अधीर रंजन ने की प्रधानमंत्री से मुलाकात, बांग्लाभाषी लोगों, मतुआ समुदाय के मुद्दों को उठाया

नयी दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और ”विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों पर हो रहे हमलों” के मुद्दे तथा मतुआ समुदाय की समस्याओं को उनके समक्ष उठाया. पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष चौधरी ने ऐसे हमलों को रोकने में मदद के लिए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि इससे राज्य में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा होने की आशंका है.

मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए चौधरी ने कहा कि उन्होंने विभिन्न राज्यों में काम करने वाले बंगाली मजदूरों का मुद्दा उठाया और साथ ही मतुआ समुदाय के समक्ष आ रही समस्याओं के बारे में भी बात की. प्रधानमंत्री के जवाब के बारे में पूछे जाने पर, चौधरी ने कहा, ”उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह स्थिति पर नज.र रख रहे हैं और ऐसा नहीं होना चाहिए.” पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले होने वाली इस मुलाकात के राजनीतिक महत्व के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ”इसका कोई राजनीतिक महत्व नहीं है. मैं कुछ दिन पहले दिल्ली आया था; इत्तेफ.ाक से मुझे उनसे मिलने का मौका मिला.” लोकसभा में कांग्रेस के नेता रह चुके चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र भी सौंपा, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि देश के कुछ हिस्सों में बांग्लाभाषी लोगों के साथ ”घुसपैठिए” की तरह व्यवहार किया जा रहा है.

चौधरी ने पत्र में कहा, ”उनका एकमात्र अपराध यह है कि वे बांग्ला भाषा में बात करते हैं जिसके कारण संबंधित प्रशासन अक्सर उन्हें पड़ोसी बांग्लादेश के लोग समझ लेता है और उन्हें घुसपैठिया मानकर उनसे उसी प्रकार व्यवहार करता है.” उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है और इस राज्य की सीमा बांग्लादेश से लगती है तथा देश के अन्य हिस्सों में ऐसे हमलों के कारण इन इलाकों में समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है.

कांग्रेस नेता के करीबी सूत्रों ने बताया कि उन्होंने भाजपा शासित राज्यों में बांग्लाभाषी लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने का मुद्दा उठाया. कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह भेदभाव, हिंसा और देश के अन्य हिस्सों से आए प्रवासी मजदूरों के उत्पीड़न के खिलाफ ”सभी राज्य सरकारों को संवेदनशील बनाएं”. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के 30 वर्षीय प्रवासी मजदूर ज्वेल राणा की ओडिशा के संबलपुर में ‘बीड़ी’ को लेकर हुए विवाद के बाद बुधवार को हत्या कर दी गई. मुंबई में भी दो प्रवासी मजदूरों को बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया. पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड ने कहा है कि उसे 10 महीनों में, खासकर भाजपा शासित राज्यों में, उत्पीड़न से संबंधित 1,143 शिकायतें मिली हैं.

चौधरी ने पहले पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी भाजपा दोनों पर आरोप लगाया था कि वे पश्चिम बंगाल में मतुआ समुदाय को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे इस समुदाय को कोई मदद नहीं कर रहा है.

मतुआ एक दलित हिंदू शरणार्थी समुदाय है जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण दशकों पहले बांग्लादेश से पलायन करके आया था और उत्तर 24 परगना, नदिया और दक्षिण 24 परगना के कुछ हिस्सों में उनकी अच्छी खासी आबादी है. चौधरी ने कहा था, “मतदाता सूची से ज़्यादातर मतुआ समुदाय के सदस्यों के नाम हटाने की साज.शि चल रही है.”

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