चंद्रयान-3′ चंद्रमा की सतह के और नजदीक पहुंचा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 14 Aug 2023 09:56 PM
चंद्रयान-3′ चंद्रमा की सतह के और नजदीक पहुंचा
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बेंगलुरु. भारत का महत्वाकांक्षी तीसरा चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ सोमवार को कक्षा में नीचे लाए जाने की एक और सफल प्रक्रिया से गुजरने के साथ ही चंद्रमा की सतह के और नजदीक पहुंच गया. बेंगलुरु में स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि चंद्रयान-3 अब चंद्रमा की ”निकटवर्ती कक्षा” में पहुंच गया है.

‘चंद्रयान-3’ का प्रक्षेपण 14 जुलाई को किया गया था और पांच अगस्त को इसने चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया था. इसके बाद छह और नौ अगस्त को चंद्रयान को कक्षा में नीचे लाए जाने की दो प्रक्रियाओं को अंजाम दिया गया. इसरो ने ट्वीट किया, ”चंद्रयान को चंद्रमा की सतह के नजदीक लाने की प्रक्रिया शुरू. आज की गई प्रक्रिया के बाद चंद्रयान-3 की कक्षा घटकर 150 किमी ७ 177 किमी रह गई है.” उसने बताया कि अगली प्रक्रिया को 16 अगस्त को सुबह करीब साढ़े आठ बजे अंजाम दिए जाने की योजना है.

इसरो ने अभियान के आगे बढ़ने पर चंद्रयान-3 की कक्षा धीरे-धीरे घटानी शुरू की तथा उसे चंद्र ध्रुव के समीप लाने की प्रक्रियाओं को अंजाम दिया. इसरो के सूत्रों के अनुसार, अंतरिक्ष यान को 100 किमी की कक्षा तक पहुंचाने के लिए एक और प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा जिसके बाद लैंडर और रोवर से युक्त ‘लैंडिंग मॉड्यूल’ आगे की प्रक्रिया के तहत ‘प्रॅपल्शन मॉड्यूल’ से अलग हो जाएगा. इसके बाद, लैंडर के ‘डीबूस्ट’ (धीमे होने की प्रक्रिया) से गुजरने और 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने की उम्मीद है.

सूर्य के अध्ययन के लिए अभियान की तैयारी में जुटा इसरो, प्रक्षेपण के लिए उपग्रह श्रीहरिकोटा पहुंचा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को कहा कि सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष आधारित भारतीय वेधशाला आदित्य-एल-1 जल्द ही अपने प्रक्षेपण के लिए तैयार हो रही है. राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी का मुख्यालय बेंगलुरु में है. एजेंसी ने अभियान पर अद्यतन जानकारी देते हुए कहा कि यहां यू. आर. राव उपग्रह केंद्र में निर्मित उपग्रह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में इसरो के अंतरिक्ष केंद्र पर पहुंच गया है.

प्रक्षेपण की तारीख के बारे में पूछे जाने पर इसरो के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ”प्रक्षेपण सितंबर के पहले सप्ताह में होने की संभावना है.” अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज बिंदु 1 (एल-1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में रखे जाने की उम्मीद है जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है.

‘लैग्रेंज बिंदु’ का आशय अंतरिक्ष में स्थित उन बिंदुओं से होता है, जहां दो अंतरिक्ष निकायों (जैसे सूर्य और पृथ्वी) के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण आकर्षण और प्रतिकर्षण का क्षेत्र उत्पन्न होता है. इसका नामकरण इतालवी-फ्रांसीसी गणितज्ञ जोसेफ-लुइस लैग्रेंज के नाम पर किया गया है.

इसरो ने कहा कि एल-1 बिंदु के आसपास ‘हेलो’ कक्षा में रखे गए उपग्रह से सूर्य को बिना किसी छाया/ग्रहण के लगातार देखने फायदेमंद हो सकता है. इसरो ने कहा, ”इससे वास्तविक समय में सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर इसके प्रभाव को देखने का अधिक लाभ मिलेगा.” इस अंतरिक्ष यान में सात पेलोड हैं जो विद्युत चुम्बकीय और कण और चुंबकीय क्षेत्र डिटेक्टर का उपयोग करके फोटोस्फेयर (प्रकाशमंडल), क्रोमोस्फेयर (सूर्य की दिखाई देने वाली सतह से ठीक ऊपरी सतह) और सूर्य की सबसे बाहरी परत (कोरोना) का निरीक्षण करने में मदद करेंगे.

विशेष सुविधाजनक बिंदु एल-1 का उपयोग करते हुए चार पेलोड सीधे सूर्य की ओर होंगे और शेष तीन पेलोड एल-1 पर कणों और क्षेत्रों का यथा स्थान अध्ययन करेंगे. इसरो ने कहा, ”आदित्य एल-1 पेलोड से कोरोना की उष्मा, कोरोना से विशाल पैमाने पर निकलने वाली ऊर्जा, उसकी रोशनी की गतिविधियों और विशेषताओं, अंतरिक्ष मौसम की गतिशीलता, कण और क्षेत्रों के प्रसार आदि की समस्या को समझने में बेहद अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है.”

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