एडीजीपी विवाद: भाकपा ने वाम नीतियों से अलग रुख रखने वाले अधिकारियों को हटाने की मांग की

तिरुवनंतपुरम: केरल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एम.आर.अजितकुमार की 2023 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के दो नेताओं से की गई मुलाकात को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वाम सरकार में मुख्य सहयोगी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)ने बृहस्पतिवार को अधिकारी के एडीजीपी (कानून व्यवस्था)पद पर बने रहने पर नाखुशी जताई।

भाकपा के मुखपत्र ‘जनयुगम’ में लिखे लेख में पार्टी नेता के. प्रकाश बाबू ने कहा कि यह मुलाकात आधिकारिक हो या निजी यह एडीजीपी की जिम्मेदारी है कि वह स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि कम से कम इस मामले की जानकारी आधिकारिक रूप से पुलिस प्रमुख या गृह विभाग को दी जानी चाहिए। भाकपा नेता ने कहा कि एडीजीपी ऐसा करने को इच्छुक नहीं है, इसलिए उन्हें उनके पद से हटाया जाना चाहिए।

प्रकाश बाबू ने टिप्पणी की, ‘‘अधिकारी अगर जनता की सरकार के जन हितैषी रुख को नहीं समझता है तो इससे सरकार संकट में पड़ सकती है। यह वह स्थिति है जो एडीजीपी ने उत्पन्न की है।’’ उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय वामपंथी राजनीतिक दलों में इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि भारत में फासीवाद बहुसंख्यकवादी सांप्रदायिकता के रूप में प्रकट होता है।

भाकपा नेता ने कहा,‘‘प्रशासनिक व्यवस्था में किसी को भी ऐसे वाम लोकतांत्रिक मोर्चे या उसके नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों से विचलित नहीं होना चाहिए। यदि कोई राज्य कैडर अधिकारी उन नीतियों का उल्लंघन करता है या उनके खिलाफ काम करता है, तो उन्हें उन पदों से हटा दिया जाना चाहिए जो सरकार के दृष्टिकोण और सिद्धांतों को दर्शाते हैं।’’

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