धर्म पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि नैतिकता, नैतिक मूल्यों और कर्तव्य का समन्वित रूप : योगी आदित्यनाथ

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 24 Dec 2023 07:40 PM
धर्म पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि नैतिकता, नैतिक मूल्यों और कर्तव्य का समन्वित रूप : योगी आदित्यनाथ
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नोएडा. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि धर्म पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि नैतिकता, नैतिक मूल्यों और कर्तव्य का समन्वित रूप है. ग्रेटर नोएडा में स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए, आदित्यनाथ ने भगवान गौतम बुद्ध का आ”ान करते हुए कहा कि उनका जीवन न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि देश और दुनिया को एक नया रास्ता भी दिखाता है. समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि थे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौतम बुद्ध की शिक्षाएं लोगों को समाधान खोजने के लिए पहले समस्याओं को स्वीकार करने और एक टीम के रूप में काम करने के लिए प्रेरित करती हैं. उन्होंने कहा कि एक ही नेता के तहत काम करना अधिक फायदेमंद होता है. आदित्यनाथ ने कहा, ”बुद्ध ज्ञान और विवेक के साथ धर्म के मार्ग पर चलने और ज्ञान प्राप्त करने का संदेश देते हैं.” मुख्यमंत्री ने कहा कि दीक्षांत समारोह भारत की गुरुकल परंपरा से आया है, जिसमें गुरु शिक्षा देने के बाद अपने शिष्य को उपदेश देते हैं कि उन्होंने जो भी ज्ञान अर्जित किया है उसका सार सत्य बोलना और धर्म के मार्ग पर चलना है. उन्होंने बताया कि बुद्ध भी धर्म की शरण में जाने को कहते हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा, ” धर्म कोई पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि नैतिकता, नैतिक मूल्यों और कर्तव्य का समन्वित रूप है. यह हर देश, काल और परिस्थिति में एक समान रहता है. पूजा-पद्धति देश, काल और परिस्थिति के अनुसार बदलती रहती है. लेकिन धर्म एक शाश्वत प्रणाली है.” आदित्यनाथ ने कहा, “बुद्ध ने अपने प्रत्येक अनुयायी को ज्ञान और विवेक प्राप्त करने के लिए कहा है. इसके अलावा, उन्होंने उन्हें टीम भावना के साथ काम करने के लिए कहा. चाहे विश्वविद्यालय हो, उद्योग हो या परिवार, टीम के साथ काम करना हमेशा परिणाम देता है. हालांकि एक नेतृत्व में काम करने वाली टीम ही परिणाम देती . बुद्ध की शिक्षाएं मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं.” अपने संबोधन के दौरान, मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति को “शून्य से शिखर” तक पहुंचने का एक आदर्श उदाहरण बताया.

मुख्यमंत्री ने रविवार को डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों से कहा कि विश्वविद्यालय के बाद अनंत संभावनाएं उनका इंतजार कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि युवा पीढ.ी को दुनिया के कल्याण की दिशा तय करनी है. आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को “केवल डिग्री बांटने का केंद्र” बनकर नहीं रह जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “शैक्षिक संस्थानों का निर्माण समाज के सहयोग से प्राप्त धन से होता है, इसलिए हमें न केवल अपने माता, पिता और शिक्षकों के प्रति, बल्कि समाज के प्रति भी कृतज्ञ होना चाहिए.”

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