मथुरा के जोधपुर झाल आर्द्रभूमि में सर्वेक्षण के दौरान लगभग 1500 प्रवासी व स्थानीय पक्षी देखे गए

Author: navabharat digital
UPDATED: Tue, 27 Jan 2026 03:30 PM
मथुरा के जोधपुर झाल आर्द्रभूमि में सर्वेक्षण के दौरान लगभग 1500 प्रवासी व स्थानीय पक्षी देखे गए
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मथुरा: मथुरा जिले के जोधपुर झाल में हाल में किये गए एक सर्वेक्षण के दौरान आर्द्रभूमि पर निर्भर 72 प्रजातियों और 11 लुप्तप्राय प्रजातियों के लगभग 1,500 पक्षी देखे गए हैं। विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। आगरा स्थित जैव विविधता अनुसंधान एवं विकास समिति (एक गैर-सरकारी संगठन) के पारिस्थितिकीविद् डॉ. के.पी. ंिसह के अनुसार, जोधपुर झाल आर्द्रभूमि में 50 से अधिक प्रजातियों के हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “ये पक्षी मध्य एशियाई मार्ग से होकर लगभग 9,000 किलोमीटर की दूरी तय करके आर्द्रभूमि और शहर के अन्य क्षेत्रों तक पहुंचते हैं। इस मार्ग में यूरोप और एशिया के लगभग 30 देश शामिल हैं।” उन्होंने कहा, “अलास्का से ब्लूथ्रोट, साइबेरिया से कॉमन पोचार्ड, मंगोलिया से बार-हेडेड गूज और उत्तरी चीन से ग्रे-हेडेड लैपंिवग जैसे पक्षी पहले ही आर्द्रभूमि में आ चुके हैं।”

डॉ. ंिसह ने बताया कि इन विभिन्न पक्षियों को मध्य एशियाई मार्ग के विभिन्न हिस्सों से शहर तक पहुंचने में 30-50 दिन लगते हैं। उन्होंने कहा, “प्रवासन उनके जीवन चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। रोचक तथ्य यह है कि प्रवास के दौरान प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी) के पीछे द्वितीयक उपभोक्ता (छोटे जानवरों को खाने वाले पक्षी) आते हैं।”

डॉ. ंिसह ने 18 जनवरी को जोधपुर झाल में जैव विविधता अनुसंधान एवं विकास समिति, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और सामाजिक वानिकी प्रभाग द्वारा आयोजित ‘वेटलैंड्स इंटरनेशनल की एशियाई जलपक्षी गणना-2026’ का हवाला देते हुए बताया कि इस गणना में 72 आर्द्रभूमि-आश्रित प्रजातियों और 11 लुप्तप्राय प्रजातियों के कुल 1493 पक्षियों की पहचान की गई।

डॉ. ंिसह और वन अधिकारी अमित दिवाकर के नेतृत्व में 8 विशेषज्ञों के एक दल ने आर्द्रभूमि का सर्वेक्षण करने के लिए आसपास की नहरों सहित 80 हेक्टेयर क्षेत्र में तीन घंटे से अधिक का समय लगा। आर्द्रभूमि-आश्रित पक्षियों में से 32 प्रवासी प्रजातियों के रूप में और 40 स्थानीय प्रजातियों के रूप में पहचाने गए।

ंिसह ने बताया कि 184 कॉमन टील, 387 बार-हेडेड गूज और 249 नॉर्दर्न ंिपटेल (जो कि संख्या में सबसे अधिक है) के साथ-साथ गैडवाल, यूरेशियन विजन, नॉर्दर्न शोवेलर, पाइड एवोसेट, लिटिल ंिस्टट, टैमरिन ंिस्टट, सैंडपाइपर, वैगटेल, ब्लैक-ंिवग्ड स्टिल्ट, पर्पल स्वैम्प हेन और कॉमन स्राइप भी पाए गए।

डॉ. ंिसह ने यह भी बताया कि जोधपुर झाल आर्द्रभूमि में जलीय वनस्पति के भीतर विभिन्न जल गहराई वाले नए सूक्ष्म पर्यावास विकसित करके पर्यावास क्षेत्र का विस्तार किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, आर्द्रभूमि पर निर्भर प्रजातियों की संख्या में वृद्धि हुई है। आगरा के मुख्य वन संरक्षक अनिल पटेल ने कहा कि वन विभाग की निरंतर निगरानी और संरक्षण के कारण प्रवासी पक्षियों पर खतरा कम हुआ है, जिससे उनकी आमद में वृद्धि हुई है।

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