया और कहा कि इससे विपक्षी दलों का गठबंधन ‘इंडिया’ मजबूत हुआ है. शिवसेना (यूबीटी) के नेता एवं लोकसभा सदस्य अरविंद सावंत ने भी संसद के निचले सदन में राहुल गांधी की वापसी का स्वागत किया.
‘मोदी उपनाम’ को लेकर की गई टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा राहुल की दोषसिद्धि पर रोक लगाए जाने के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की लोकसभा सदस्यता सोमवार को बहाल कर दी गई. इस संबंध में लोकसभा सचिवालय ने एक अधिसूचना जारी की.
सचिवालय ने अधिसूचना में कहा कि उच्चतम न्यायालय के चार अगस्त के फैसले के मद्देनजर राहुल गांधी को संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित किए जाने संबंधी 24 मार्च की अधिसूचना का क्रियान्वयन आगामी न्यायिक फैसले तक रोका जाता है. निचले सदन में केरल की वायनाड सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले गांधी के संसद में पहुंचने पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया.
इससे पहले ‘मोदी उपनाम’ वाली टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में गुजरात की एक अदालत ने राहुल को दोषी करार दिया था और उन्हें दो साल के कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहरा दिया गया था. किसी सांसद को दो साल और उससे अधिक की जेल की सजा होने पर उसे अयोग्य ठहराए जाने का प्रावधान है.
महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता वडेट्टीवार ने संवाददाताओं से कहा, ”केंद्र सरकार को चिंता थी कि राहुल गांधी उसके गलत कामों का पर्दाफाश कर देंगे. राहुल आमजन के हित में लोकसभा में अपनी आवाज उठाते रहेंगे.” वडेट्टीवार ने कहा कि राहुल ने लोकसभा में राफेल विमान (सौदे) और अडाणी समूह से जुड़े मामले उठाए.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने केंद्र सरकार के ”गलत फैसलों” की हमेशा आलोचना की है और वह ऐसा करना जारी रखेंगे.
वडेट्टीवार ने कहा, ”लोकसभा में राहुल की वापसी से विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस) मजबूत होगा.” अशोक चव्हाण ने ट्वीट किया कि पूरा देश इस फैसले का इंतजार कर रहा था. उन्होंने इसे ”न्याय और लोकतंत्र की जीत” करार दिया.
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ”यह केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि इस देश में लोकतंत्र के समर्थकों के लिए भी खुशी का क्षण है.” चव्हाण ने ट्वीट किया कि राहुल गांधी सड़क पर उतरकर देश के मुद्दों के लिए लड़े और अब इन मुद्दों को लोकसभा में उठाने का उनका अधिकार बहाल कर दिया गया है.
शिवसेना (यूबीटी) नेता सावंत ने भी संवाददाताओं से कहा, ”देश की स्वतंत्रता खतरे में है. हम लोकसभा में राहुल गांधी की वापसी का स्वागत करते हैं. उच्चतम न्यायालय का फैसला सरकार के षड्यंत्र के खिलाफ उसके मुंह पर तमाचा है.” उन्होंने कहा, ”गुजरात उच्च न्यायालय से पूछा जाना चाहिए कि पिछले साल राज्य में हुए विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात में (मोरबी) पुल ढहने के लिए जिम्मेदार लोगों का क्या हुआ. कई लोग मारे गए, लेकिन हमें अब भी नहीं पता कि उस मामले में किसे दोषी ठहराया गया.”