बेंगलुरु. कर्नाटक सरकार ने चिक्कमगलुरु जिले में ‘श्री गुरु दत्तात्रेय बाबाबुदन स्वामी दरगाह/पीठ’ में धार्मिक अनुष्ठानों की निगरानी के लिए हिंदुओं और मुसलमानों को लेकर एक प्रबंधन समिति गठित करने का आदेश जारी किया है. कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री जे सी मधुस्वामी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उप-समिति की सिफारिशों के आधार पर 19 जुलाई को यह आदेश जारी किया गया. राज्य मंत्रिमंडल ने अपनी उप-समिति द्वारा की गई सिफारिशों को एक जुलाई को स्वीकार कर लिया था.
इससे पहले, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मार्च 2018 में आदेश जारी करके मुस्लिम मौलवी सैयद गौस मोहियुद्दीन शाह खदरी को विवादित धार्मिक स्थल पर अनुष्ठान करने के लिए नियुक्त किया था. नया आदेश इस पुराने आदेश की जगह लेगा. नए आदेश के मुताबिक, हिंदुओं और मुसलमानों की प्रबंधन समिति धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए एक ‘अर्चक’ और ‘मुजावर’ को नियुक्त करेगी.
कर्नाटक स्थित दत्ता पीठ का मुद्दा कई वर्षों से विवाद का कारण है. दत्तात्रेय के नाम पर एक हिंदू मंदिर और सूफी संत बाबा बुदन के नाम पर एक दरगाह पश्चिमी घाट की बाबाबुदनगिरि पहाड़ियों की गुफा में स्थित है. बाबा बुदन 16वीं सदी के सूफी संत थे. ऐसा कहा जाता है कि बाबा बुदन ने हज से लौटते समय यमन के मोचा बंदरगाह से सात कच्चे बीज लाकर भारत में पहली बार कॉफी के पौधे लगाए थे.
आदेश के अनुसार, गुफा में नंदा दीप प्रज्ज्वलित करने और ‘दत्तात्रेय पीठ/पादुके’ पर पुष्प चढ़ाने जैसे दैनिक अनुष्ठान करने के लिए ‘आगम शास्त्र’ का ज्ञान रखने वाले हिंदू पुजारी को नियुक्त किया जाएगा. प्रबंधन समिति ‘दत्ता माला’ और ‘दत्ता जयंती’ जैसे हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन के लिए भी कदम उठाएगी.
आदेश में कहा गया है कि प्रबंधन समिति द्वारा नियुक्त मुजावर हर शाम और सोमवार एवं बृहस्पतिवार को नमाज के बाद दरगाह पर आवश्यक अनुष्ठान करेगा. समिति के ‘मार्गदर्शन और निगरानी’ में वार्षिक उर्स आयोजित किया जाएगा. आदेश में कहा गया है कि समिति इसे लेकर भी मुजावर का ‘मार्गदर्शन’ करेगी कि उर्स के दौरान क्या किया जाना है.