श्रमिकों को निकालने के लिए मलबे में पाइप डालने की प्रक्रिया शुरू, एक श्रमिक की बेटे से बातचीत हुयी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 14 Nov 2023 10:22 PM
श्रमिकों को निकालने के लिए मलबे में पाइप डालने की प्रक्रिया शुरू, एक श्रमिक की बेटे से बातचीत हुयी
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उत्तरकाशी/रांची. उत्तराखंड के उत्तरकाशी के सिलक्यारा-डंडालगांव सुरंग के एक हिस्से के ढहने से पिछले दो दिनों से उसके अंदर फंसे 40 श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए बचावर्किमयों ने मंगलवार को मलबे में बड़े व्यास के एमएस (माइल्ड स्टील) पाइप डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी.

अधिकारियों ने यहां बताया कि सिलक्यारा सुरंग के धंसाव वाले हिस्से में क्षैतिज ड्रिलिंग कर उसमें पाइप डाले जाएंगे ताकि उसके जरिए अंदर फंसे श्रमिक बाहर आ सकें. यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार की सुबह निर्माणाधीन सुरंग का सिलक्यारा की ओर से मुहाने से 270 मीटर अंदर करीब 30 मीटर का हिस्सा भूस्खलन से ढह गया था और तब से 40 श्रमिक उसके अंदर फंसे हुए हैं. उन्हें निकालने के लिए युद्वस्तर पर बचाव एवं राहत अभियान चलाया जा रहा है.

इस बीच अंदर फंसे श्रमिकों में से एक गब्बर सिंह नेगी से उसके बेटे आकाश ने पाइप के जरिए बातचीत की जिससे उसके साथ ही अन्य श्रमिकों के परिजनों को भी राहत मिली. अधिकारियों ने बताया कि 900 मिमी व्यास के पाइप और सुरंग के अंदर क्षैतिज ड्रिलिंग कर उन्हें मलबे में डालने के लिए आगर मशीन तड़के ही मौके पर पहुंचा दी गई है . उन्होंने बताया कि फिलहाल आगर ड्रिलिंग मशीन के लिए प्लेटफार्म बनाया जा रहा है ओर मौके पर जरूरी साजो सामान के साथ विशेषज्ञ तथा इंजीनियर भी पहुंच चुके हैं.

सुरंग में फंसे सभी श्रमिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं जिन्हें लगातार ऑक्सीजन, पानी, सूखे मेवे सहित अन्य खाद्य सामग्री, बिजली आदि पहुंचाई जा रही है . राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के अधिशासी निदेशक कर्नल (सेवानिवृत्त) संदीप सुदेहरा ने बताया कि बचावर्किमयों ने सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों से पाइप के द्वारा संपर्क स्थापित किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि विभिन्न एजेंसियां उन्हें बाहर निकालने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं.

उन्होंने बताया कि इससे श्रमिकों का मनोबल ऊंचा हुआ है. आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत कुमार सिन्हा ने उम्मीद जताई कि मंगलवार रात या बुधवार तक सभी श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाल लिया जाएगा. उत्तरकाशी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आर सी एस पवार ने कहा कि सुरंग के पास छह बिस्तरों का अस्थाई चिकित्सालय तैयार कर लिया गया है . उन्होंने बताया कि इसके अलावा मौके पर 10 एंबुलेंस के साथ मेडिकल टीमें भी तैनात कर दी गयी हैं जिससे फंसे श्रमिकों को बाहर निकलने पर उन्हें तत्काल चिकित्सीय मदद दी जा सके .

कोटद्वार के निकट बिशनपुर के रहने वाले गब्बर सिंह नेगी के पुत्र आकाश सिंह नेगी ने ‘पीटीआईभाषा’ को बताया, ‘ मुझे कुछ सेकेंड के लिए उस पाइप के जरिए अपने पिता से बात करने की अनुमति मिली जिससे सुरंग में फंसे श्रमिकों को आक्सीजन भेजी जा रही है .’ यह पूछे जाने पर कि उनके पिता ने उनसे क्या बातचीत की, आकाश ने कहा, ‘ उन्होंने बताया कि वे सभी सुरक्षित हैं . उन्होंने हमसे चिंता न करने को कहते हुए कहा कि कंपनी उनके साथ है .’

रविवार सुबह सुरंग के एक हिस्से के ढहने से उसमें फंस गए श्रमिकों की जानकारी मिलने के बाद आकाश अपने पिता की खोजखबर लेने अपने चाचा महाराज सिंह नेगी तथा तीन अन्य लोगों के साथ कोटद्वार से मौके पर पहुंचे हैं. इस बीच, फंसे श्रमिकों की सलामती के लिए एक स्थानीय पुजारी राम नारायण अवस्थी ने पूजा भी संपन्न कराई . उन्होंने बताया, ‘ मुझे कंपनी के लोगों ने पूजा संपन्न कराने को कहा जिससे भगवान कृपा करें और सभी श्रमिक सुरक्षित बाहर निकल आएं . मैंने इसलिए पूजा संपन्न कराई.’

उत्तराखंड में सुरंग में फंसे झारखंड के 15 श्रमिक सुरक्षित हैं : अधिकारी

उत्तराखंड में निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढहने से फंसे झारखंड के सभी 15 श्रमिक सुरक्षित हैं और बुधवार तक उन्हें बचा लिये जाने की संभावना है. एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. एक बयान में कहा गया कि बचाव अभियान में मदद के लिए झारखंड सरकार की तीन सदस्यीय टीम पहले ही उत्तरकाशी पहुंच चुकी है और टीम ने उत्तराखंड के अधिकारियों से श्रमिकों की स्थिति के बारे में जानकारी ली.

उत्तराखंड सरकार ने उत्तरकाशी जिले के सिलक्यारा और डंडालगांव के बीच निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 40 श्रमिकों की सूची प्रदान की है. बयान में कहा गया है कि 40 श्रमिकों में से 15 झारखंड से हैं, जिसमें गिरिडीह के दो, खूंटी के तीन, रांची के तीन और पश्चिमी सिंहभूम के एक सहित नौ श्रमिकों ने सुरंग के अंदर से अपने परिवार के सदस्यों से बात की.

टीम का नेतृत्व कर रहे जेएपी-आईटी (झारखंड एजेंसी फॉर प्रमोशन ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) के सीईओ भुवनेश प्रताप सिंह ने कहा कि राज्य के सभी श्रमिक सुरक्षित हैं और उन्हें एयरलिफ्ट कर विमान से झारखंड वापस लाया जाएगा. विज्ञप्ति में कहा गया है, ”श्रमिकों को पाइप के माध्यम से भोजन और ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है.” मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”सुरंग में फंसे झारखंड के सभी मजदूर सुरक्षित हैं. झारखंड से तीन सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची और मजदूरों से बात की.” अधिकारियों ने कहा कि बचावर्किमयों ने मंगलवार को चार धाम मार्ग पर ढही निर्माणाधीन सुरंग के मलबे के माध्यम से चौड़े स्टील पाइप डालने की प्रक्रिया शुरू की, ताकि दो दिनों से अंदर फंसे 40 मजदूरों को बाहर निकाला जा सके.

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी अभिषेक रुहेला ने संवाददाताओं को बताया कि पाइप डालने के लिए ‘ऑगर मशीन (मिट्टी खोदने वाली मशीन)’ की मदद से खुदाई शुरू हो गई है. सुरंग का दौरा करने और साइट पर अधिकारियों से अभियान के बारे में जानकारी लेने के बाद उन्होंने कहा, ”अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो फंसे हुए मजदूरों को बुधवार तक निकाल लिया जाएगा.”

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