संसद सुरक्षा चूक : दिल्ली पुलिस की टीम कोलकाता पहुंची

पुलिस ने प्राथमिकी की प्रति मांगने वाली आरोपी की याचिका का विरोध किया

कोलकाता. दिल्ली पुलिस की तीन सदस्यीय विशेष टीम सोमवार को कोलकाता पहुंची और संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में गिरफ्तार कथित ‘मास्टरमाइंड’ ललित मोहन झा से जुड़े विभिन्न स्थानों का दौरा किया. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. टीम के सदस्य कोलकाता पुलिस के कुछ अधिकारियों के साथ सबसे पहले बड़ाबाजार गए जहां झा और उसका परिवार एक महीने पहले तक रह रहा था.

कोलकाता पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”उन्होंने स्थानीय लोगों, एक चाय की दुकान के मालिक से बात की और झा के बारे में विवरण दर्ज किया जो छात्रों को ट्यूशन पढ.ाता था. वे रवीन्द्र सारणी के घर में भी गए जहां झा किराए पर रहता था.” उन्होंने कहा कि ”दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ में शामिल अधिकारी उस कमरे में दाखिल नहीं हो सके जिसमें झा और उसका परिवार रहता था. इसके बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस थाने से संपर्क किया और उस व्यक्ति तक पहुंचने में सहायता मांगी जिसके पास कमरे की चाबी थी.” दिल्ली पुलिस टीम के कोलकाता के बागुईहाटी स्थित एक मकान में भी जाने की संभावना है, जहां झा और उसका परिवार किराए पर रहा था.

पश्चिम बंगाल के विशेष कार्यबल (एसटीएफ)की कोलकाता इकाई को जांच के बारे में जानकारी मिली कि झा और उसका परिवार बड़ाबाजार, गिरीश पार्क और बागुईआटी के अलावा दो अन्य स्थानों पर भी किराए पर रहा था. अधिकारी ने बताया, ”अब तीनों पते उनके नहीं हैं क्योंकि परिवार बिहार लौट चुका है.” दिल्ली पुलिस ने संसद की सुरक्षा में चूक मामले में अब तक कथित तौर पर संलिप्त छह लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम या यूएपीए के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.

तेरह दिसंबर को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा से दो लोग सदन के अंदर कूद गए थे. आरोपियों ने सदन में ‘कैन’ से पीले रंग का धुंआ फैलाया और नारेबाजी की. हालांकि, सांसदों ने उन्हें पकड़ लिया. उसी समय संसद भवन के बाहर दो अन्य लोगों ने भी ‘कैन’ से रंगीन धुंआ फैलाया और नारेबाजी की. ललित और अन्य आरोपियों ने बाद में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.

पुलिस ने प्राथमिकी की प्रति मांगने वाली आरोपी की याचिका का विरोध किया

दिल्ली पुलिस ने संसद की सुरक्षा में चूक मामले में गिरफ्तार एक आरोपी द्वारा प्राथमिकी की एक प्रति देने के अनुरोध से संबंधित उसके आवेदन का सोमवार को अदालत में यह कहकर विरोध किया कि इस स्तर पर ”महत्वपूर्ण जानकारी” के ”लीक” होने से जांच प्रभावित हो सकती है.

दिल्ली पुलिस ने विशेष न्यायाधीश हरदीप कौर के समक्ष यह दलील दी, जिन्होंने नीलम आजाद द्वारा दायर आवेदन पर आदेश 19 दिसंबर के लिए सुरक्षित रख लिया. मामले में गिरफ्तार एकमात्र महिला आरोपी ने दावा किया है कि उसे प्राथमिकी की प्रति उपलब्ध नहीं कराना उसके ”संवैधानिक अधिकार” का उल्लंघन है, क्योंकि वह अपने खिलाफ लगे आरोपों से अनजान है.

पुलिस ने अदालत को बताया कि आतंकवाद सहित गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की कड़ी धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी की प्रति संवेदनशील प्रकृति के होने कारण ”सीलबंद लिफाफे” में है. लोक अभियोजक अखंड प्रताप सिंह ने अदालत को बताया, ”जांच जारी है और आरोपी पुलिस रिमांड में है. कुछ अन्य व्यक्ति, जो इसमें शामिल हो सकते हैं, वे अब भी फरार हैं. इसलिए इस स्तर पर आरोपी को प्राथमिकी की प्रति प्रदान करना जांच को प्रभावित कर सकता है.” बहस के दौरान नीलम आजाद के वकील ने कहा कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है.

नीलम के वकील ने अदालत को बताया,, ”(नीलम आजाद के) माता-पिता दर-दर भटक रहे हैं. दिल्ली पुलिस उसे अपने परिवार से मिलने की अनुमति नहीं दे रही है और प्राथमिकी की प्रति भी नहीं दे रही है जो उसके संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है.” अदालत ने शनिवार को नीलम की अर्जी पर पुलिस को नोटिस जारी किया था.

मामले में पुलिस ने नीलम के अलावा ललित झा, मनोरंजन डी, सागर शर्मा, अमोल शिंदे और महेश कुमावत को गिरफ्तार किया है. सभी आरोपियों से पुलिस हिरासत में पूछताछ की जा रही है. वर्ष 2001 के संसद में आतंकवादी हमले की बरसी के दिन एक बड़ी सुरक्षा चूक में दो व्यक्ति – सागर शर्मा और मनोरंजन डी दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए, ‘केन’ से पीले रंग का धुआं निकाला और जाने से पहले नारे लगाए. कुछ सांसदों और निगरानी एवं वार्ड कर्मचारियों ने उन्हें काबू में किया.

लगभग उसी समय दो अन्य आरोपियों – अमोल शिंदे और नीलम देवी ने भी संसद परिसर के बाहर ”तानाशाही नहीं चलेगी” के नारे लगाते हुए ‘केन’ से रंगीन गैस छोड़े. सागर, मनोरंजन, अमोल और नीलम को तुरंत हिरासत में ले लिया गया, जबकि उनके साथी विशाल को बाद में गुरुग्राम से हिरासत में लिया गया. संसद पहुंचने से पहले आरोपी विशाल के घर रुके थे. बाद में झा और कुमावत को गिरफ्तार कर लिया गया था.

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