जम्मू. आतंकवादियों के हमले में अपने पति को गंवा चुकी सुनीता शर्मा ने इस घटना के लिए जिम्मेदार आतंकवादी के मारे जाने पर मंगलवार को सुरक्षाबलों को धन्यवाद दिया तथा कहा कि उन्हें इंसाफ मिल गया है. दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जिले के अचान इलाके में 26 फरवरी को आतंकवादियों ने एटीएम गार्ड एवं कश्मीरी पंडित संजय शर्मा (40) की गोली मारकर हत्या कर दी थी. संजय शर्मा सुनीता शर्मा के पति थे.
पुलिस ने कहा कि मंगलवार को जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में दो आतंकवादियों को मार गिराया जिनमें एक, संजय शर्मा का हत्यारा एवं प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य था. इस पर संतोष प्रकट करते हुए सुनीता शर्मा ने कहा कि घाटी में जिस तरह उनके पति को गोलियों से छलनी कर दिया गया, उस तरह किसी भी बेगुनाह की हत्या नहीं की जानी चाहिए.
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ” मेरे पति की हत्या में शामिल आतंकवादी का सफाया करने के लिए मैं सुरक्षाबलों को धन्यवाद देती हूं. मेरे पति बेगुनाह थे. मैं उस आतंकवादी के सफाये की प्रतीक्षा कर रही थी जिसने मेरे पति की जान ली थी. उन्होंने (सुरक्षाबलों ने) आज मुझे इंसाफ दे दिया.” इससे पहले अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कश्मीर क्षेत्र) विजय कुमार ने कहा कि मारे गये आतंकवादियों की पहचान मोरीफात मकबूल और जाजिम फारूक उर्फ अबरार के रूप में हुई है जो लश्कर ए तैयबा के आतंकवादी थे.
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”आतंकवादी अबरार कश्मीरी पंडित संजय शर्मा की हत्या में शामिल था.” सुनीता शर्मा ने कहा कि आज उनकी पीड़ा खत्म हुई. उन्होंने कहा, ” हमें इस इस पीड़ा से निजात मिली कि मेरे पति का हत्यारा जिंदा है. हमें अबतक पता नहीं चल पाया कि मेरे पति की हत्या क्यों की गयी. वह बीमार थे. मैं उस आतंकवादी के मारे जाने की खबर का पिछले सात-आठ महीने से प्रतीक्षा कर रही थी.” उन्होंने कहा कि उन्होंने (आतंकवादियों ने) उनके नाबालिग बच्चों से उनका पिता छीन लिया. उन्होंने कहा, ” मैं अपना पति एवं कश्मीर में अपना घर भी गंवा बैठी. सरकार ने मुझे नौकरी एवं क्षतिपूर्ति दी लेकिन पति को गंवाने का दर्द कभी नहीं जाएगा.”