CAA विरोधी प्रदर्शन : NIA अदालत ने अखिल गोगोई के खिलाफ यूएपीए के तहत आरोप तय किए

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 22 Oct 2024 08:33 PM
CAA विरोधी प्रदर्शन : NIA अदालत ने अखिल गोगोई के खिलाफ यूएपीए के तहत आरोप तय किए
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गुवाहाटी. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों में कथित भूमिका को लेकर असम के विधायक अखिल गोगोई और उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ मंगलवार को सख्त गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की प्रासंगिक धाराओं के तहत आरोप तय किए.

अदालत ने पहले इस मामले में चारों आरोपियों को ‘क्लीन चिट’ दे दी थी. एनआईए ने फैसले के खिलाफ गुवाहाटी उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने मामले को दोबारा खोलने और आरोप तय करने का आदेश दिया. गोगोई के वकील शांतनु बोरठाकुर ने बताया कि एनआईए के विशेष न्यायाधीश एसके शर्मा ने उनके मुवक्किल के खिलाफ यूएपीए की धारा-18 (आतंकवादी कृत्य की साजिश) और आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) तथा 153 बी (राष्ट्रीय एकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले बयान) के तहत आरोप तय किए.

उन्होंने बताया कि गोगोई के तीन सहयोगियों-धैज्य कुंवर, बिट्टू सोनोवाल और मानस कुंवर के खिलाफ यूएपीए की धारा-18 और आईपीसी की धारा-120बी के तहत आरोप तय किए गए. हालांकि, अदालत ने यूएपीए की धारा 39 (आतंकवादी संगठन को समर्थन देना) और आईपीसी की धारा 124 ए (देशद्रोह) शामिल करने से इनकार कर दिया, जिनका जिक्र एनआईए ने अपने आरोप पत्र में किया था.

बोरठाकुर ने कहा, “चारों आरोपी उच्चतम न्यायालय से मिली जमानत पर जेल से बाहर हैं और मुकदमे के दौरान उन्हें हिरासत में नहीं लिया जाएगा. मामला चलता रहेगा और आरोपी चाहें तो इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं.” एनआईए दिसंबर 2019 में असम में हुए सीएए विरोधी हिंसक प्रदर्शनों में कथित भूमिका के लिए गोगोई और उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ दो मामलों की जांच कर रही है.

निर्दलीय विधायक गोगोई ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “इससे एक बार फिर साबित होता है कि हम लोगों के साथ हैं और यह सरकार हमें जेल में कैद रखना चाहती है. एक फासीवादी और सांप्रदायिक सरकार के खिलाफ लड़ाई बहुत कठिन है.” उन्होंने बताया कि वह और उनके तीनों सहयोगी अपने खिलाफ आरोप तय किए जाने के फैसले को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे.

गोगोई ने कहा, “एनआईए ने यह मामला बंद कर दिया था, लेकिन सरकार हमारे पीछे पड़ी है. उसने उच्च न्यायालय का रुख किया और मामले को फिर से खुलवाया. सरकार का अत्यधिक दबाव था. यह भाजपा सरकार की मानसिकता को दर्शाता है.” शुरुआत में अदालत ने गोगोई की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, जबकि तीनों अन्य आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. गोगोई को 567 दिन बाद जेल से रिहा किया गया था, जब एनआईए के विशेष न्यायाधीश प्रांजल दास ने उन्हें और तीनों अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया था.

एनआईए जिन दो मामलों की जांच कर रही है, उनमें से एक में विशेष एनआईए अदालत ने गोगोई को जमानत दे दी थी. जांच एजेंसी के फैसले को चुनौती देने के बाद अप्रैल 2021 में उच्च न्यायालय ने भी इसे बरकरार रखा था. हालांकि, गोगोई को जेल से रिहा नहीं किया गया, क्योंकि सीएए विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े दूसरे मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी.

एक जुलाई 2021 को विशेष एनआईए अदालत ने गोगोई और उनके तीनों सहयोगियों को असम में दिसंबर 2019 में हुए सीएए-विरोधी प्रदर्शनों में भूमिका के आरोपों से बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह संकेत मिले कि ‘नाकाबंदी के आह्वान’ से देश की आर्थिक सुरक्षा को खतरा था या यह ‘एक आतंकवादी कृत्य’ था.

असम में 2021 में हुए विधानसभा चुनावों में सिबसागर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में किस्मत आजमाने वाले गोगोई राज्य में सलाखों के पीछे रहते हुए चुनाव जीतने वाले पहले व्यक्ति बने थे. उन्होंने अदालत से मिली विशेष अनुमति पर विधायक पद की शपथ ली थी. उच्च न्यायालय के मामले को फिर से खोलने की इजाजत दिए जाने के बाद गोगोई और अन्य आरोपियों ने शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसने उन्हें राहत प्रदान करते हुए सुनवाई पूरी होने तक उनकी जमानत बरकरार रखने का आदेश दिया.

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